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बाजार में गिरावट के दौर में निवेश करना चाहते हैं? एवरेजिंग का फंडा हो सकता है कारगर

शेयर बाजार में हाल में जोरदार गिरावट देखने को मिली है। चूंकि बाजार में करेक्शन के साथ-साथ तेजी का भी ट्रेंड नजर आता है, लिहाजा 'गिरावट पर निवेश' की रणनीति रिटेल इनवेस्टर्स के बीच काफी लोकप्रिय हो गई है। कई रिटेल इनवेस्टर्स उन कंपनियों के ज्यादा शेयर खरीदने के लिए मार्केट करेक्शन का इस्तेमाल करते हैं, जो पहले से उनके पास मौजूद रहता है। इस रणनीति को एवरेजिंग कहते हैं

MoneyControl Newsअपडेटेड Aug 06, 2024 पर 7:51 PM
बाजार में गिरावट के दौर में निवेश करना चाहते हैं? एवरेजिंग का फंडा हो सकता है कारगर
सबसे अहम बात निवेशकों के लिए सावधानीपूर्वक सही शेयरों का चुनाव करना है।

शेयर बाजार में हाल में जोरदार गिरावट देखने को मिली है। चूंकि बाजार में करेक्शन के साथ-साथ तेजी का भी ट्रेंड नजर आता है, लिहाजा 'गिरावट पर निवेश' की रणनीति रिटेल इनवेस्टर्स के बीच काफी लोकप्रिय हो गई है। कई रिटेल इनवेस्टर्स उन कंपनियों के ज्यादा शेयर खरीदने के लिए मार्केट करेक्शन का इस्तेमाल करते हैं, जो पहले से उनके पास मौजूद रहता है। इस रणनीति को एवरेजिंग कहते हैं। हम आपको यहां एवरेजिंग के बारे में विस्तार से बता रहे हैं।

स्टॉक मार्केट में एवरेजिंग क्या होता है?

आसान शब्दों में कहें, तो एवरेजिंग का मतलब अलग-अलग समय में अलग-अलग कीमतों पर शेयरों की खरीद है, ताकि शेयरों की औसत कॉस्ट कम करने में मदद मिले।

एवरेजिंग के पीछे मुख्य वजह क्या है?

एवरेजिंग का सिद्धांत इस आधार पर काम करता है कि बाजार के मूवमेंट के बारे में कोई भविष्यवाणी नहीं कर सकता है। यहां तक कि सबसे ज्यादा कौशल वाले निवेशकों को भी इस बात का अहसास रहता है कि सबसे निचले स्तर पर शेयरों को खरीदना और उन्हें सबसे ऊंचे स्तर पर बेचना तकरीबन नामुमिकन है। नतीजतन, एक ही बार में निवेश करने के बजाय अलग-अलग निवेश करना बेहतर रहता है।

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