Stock Market : मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के चलते इक्विटी बाजार में लगातार चल रही बिकवाली के कारण इंडिया VIX पिछले दो सेशन में 50 फीसदी से ज़्यादा बढ़ा है। वोलैटिलिटी इंडेक्स इंडिया VIX कल लगातार दूसरे सेशन में तेज़ी से बढ़ा और 23.41 फीसदी बढ़कर 21.14 पर पहुंच गया। ये 9 मई, 2025 के बाद का इसका सबसे ऊचा क्लोजिंग लेवल है। इसके पहले सोमवार को भी इस इंडेक्स में 25 फीसदी से ज़्यादा की बढ़त देखने को मिली थी।
वोलैटिलिटी इंडेक्स में तेज़ बढ़ोतरी मार्केट में बढ़ते डर का संकेत
मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि वोलैटिलिटी इंडेक्स में तेज़ बढ़ोतरी मार्केट में बढ़ते डर का संकेत है। VIX को आम तौर पर मार्केट सेंटिमेंट का एक पैमाना माना जाता है,जिसे अक्सर डर और लालच का इंडिकेटर भी बताया जाता है। VIX का बढ़ना आमतौर पर इक्विटी में मंदी का संकेत देता है क्योंकि वोलैटिलिटी और मार्केट में आम तौर पर एक मज़बूत नेगेटिव को-रिलेशन होता है।
द वेल्थ कंपनी में मैनेजिंग पार्टनर और मार्केट्स स्ट्रैटेजी के हेड अक्षय चिंचालकर का कहना है कि वोलैटिलिटी में यह उछाल कोई हैरानी की बात नहीं है क्योंकि इन्वेस्टर्स के बीच डाउनसाइड प्रोटेक्शन की डिमांड बढ़ी है। उन्होंने बताया कि पहले जब VIX दो दिन के समय में कम से कम 50 फीसदी बढ़ा है तो हर बार 20 दिन बाद यह कम हुआ है। हालांकि,पिछले दस साल में सिर्फ़ तीन बार ऐसा हुआ है।
निवेशकों को सावधान रहने की ज़रूरत
एक्सपर्ट्स का यह भी कहना है कि निफ्टी के लिए 24,200–24,250 की रेंज में मज़बूत सपोर्ट है और जब तक यह ज़ोन बना रहेगा, इक्विटी मार्केट में उछाल आने की संभावना कायम रहेगी। इससे इंडिया VIX में नरमी आ सकती है। हालांकि,उन्होंने यह चेतावनी भी दी है कि मौजूदा जियोपॉलिटिकल संकट तेज़ी से बढ़ रहा है,जिससे निवेशकों को सावधान रहने की ज़रूरत है।
सेंसेक्स-निफ्टी में गिरावट जारी
कल भी दोनों बेंचमार्क इंडेक्स में लगातार चौथे सेशन में गिरावट जारी रही। सेंसेक्स अप्रैल 2025 के बाद पहली बार 80000 के लेवल से नीचे बंद हुआ,जबकि निफ्टी अगस्त 2025 के बाद पहली बार 24500 के लेवल से नीचे बंद हुआ।
2026 की शुरुआत से ही भारतीय इक्विटी बाजारों पर बिकवाली का दबाव
2026 की शुरुआत से ही भारतीय इक्विटी बाजारों पर लगातार बिकवाली का दबाव बना रहा है। कंपनियों की अर्निंग्स में बढ़ोतरी की उम्मीदें कम हैं और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े स्टॉक्स में भारत की कम हिस्सेदारी है। इससे हमारे बाजारों में गिरावट देखने को मिली है। वहीं, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े स्टॉक्स में ज्यादा एक्सपोजर के चलते कई ग्लोबल मार्केट्स में बढ़त देखने को मिली है।
कच्चे तेल की कीमतों में आए हालिया उछाल ने भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील में हुई प्रोग्रेस के बाद से इक्विटी में हो रही शुरुआती रिकवरी को भी धीमा कर दिया है।
मोतीलाल ओसवाल वेल्थ मैनेजमेंट में टेक्निकल और डेरिवेटिव्स रिसर्च के हेड चंदन तपारिया का कहना है कि मार्केट में दोनों तरफ तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकते हैं क्योंकि ज़्यादा वोलैटिलिटी ऑप्शन प्रीमियम को बढ़ा देती है।
उन्होंने आगे कहा कि एक तरफ तो ज़्यादा प्रीमियम टाइम डीके स्ट्रैटेजी के मौके दे सकते हैं, वहीं मार्केट में तेज उतार-चढ़ाव ऐसी स्ट्रैटेजी से फायदा उठाना मुश्किल भी बना सकते हैं। ऐसे में इन्वेस्टरों के लिए स्ट्रक्चर्ड ऑप्शन स्ट्रैटेजी पर फोकस करना सही रणनीति हो सकती है, या फिर वे मार्केट सेंटिमेंट में सुधार के लिए VIX के 14–15 रेंज तक ठंडा होने का इंतजार कर सकते हैं।
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