Share Market Fall: शेयर बाजार इन 6 कारणों से धड़ाम; सेंसेक्स 1,500 अंक टूटा, निफ्टी 22,200 पर आया
Share Market Crash: भारतीय शेयर बाजारों में गुरुवार 2 अप्रैल को एक बार फिर से गिरावट लौट आई। कारोबार के दौरान सेंसेक्स 1,500 अंकों तक टूट गया। वहीं निफ्टी गिरकर 22,200 के पास चला गया। मिडिल ईस्ट में जारी जंग को लेकर अनिश्चितता, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली ने बाजार पर दबाव बनाया
Share Market Crash: निफ्टी के सभी 16 सेक्टोरल इंडेक्स गिरावट के साथ लाल निशान में कारोबार कर रहे थे
Share Market Crash: भारतीय शेयर बाजारों में गुरुवार 2 अप्रैल को एक बार फिर से गिरावट लौट आई। कारोबार के दौरान सेंसेक्स 1,500 अंकों तक टूट गया। वहीं निफ्टी गिरकर 22,200 के पास चला गया। इसके साथ ही शेयर बाजार में एक दिन पहले दिखी तेजी का असर आज खत्म होता दिखा। मिडिल ईस्ट में जारी जंग को लेकर अनिश्चितता, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली ने बाजार पर दबाव बनाया। निफ्टी के सभी 16 सेक्टोरल इंडेक्स गिरावट के साथ लाल निशान में कारोबार कर रहे थे।
सुबह 10 बजे के करीब, बीएसई सेंसेक्स 1,512.85 अंक यानी 2.07% गिरकर 71,621.47 के स्तर पर कारोबार कर रहा था। वहीं निफ्टी 473.55 अंक यानी 2.09% टूटकर 22,205.85 के आसपास कारोबार करता दिखा।
शेयर बाजार में आज की गिरावट के पीछे 6 बड़े कारण रहे-
1. ईरान पर हमले की चेतावनी से बढ़ी चिंता
शेयर बाजार में गिरावट की सबसे बड़ी वजह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का बयान रहा, जिसमें उन्होंने कहा कि अमेरिका अगले दो से तीन हफ्तों में ईरान पर जोरदार हमला कर सकता है। इस बयान ने ग्लोबल बाजारों में अनिश्चितता बढ़ा दी और निवेशकों का सेंटीमेंट अचानक कमजोर हो गया। एशियाई बाजारों में भी गिरावट देखने को मिली, जिससे भारतीय बाजार पर भी असर पड़ा।
जियोजित इनवेस्टमेंट्स के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट, वीके विजयकुमार ने कहा कि ट्रंप के इस बयान से शेयर बाजार में डर बढ़ा है और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है, जिससे महंगाई और ब्याज दरों पर दबाव बढ़ सकता है।
2. कच्चे तेल की कीमतों में उछाल
डोनाल्ड ट्रंप के बयान के बाद ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 5% बढ़कर 105 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गई। भारत जैसे आयात-निर्भर देश के लिए कच्चे तेल की कीमतों में यह तेजी नेगेटिव संकेत मानी जाती है, क्योंकि इससे महंगाई बढ़ने और चालू खाते के घाटे पर दबाव पड़ता है। तेल की ऊंची कीमतें कॉरपोरेट मुनाफे और आर्थिक ग्रोथ दोनों को प्रभावित कर सकती हैं। इससे बाजार पर दबाव बढ़ा।
3. विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली
विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) की लगातार बिकवाली भी शेयर बाजार की गिरावट का बड़ा कारण बनी। एक दिन पहले बुधवार 1 अप्रैल को विदेशी निवेशकों ने करीब 8,331 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। इससे पहले मार्च महीने में विदेशी निवेशकों ने रिकॉर्ड 1.22 लाख करोड़ रुपये की बिकवाली की थी। विदेशी निवेशकों की इस लगातार बिकवाली ने शेयर बाजार को दबाव में बनाए रखा है। वीके विजयकुमार के अनुसार, कच्चे तेल के ऊंचे, बढ़ता व्यापार घाटा, कमजोर रुपया और FPI की लगातार बिकवाली मिलकर बाजार पर दबाव बना रहे हैं।
4. तकनीकी संकेत भी कमजोर
तकनीकी रूप से भी बाजार कमजोर नजर आ रहा है। जियोजित इनवेस्टमेंट्स के चीफ मार्केट स्ट्रैटेजिस्ट, आनंद जेम्स के मुताबिक, निफ्टी इंडेक्स एक दिन पहले 22,770 के ऊपर टिक नहीं पाया, जो कमजोरी का संकेत है। उन्होंने कहा कि अगर निफ्टी 22,630 के ऊपर लगातार नहीं टिकता, तो बाजार में और गिरावट देखने को मिल सकती है। वहीं नीचे की ओर 21,900 तक का स्तर देखने को मिल सकता है।
5. VIX में उछाल और बैंकिंग शेयरों में गिरावट
शेयर बाजार के निवेशकों में मौजूद घबराहट का संकेत देने वाला इंडेक्स, इंडिया VIX आज करीब 5% बढ़ गया। यह संकेत देता है कि निवेशक निकट भविष्य में बाजार में और उतार-चढ़ाव की आशंका जता रहे हैं।
इसके अलावा बैंकिंग सेक्टर में भी तेज गिरावट देखने को मिली। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के सख्त कदमों के चलते बैंकों पर दबाव बढ़ा है। निफ्टी बैंक इंडेक्स शुरुआती कारोबार में करीब 2.6% तक लुढ़क गया, जबकि प्राइवेट और सरकारी बैंक के शेयरों में भी भारी बिकवाली रही। जेफरीज के एनालिस्ट्स प्रखर शर्मा और विनायक अग्रवाल का मानना है कि RBI के कड़े नियम बैंकों के लिए नेगेटिव साबित हो सकते हैं।
6. फार्मा शेयरों में गिरावट
फार्मा कंपनियों के शेयरों में आज 3.75% की तेज गिरावट देखी। खबरें हैं कि अमेरिका की डोनाल्ड ट्रंप सरकार दवा कंपनियों पर जल्द (संभवतः गुरुवार तक) टैरिफ लगाने की योजना बना रही है। रिपोर्टों के मुताबिक अमेरिका, इंपोर्टेड ब्रांडेड और पेटेंट दवाओं पर 100% तक टैरिफ लगाने पर विचार कर रहा है।
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