भारतीय शेयर बाजार में 29 मई को पहले तेजी और बाद में जबरदस्त गिरावट आई। सेंसेक्स 1000 अंकों से ज्यादा और निफ्टी लगभग 360 अंक टूट गया। इस बीच BSE पर लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप 5.17 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा घट गया। यह लगातार तीसरा कारोबारी सत्र है, जब बाजार लाल निशान में बंद हुआ है। अमेरिका-ईरान डील पर अनिश्चितता, FII की सेलिंग, MSCI रीबैलेंसिंग जैसे फैक्टर्स के चलते बाजार नीचे आया।
शुक्रवार सुबह सेंसेक्स हरे निशान में खुला। जल्द ही पिछली क्लोजिंग से 352 अंक तक उछलकर 76,220.02 के हाई तक गया। इसी तरह निफ्टी भी खुलने के तुरंत बाद ही 95 अंकों से ज्यादा तक चढ़कर 24,002.80 के हाई तक गया। बाजार को भू-राजनीतिक चिंताओं में कमी की उम्मीद, कच्चे तेल में गिरावट, वैश्विक बाजारों की तेजी, रुपये की मजबूती जैसे फैक्टर्स से सहारा मिला।
लेकिन फिर दोपहर से बाजार में गिरावट आनी शुरू हुई। आखिरी कारोबारी घंटे में बिकवाली का बेहद ज्यादा दबाव दिखा। सेंसेक्स पिछली क्लोजिंग से लगभग 1279 अंक तक टूटकर 74,589.11 के लो तक गया। इसी तरह निफ्टी भी 422 अंक तक लुढ़ककर 23,484.75 के लो तक गया। बाद में सेंसेक्स 1092.06 अंकों की गिरावट के साथ 74,775.74 पर और निफ्टी 359.40 अंकों की गिरावट के साथ 23,547.75 पर सेटल हुआ।
गुरुवार, 28 मई को शेयर मार्केट बकरीद के मौके पर बंद थे। बुधवार को बाजार बंद होने पर BSE पर लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप 4,70,15,345.519 करोड़ रुपये रहा था। शुक्रवार को मार्केट बंद होने पर यह 4,64,97,814.78 करोड़ रुपये हो गया। यानि कि 5,17,530.739 करोड़ रुपये की कमी।
इन प्रमुख वजहों से गिरावट
भूराजनीतिक मोर्चे पर ऐसी खबर है कि अमेरिका और ईरान के बीच 60 दिनों के संघर्ष विराम पर समझौता फाइनल होने की कगार पर है। इस पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मोहर लगना बाकी है। लेकिन ईरान के सरकारी मीडिया का कहना है कि अभी कोई डील फाइनल नहीं हुई है। ऐसे में पश्चिम एशिया में छाए तनाव पर अनिश्चितता बरकरार है। अगर समझौता नहीं होता है, महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग होर्मुज स्ट्रेट नहीं खुलता है तो कच्चे तेल की कीमतें और बढ़ने और वैश्विक व्यापार में रुकावटें बढ़ने का डर है। इसके कारण महंगाई लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनी रह सकती है।
बाजार में सेलिंग के पीछे एक कारण प्रॉफिट बुकिंग को भी माना जा रहा है। मार्केट में 2 दिन बाद अच्छी तेजी देख निवेशक ऊंचे स्तरों पर बिकवाली करने लगे। इससे बाजार में दबाव बना। इसके अलावा विदेशी संस्थागत निवेशक (FII) भारतीय बाजार में सेलर बने हुए हैं। शेयर बाजार के आंकड़ों के मुताबिक, उन्होंने 27 मई के पिछले कारोबारी सत्र में 1,042.70 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। एक कारण यह भी है कि भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) की ओर से ऐसा संकेत मिला है कि इस साल जून से सितंबर के बीच भारत में सामान्य से कम बारिश होने का अंदेशा है।
इसके अलावा इंडेक्स प्रोवाइडर MSCI के मई महीने के बदलाव लागू हो गए हैं। IIFL Capital के अनुसार, 2020 और 2024 के बीच MSCI EM इंडेक्स में भारत का वेटेज बढ़ा था। यह जुलाई 2024 में बढ़कर लगभग 20% हो गया था। लेकिन MSCI की हालिया रीबैलेंसिंग के बाद इसके घटकर 11.2% पर आने का अनुमान है। पहले घोषित किए गए बदलावों के अनुसार, Federal Bank, MCX, NALCO और Indian Bank को स्टैंडर्ड इंडेक्स में शामिल किया गया है। वहीं Hyundai Motor India, Jubilant Foodworks, Kalyan Jewellers India और Rail Vikas Nigam (RVNL) जैसे स्टॉक इंडेक्स से बाहर किए गए हैं।
अन्य एशियाई बाजारों की बात करें तो निक्केई 225 और ताइवान वेटेड 2 प्रतिशत से ज्यादा चढ़े हैं। जकार्ता कंपोजिट, सेट कंपोजिट और शंघाई कंपोजिट लाल निशान में आ गए हैं। हेंग सेंग 0.7 प्रतिशत की बढ़त में है। KOSPI 3 प्रतिशत से ज्यादा चढ़ा है। अमेरिकी बाजार गुरुवार को बढ़त में बंद हुए। यूरोपीय बाजारों में भी तेजी है।
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