इनवेस्टमेंट की इस स्ट्रेटेजी से मार्केट में गिरावट के बावजूद आपको नहीं होगा लॉस

पिछले साल अक्टूबर में स्टॉक मार्केट में गिरावट शुरू हुई थी। तब से यह गिरावट जारी है। लार्जकैप के मुकाबले मिडकैप और स्मॉलकैप स्टॉक्स में ज्यादा गिरावट आई है। इससे निवेशकों को बड़ा नुकसान उठाना पड़ा है। उन्हें यह नहीं पता चल रहा कि यह गिरावट कब तक गिरावट जारी रहेगी

अपडेटेड Feb 11, 2025 पर 10:48 AM
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7 फरवरी, 2025 तक निफ्टी 26,216 की अपनी रिकॉर्ड ऊंचाई से करीब 10 फीसदी गिर चुका है। निफ्टी नेक्स्ट 50 में तो 18 फीसदी गिरावट आई है।

फाइनेंशियल मार्केट्स में बीते कुछ महीनों में काफी ज्यादा उतारचढ़ाव देखने को मिला है। 7 फरवरी, 2025 तक निफ्टी 26,216 की अपनी रिकॉर्ड ऊंचाई से करीब 10 फीसदी गिर चुका है। निफ्टी नेक्स्ट 50 में तो 18 फीसदी गिरावट आई है। मिडकैप 150 इंडेक्स अपने ऑल-टाइम हाई से करीब 12 फीसदी गिरा है। मार्केट साइकिल में करेक्शन स्वाभाविक है। लेकिन, गिरावट यह दौरान काफी मुश्किल रहा है। इसकी कई वजहें हैं। कंपनियों की अर्निंग्स ग्रोथ में सुस्ती दिखी है। वैल्यूएशन ज्यादा है। अमेरिका में इंटरेस्ट रेट में कमी की उम्मीद घटने की वजह से बॉन्ड यील्ड बढ़ी है। जियोपॉलिटिकल टेंशन बना हुआ है।

मार्केट में क्यों आ रही है गिरावट?

मार्केट में अनिश्चितता के इस माहौल का सामना करने के लिए स्थितियों को ठीक तरह से समझना जरूरी है। कई कंपनियों के चौथी तिमाही के नतीजे उम्मीद से कमजोर रहे हैं। शॉर्ट टर्म में रिकवरी को लेकर चिंता दिख रही है। इससे FY25 की अर्निंग्स ग्रोथ के अनुमान को घटाकर 5 फीसदी से नीचे किया जा रहा है। चीन में पैकेज के ऐलान के बाद से विदेशी संस्थागत निवेशक (FIIs) चीन के लिए ऐलोकेशन कर रहे हैं। खासकर अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव के बाद से यह ट्रेंड बढ़ा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की पॉलिसी अमेरिकी इकोनॉमी को सपोर्ट करने वाली है। इसके लिए उन्होंने टैरिफ बढ़ाने का ऐलान किया है। इसका भी असर मार्केट्स पर पड़ा है।


मार्केट हर झटके से बाहर आया है

बीते दी महीनों में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया करीब 4 फीसदी गिरा है। यूएस डॉलर इंडेक्स 3 फीसदी चढ़ा है। इकोनॉमिक ग्रोथ बढ़ाने और व्यापार घाटा कम करने की ट्रंप की पॉलिसी से डॉलर में मजबूती जारी रहने की संभावना है। इसका मतलब है कि रुपये पर दबाव बढ़ेगा। बेंजामिन ग्राहक ने एक बार कहा था, "शॉर्ट टर्म में मार्केट एक वोटिंग मशीन है, लेकिन लॉन्ग टर्म में यह वेइंग मशीन (वजन मापने वाली मशीन) है।" मार्केट में करेक्शन के दौरान निगेटिव चीजें फोकस में रहती हैं, जबकि मार्केट में तेजी में पॉजिटिव चीजें फोकस में रहती हैं। हालांकि, इतिहास बताता है कि मार्केट्स झटकों से उबर जाता है।

मिडकैप और स्मॉलकैप में जल्द रिकवरी

इतिहास को देखने से पता चलता है कि करेक्शन के दौरान मिडकैप और स्मॉलकैप स्टॉक्स पर ज्यादा असर पड़ता है। इस गिरावट में भी ऐसा देखने को मिला है। लार्जकैप सूचकांक के मुकाबले निफ्टी नेक्स्ट 50 स्टॉक्स में तेज गिरावट आई है। रिकवरी शुरू होने पर मिडकैप और स्मॉलकैप स्टॉक्स जल्द लॉस से उबरते हैं। उदाहरण के लिए 2020 के मार्केट क्रैश के बाद से निफ्टी कोविड से पहले के अपने पीक से दोगुना हो गया, जबकि मिडकैप इंडेक्स तिगुना हो गया।

यह गिरावट निवेश का बड़ा मौका

कई चीजें उम्मीद बढ़ाने वाली हैं। हर महीने से SIP से 26,000 करोड़ से ज्यादा निवेश हो रहा है। यह इंडिया में फाइनेंशियल सेविंग्स में आ रहे बदलाव का संकेत है। इस घरेलू निवेश ने उतारचढ़ाव के दौरान मार्केट को बड़ा सहारा दिया है। लॉन्ग टर्म में इंडिया की ग्रोथ स्टोरी जारी रहने वाली है। इसकी कई वजहें हैं। आबादी में युवाओं की हिस्सेदारी ज्यादा है। डिजिटल ट्रांजेक्शन में लोगों की दिलचस्पी बढ़ रही है। इसलिए मार्केट में यह गिरावट लंबी अवधि के निवेशकों के लिए निवेश का बड़ा मौका है।

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आपको इन बातों का रखना है ध्यान

मार्केट में निचले स्तर पर एकमुश्त निवेश करने की बजाय आपको अगले 4-6 महीनों के दौरान धीरे-धीरे निवेश करना चाहिए। इससे निवेश की औसत कॉस्ट कम रहेगी। करेक्शन निवेशकों को एसेट ऐलोकेशन को रिव्यू करने का मौका देता है। स्टैबिलिटी के लिए आप लार्जकैप में निवेश बढ़ा सकते हैं। आपको स्ट्रॉन्ग बैलेंसशीट और कैश फ्लो वाली कंपनियों के शेयरों में निवेश करना चाहिए। आपको मार्केट में अनुशासन बनाए रखना होगा।

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