शेयर बाजार में भगदड़, सेंसेक्स-निफ्टी अपने हाई से 10% टूटे, क्या अब रोक देनी चाहिए SIP?

Stock Market Crash: भारतीय शेयर बाजारों में पिछले एक हफ्ते से हाहाकार मचा हुआ है। सेंसेक्स और निफ्टी अपने रिकॉर्ड हाई से करीह 10 प्रतिशत तक टूट चुके हैं। इस तेज गिरावट के चलते सेंसेक्स और निफ्टी आज 9 मार्च को तकनीकी करेक्शन के दायरे में पहुंच गए। यह गिरावट ऐसे समय आई है जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल और मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है

अपडेटेड Mar 09, 2026 पर 2:41 PM
Story continues below Advertisement
Stock Markets: एनालिस्ट्स का मानना है कि निवेशकों को फिलहाल नए निवेश में सावधानी बरतनी चाहिए

Stock Market Crash: भारतीय शेयर बाजारों में पिछले एक हफ्ते से हाहाकार मचा हुआ है। सेंसेक्स और निफ्टी अपने रिकॉर्ड हाई से करीह 10 प्रतिशत तक टूट चुके हैं। इस तेज गिरावट के चलते सेंसेक्स और निफ्टी आज 9 मार्च को तकनीकी करेक्शन के दायरे में पहुंच गए। यह गिरावट ऐसे समय आई है जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल और मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है।

निफ्टी 5 जनवरी को बनाए अपने रिकॉर्ड उच्च स्तर 26,373 से करीब 10 प्रतिशत नीचे आ गया है। इस गिरावट के पीछे तेल की कीमतों में तेज उछाल को प्रमुख कारण माना जा रहा है। ईरान में राजनीतिक घटनाक्रम और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बाद ब्रेंट क्रूड की कीमतें 2022 के बाद के अपने सबसे ऊंचे स्तर के करीब पहुंच गई हैं।

शेयर बाजार भी आज 9 मार्च को क्रैश हो गए। कारोबार के दौरान सेंसेक्स करीब 2300 अंक या 3 फीसदी टूटकर 77,000 के नीचे चला गया। वहीं निफ्टी भी लगभग 700 अंकों का गोता लगाकर 23,800 के नीचे पहुंच गया। यह सेंसेक्स और निफ्टी का पिछले 11 महीनों का सबसे निचला स्तर है।


क्रूड में तेज उछाल

अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोमवार को क्रूड ऑयल के दाम में तेज उछाल देखने को मिली। कारोबार के दौरान यह 26.4 प्रतिशत तक उछलकर 117 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया और सुबह 9:15 बजे के आसपास करीब 114 डॉलर के स्तर पर कारोबार कर रहा था। तेल की कीमतों में यह उछाल शेयर बाजार के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।

क्या बाजार ओवरसोल्ड हो गया है?

मार्केट एनालिस्ट्स का मानना है कि मौजूदा स्तरों पर बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकती है। कुछ एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर निफ्टी 23,535 के स्तर से नीचे जाता है तो गिरावट और तेज हो सकती है।

जियोजित इनवेस्टमेंट्स के चीफ मार्केट स्ट्रैटजिस्ट्स आनंद जेम्स के मुताबिक, “अगर 23,535 का स्तर मार्च 2025 से शुरू हुई तेजी का लगभग 61.8 प्रतिशत रिट्रेसमेंट पूरा करेगा। अगर यह स्तर टूटता है तो निफ्टी पहले 22,000 और उसके बाद नवंबर 2023 के निचले स्तर 19,000 तक भी जा सकता है। वहीं ऊपर की ओर 24,000 के ऊपर टिकना बाजार के लिए पॉजिटिव संकेत होगा।”

दूसरी ओर कुछ एनालिस्ट्स का मानना है कि निवेशकों को फिलहाल नए निवेश में सावधानी बरतनी चाहिए। चॉइस ब्रोकिंग के रिसर्च एनालिस्ट हितेश टेलर के मुताबिक, “मौजूदा ग्लोबल अनिश्चितताओं और बाजार की ऊंची अस्थिरता को देखते हुए निवेशकों को केवल मजबूत फंडामेंटल वाली कंपनियों पर ध्यान देना चाहिए। निफ्टी के 25,000 के ऊपर टिकने के बाद ही नए बड़े निवेश करना अधिक सुरक्षित होगा।”

SIP निवेशकों को क्या करना चाहिए?

जो निवेशक SIP को लेकर असमंजस में हैं, उनके लिए एक्सपर्ट्स की सलाह है कि लंबी अवधि के निवेशकों को धैर्य बनाए रखना चाहिए। जियोजित इनवेस्टमेंट्स के चीफ इनवेस्टमेंट स्ट्रैटजिस्ट्स वीके विजयकुमार के मुताबिक, “ब्रेंट क्रूड का भाव 115 डॉलर से ऊपर पहुंच गया है, जिससे बाजार और अर्थव्यवस्था को बड़ा झटका लगा है। अगर पश्चिम एशिया का संघर्ष लंबा चलता है तो भारत जैसे बड़े तेल खरीदार देशों पर इसका असर पड़ेगा और महंगाई बढ़ सकती है।”

हालांकि उनका कहना है कि इतिहास बताता है कि भू-राजनीतिक घटनाओं का बाजार पर असर आमतौर पर लंबे समय तक नहीं रहता। इसलिए लंबी अवधि के निवेशकों को धैर्य रखना चाहिए और मजबूत सेक्टरों में धीरे-धीरे निवेश कर सकते हैं।

किन सेक्टरों पर असर ज्यादा

एक्सपर्ट्स का मानना है कि भारत की इकोनॉमी क्रूड को लेकर काफी संवेदनशील है। भारत अपनी जरूरत का 85 प्रतिशत क्रूड ऑयल विदेशों से इंपोर्ट करता है। इसका बड़ा हिस्सा होर्मुज स्ट्रेट से आता है, जहां अभी पश्चिम-एशिया में लड़ाई के चलते रुकावटें आ रही हैं।

तेल की कीमतों में लगातार उछाल से कई इंडस्ट्री के कॉस्ट स्ट्रक्चर पर सीधा असर पड़ सकता है। खासतौर से ऑयल मार्केटिंग कंपनियां, पेंट, टायर और केमिकल सेक्टर के लिए यह चुनौती बन सकती है क्योंकि इनकी कच्चे माल की लागत सीधे तेल से जुड़ी होती है।

एविएशन कंपनियों के लिए स्थिति और कठिन हो सकती है क्योंकि उन्हें एविएशन टरबाइन फ्यूल की बढ़ती लागत के साथ-साथ हवाई मार्ग बदलने और उड़ान का समय बढ़ने का भी सामना करना पड़ सकता है।

इसके अलावा अगर तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची रहती हैं तो इससे कंपनियों की मार्च तिमाही के नतीजों पर भी असर पड़ सकता है। साथ ही इससे भारत का इंपोर्ट बिल बढ़ेगा, विदेशी करेंसी का आउटफ्लो तेज होगा और रुपये पर भी दबाव बढ़ सकता है।

निवेशकों के लिए संकेत

एनालिस्ट्स का कहना है कि फिलहाल बाजार में अस्थिरता बनी रह सकती है। हालांकि घरेलू कंज्म्पशन से जुड़े सेक्टर जैसे बैंकिंग, फाइनेंशियल सर्विसेज, ऑटो, टेलीकॉम और सीमेंट बाकी की तुलना में स्थिर रह सकते हैं। इसके अलावा डिफेंस और फार्मा सेक्टर भी इस माहौल में तुलनात्मक रूप से मजबूत रह सकते हैं।

यह भी पढ़ें- Share Market Crash: शेयर बाजार में इन 7 कारणों से तबाही, सेंसेक्स 2300 अंक टूटा, निफ्टी 23,800 के नीचे

डिस्क्लेमरः Moneycontrol पर एक्सपर्ट्स/ब्रोकरेज फर्म्स की ओर से दिए जाने वाले विचार और निवेश सलाह उनके अपने होते हैं, न कि वेबसाइट और उसके मैनेजमेंट के। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। Moneycontrol यूजर्स को सलाह देता है कि वह कोई भी निवेश निर्णय लेने के पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह लें।

हिंदी में शेयर बाजार स्टॉक मार्केट न्यूज़,  बिजनेस न्यूज़,  पर्सनल फाइनेंस और अन्य देश से जुड़ी खबरें सबसे पहले मनीकंट्रोल हिंदी पर पढ़ें. डेली मार्केट अपडेट के लिए Moneycontrol App  डाउनलोड करें।