Stock market: शुक्रवार के खत्म हुए कारोबारी हफ्ते में बाजार लगातार तीन हफ्तों की गिरावट से उबरता नजर आया और कमजोर ग्लोबल संकेतों और रुपए की पतली होती हालत के बावजूद करीब 1 फीसदी की बढ़त लेकर बंद हुआ। 7 अक्टूबर को खत्म हुए हफ्ते में बीएसई सेंसेक्स 764.37 अंक यानी 1.33 फीसदी की बढ़त के साथ 58191.29 के स्तर पर बंद हुआ जबकि निफ्टी 220.3 अंक यानी 1.28 फीसदी की बढ़त के साथ 17314.65 के स्तर पर बंद हुआ।
अगले हफ्ते कैसी रहेगी बाजार की चाल
Samco Securities के अपूर्वा सेठ का कहना है कि सोमवार 10 अक्टूबर से शुरु होने वाला अगला हफ्ता काफी उतार-चढ़ाव भरा रह सकता है। इस हफ्ते कई अहम इवेंट होने वाले हैं। पूरी दुनिया के बाजार की नजर अगले हफ्ते आने वाले FOMC मिनट्स पर रहेगी। ग्लोबल मार्केट की नजर अमेरिका, चीन और भारत के महंगाई आंकड़ों पर रहेगी। अगले हफ्ते भारत के सीपीआई आंकड़े आने वाले हैं जो बाजार पर असर डालने वाला सबसे बड़ा घरेलू फैक्टर होगा। इसके अलावा अगले हफ्ते से आईटी कंपनियों के सितंबर तिमाही के नतीजे आने शुरू हो जाएंगे। ऐसे में हमें बाजार में स्टॉक स्पेसिफिक एक्शन देखने को मिल सकता है। निवेशकों की नजर कंपनियों के लॉन्ग टर्म संभावनाओं और गाइडेंस पर रहेगी।
Religare Broking के अजीत मिश्रा का कहना है कि 10 अक्टूबर से शुरु होने वाले हफ्ते में निवेशकों और बाजार भागीदारों की नजर IIP, CPI और WPI जैसे आंकड़ों पर रहेगी। इसके साथ ही अगले हफ्ते से नतीजों का मौसम भी शुरू हो जाएगा और TCS, Infosys, HCL Tech और Wipro जैसी दिग्गज आईटी कंपनियां अपने नतीजे जारी करेंगी। इसके अलावा इसी दौरान Bajaj Auto और HDFC Bank जैसे दिग्गज भी अपने नतीजे पेश करेंगे। इन सब के बीच अमेरिकी मार्केट का प्रदर्शन एफआईआई का ट्रेड , करेंसी और क्रूड मार्केट की चाल भी बाजार की दिशा निर्धारण में अहम भूमिका निभाएंगे।
इंडेक्स की बात करें निफ्टी के लिए 16800-17100 के जोन मे सपोर्ट नजर आ रहा है। जबकि 17580-17900 पर रजिस्टेंस दिख रहा है। चूंकि सभी सेक्टरों में रोटेशन आधार पर ट्रैक्शन देखने को मिल रहा है। ऐसे में हमें अपने सेक्टर के टॉप परफॉर्मिंग स्टॉक्स पर नजर रखनी चाहिए और उनमें गिरावट पर खरीद करनी चाहिए।
Emkay Wealth Management के Joseph Thomas का कहना है कि इस पूरे हफ्ते खराब ग्लोबल संकेतों के चलते घरेलू इक्विटी मार्केट काफी वोलेटाइल रहा। यूएस फेड और दूसरे केंद्रीय बैंकों द्वारा अपनी मौद्रिक नीतियों में और कड़ाई लाने की संभावना, उभरते बाजारों की मुद्राओं में लगातार आ रही कमजोरी और ग्लोबल इकोनॉमी में मंदी की संभावना कुछ ऐसे कारण हैं जो बाजार पर दबाव बना रहे हैं।
उन्होंने आगे कहा कि पूर्वी यूरोप में जारी जियोपॉलिटिकल तनाव और ओपेक की तरफ से की जा रही उत्पादन कटौती ने भी बाजार के लिए चुनौती खड़ी की है। आगे आने वाले हफ्ते में भी ये फैक्टर बाजार पर दबाव बनाए रखेंगे।
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