Stock Market Crash: रेपो रेट में बढ़ोतरी के साथ-साथ महंगाई के अनुमान में भी बढ़ोतरी ने मार्केट को आज तोड़ दिया। वैसे रेपो रेट में बढ़ोतरी के आसार पहले से ही थे तो ऐलान से पहले ही आज मार्केट में दबाव दिखने लगा था लेकिन रेपो रेट में बढ़ोतरी और इनफ्लेशन आउटलुक पर यह और नीचे आ गया। सेंसेक्स करीब 600 प्वाइंट्स टूट गया तो निफ्टी भी फिसलकर 22550 के नीचे आ गया। हालांकि ब्रोडर लेवल पर आज मिला-जुला रुझान दिखा। निफ्टी मिडकैप 100 में आधे फीसदी से अधिक की गिरावट आई तो निफ्टी स्मॉलकैप 100 में करीब आधे फीसदी की बढ़त रही। ओवरऑल बीएसई पर लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप आज ₹3 लाख करोड़ से अधिक घट गया।
अब घरेलू इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्सेज की बात करें आज 07 अक्टूबर को सेंसेक्स (Sensex) 429.11 प्वाइंट्स यानी 0.59% की गिरावट के साथ 72,638.70 और निफ्टी (Nifty) भी 173.05 प्वाइंट्स यानी 0.76% की फिसलन के साथ 22,603.05 पर बंद हुआ है। इंट्रा-डे में सेंसेक्स 599.09 प्वाइंट्स टूटकर 72,468.72 और निफ्टी भी 229.80 प्वाइंट्स गिरकर 22,546.30 तक आ गया था।
Stock Market Crash: ये है वजह
आरबीआई ने ब्याज दरों में 25 बीपीएस की बढ़ोतरी तो मार्केट फिसल गया। फरवरी 2023 के बाद से पहली बार इसमें बढ़ोतरी हुई है। ब्रोकरेज फर्म जेएम फाइनेंशियल का कहना है कि ब्याज दरें बढ़ने से नॉन-बैंक लेंडर्स के मार्जिन पर दबाव पड़ेगा क्योंकि लोन से होने वाली कमाई की तुलना में फंडिंग की लागत तेजी से बढ़ेगी। इसका असर फिक्स्ड-रेट वाले वेईकल और माइक्रोफाइनेंस लेंडर्स पर अधिक होगा, जबकि फ्लोटिंग-रेट वाले हाउसिंग फाइनेंसर की स्थिति इसकी तुलना में बेहतर होगी।
महंगाई के अनुमान में बढ़ोतरी
आरबीआई ने ग्रोथ के अनुमान को बढ़ाया है तो महंगाई के भी अनुमान को बढ़ा दिया, जिससे मार्केट पर दबाव बढ़ा। महंगाई को लेकर आरबीआई ने कमजोर मॉनसून, अल-नीनो की स्थिति और तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव से पैदा होने वाले सप्लाई-साइड रिस्क की तरफ इशारा किया। आरबीआई ने वित्त वर्ष 2027 के लिए खुदरा महंगाई यानी CPI के अनुमान को 5% से बढ़ाकर 5.2% कर दिया। दूसरी तिमाही के अनुमान को 4.7% से बढ़ाकर 4.9%, तीसरी तिमाही के लिए 5.9% से 6% और चौथी तिमाही के लिए 5.5% से 5.7% कर दिया। वित्त वर्ष 2028 की पहली तिमाही के लिए भी अनुमान 5.3% से बढ़ाकर 5.6% कर दिया गया है।
ऑटो और रियल्टी सेक्टर में तेज दबाव
रेपो रेट में बढ़ोतरी ने ऑटो और रियल्टी सेक्टर पर ऐसा दबाव डाला कि इनके निफ्टी इंडेक्स डेढ़-डेढ़ फीसदी से अधिक फिसल गए। निफ्टी मेटल भी 2% से अधिक कमजोर हुआ है। रेपो रेट में बढ़ोतरी से वेईकल और होम लोन की किश्तें महंगी हो सकती है, जिसका असर इन सेक्टर से जुड़े शेयरों पर भी दिखता है। वहीं बैंकिंग शेयरों ने मार्केट को संभालने की कोशिश की और निफ्टी पीएसयू बैंक 1% मजबूत हुआ।
पश्चिमी एशिया से सप्लाई बढ़ने के बावजूद अमेरिका में तेल उत्पादन पर तूफान के खतरे और सऊदी अरब पर हूथी हमलों की वजह से ब्रेंट क्रूड की कीमत लगभग 1% बढ़कर $101 के पार गई तो इसकी आंच में मार्केट झुलस गया।
विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली
FIIs ने लगातार आठवें कारोबारी दिन मंगलवार 6 अक्टूबर को ₹2,961.30 करोड़ के नेट शेयर बेचे।
जियोजीत इंवेस्टमेंट्स के चीफ मार्केट स्ट्रैटेजिस्ट आनंद जेम्स का कहना है कि एक कारोबारी दिन पहले की रैली अनुमान के मुताबिक ही 22800 के लेवल के पास रुक गई लेकिन इसके आगे बढ़ने की उम्मीद तो है और मार्केट 22930 या 23100-220 के लेवल तक जा सकता है। हालांकि नीचे फिसलने के भी आसार हैं और मार्केट 22690 के ऊपर नहीं टिक पाता है तो उतार-चढ़ाव आ सकता है, लेकिन जब तक गिरावट 22574 तक सीमित रहती है, तब तक तेजी लौटने की उम्मीद रहेगी। आनंद के मुताबिक अभी निफ्टी के 22050 के नीचे बड़ी गिरावट के आसार नहीं हैं।
डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।