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Stock Market: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच अब किस करवट बैठेगा शेयर बाजार? क्या जारी रैली को लगेगा ग्रहण? एक्सपर्ट्स की राय

Stock Market: एक्सपर्ट्स का कहना है कि डोमेस्टिक लिक्विडिटी ही है जो बाजारों को चला रही है। उनका कहना है कि अगर जापान के नए प्रधानमंत्री ब्याज दरों में वृद्धि करते हैं तो फॉरेन फ्लो भी प्रभावित हो सकता है। उन्होंने कहा कि स्थिति चिंताजनक हो गई है, ऐसे में निवेशकों को सावधानी बरतनी चाहिए

MoneyControl Newsअपडेटेड Oct 02, 2024 पर 3:26 PM
Stock Market: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच अब किस करवट बैठेगा शेयर बाजार? क्या जारी रैली को लगेगा ग्रहण? एक्सपर्ट्स की राय
BSE सेंसेक्स की बात करें तो यह एक अक्टूबर को 84,266.29 अंक पर बंद हुआ है।

Stock Market: भारतीय शेयर बाजार में लगातार मजबूत रैली देखने को मिली है। BSE सेंसेक्स की बात करें तो यह एक अक्टूबर को 84,266.29 अंक पर बंद हुआ है। दूसरी ओर, निफ्टी 50 की बात करें तो यह 25796.90 के लेवल पर पहुंच गया है। अब सवाल यह है कि मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच क्या भारतीय शेयर बाजार की यह रैली आगे भी जारी रहेगी? एक्सपर्ट्स का कहना है कि निवेशकों के लिए सतर्क रहने और बहुत रिस्क न लेने का समय आ गया है। एक्सपर्ट्स ने कहा कि कई ऐसे फैक्टर्स हैं जिससे शेयर बाजार में जारी रैली कौ ग्रहण लग सकता है। इन रिस्क फैक्टर्स में ईरान-इजराइल युद्ध, कच्चे तेल की कीमतें, चीन का प्रोत्साहन पैकेज और जापान में ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावना शामिल हैं।

डोमेस्टिक लिक्विडिटी है हालिया रैली की वजह: एक्सपर्ट्स

एक्सपर्ट्स इस बात पर एकमत हैं कि भारतीय बाजारों में हाल ही में जो तेजी आई है, वह मुख्य रूप से डोमेस्टिक लिक्विडिटी के कारण है, जबकि फंडामेंटल बातें बहुत पीछे रह गई हैं, जिसने बहुत ही नाजुक हालात बनाया है। उनका कहना है कि मिडिल ईस्ट में जियो-पॉलिटिकल टेंशन के बढ़ने से कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ने वाले प्रभाव और चीन पर नए सिरे से फोकस करने से भारतीय बाजारों के लिए खेल खराब हो सकता है।

बाजार के दिग्गज शंकर शर्मा कहते हैं, "भारतीय बाजारों ने अपनी उम्मीद से कहीं अधिक तेजी दिखाई है और अब इसमें ठंडक का दौर आएगा। यह पिछले एक साल में सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाले बाजारों में से एक था, लेकिन ऐसा इसलिए भी हुआ क्योंकि यह दौड़ में अकेला था।" उन्होंने आगे कहा, “अब चीन भी मैदान में उतर चुका है और यह दो घोड़ों वाली दौड़ है। चीन इस वजह के कारण भी आगे निकल सकता है कि उसके पास लंबे समय तक मंदी का बाजार रहा है। हालांकि भारतीय बाजार स्ट्रक्चरली मजबूत हैं, लेकिन यह बहुत अग्रेसिव होने का समय नहीं है।”

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