Market Outlook: इस हफ्ते बाजार में तेजी या गिरावट; फेड के फैसले, पश्चिम एशिया के हालात, कच्चे तेल समेत इन फैक्टर्स से होगा तय

Market Outlook: घरेलू मोर्चे पर मार्केट पार्टिसिपेंट्स की नजर अगस्त की थोक महंगाई और खुदरा महंगाई के आंकड़ों पर रहेगी। इसके अलावा बेरोजगारी और व्यापार के आंकड़े भी चर्चा में रहेंगे। पिछले हफ्ते बाजार पर काफी दबाव रहा

अपडेटेड Sep 13, 2026 पर 4:07 PM
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बीते सप्ताह निफ्टी-50 ने लगातार 5वें हफ्ते लाल निशान में क्लोजिंग की।

15 सितंबर से शुरू हो रहे नए कारोबारी सप्ताह में शेयर बाजार की दिशा अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व के ब्याज दर पर फैसले, भारत की महंगाई के आंकड़ों, कच्चे तेल की कीमत और पश्चिम एशिया के घटनाक्रमों से तय होगी। सोमवार, 14 सितंबर को गणेश चतुर्थी के अवसर पर शेयर बाजार बंद रहेंगे। बीते सप्ताह सेंसेक्स 1,733.67 अंक या 2.26 प्रतिशत टूटा। निफ्टी में 499.6 अंक या 2 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।

न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, रेलिगेयर ब्रोकिंग के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट (रिसर्च) अजीत मिश्रा का कहना है कि वैश्विक स्तर पर अमेरिका-ईरान संघर्ष से जुड़े घटनाक्रम और ब्रेंट कच्चे तेल की चाल बाजार की दिशा तय करने में प्रमुख कारक बने रहेंगे। साथ ही इस सप्ताह मौद्रिक नीति पर अमेरिकी फेडरल रिजर्व के फैसले और ब्याज दरों के भविष्य के रुख पर उसकी टिप्पणी पर भी नजर रहेगी।

फेडरल ओपन मार्केट कमेटी की मीटिंग 15-16 सितंबर को होने वाली है। घरेलू मोर्चे पर मार्केट पार्टिसिपेंट्स की नजर अगस्त की थोक महंगाई और खुदरा महंगाई के आंकड़ों पर रहेगी। इसके अलावा बेरोजगारी और व्यापार के आंकड़े भी चर्चा में रहेंगे।


बरकरार हैं महंगाई से जुड़े जोखिम

रिसर्च एनालिस्ट फर्म HST Wealth के फाउंडर और CEO हरिसेल्वन राधाकृष्णन का कहना है कि अमेरिका में हेडलाइन खुदरा महंगाई में मासिक आधार पर 0.4 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। सालाना आधार पर यह 3.4 प्रतिशत पर बनी रही, जबकि कोर महंगाई पिछले महीने के मुकाबले 0.3 प्रतिशत बढ़ी, लेकिन साल-दर-साल आधार पर घटकर 2.4 प्रतिशत हो गई। अमेरिकी महंगाई के आंकड़ों में यह मासिक बढ़ोतरी महंगाई से जुड़े जोखिमों को चर्चा में बनाए रखे हुए है। यह ग्लोबल बॉन्ड यील्ड और डॉलर पर दबाव बढ़ा सकती है, खासकर अगर फेडरल रिजर्व ने ज्यादा सख्त रुख अपनाया तो।

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भारत के लिए कच्चा तेल सबसे बड़ा बाहरी जोखिम

राधाकृष्णन ने आगे कहा कि भारत के लिए कच्चा तेल सबसे बड़ा बाहरी जोखिम बना हुआ है। यदि पश्चिम एशिया से कच्चे तेल की आपूर्ति में व्यवधान बढ़ता है और कीमतों में तेजी आती है, तो महंगाई का दबाव बढ़ सकता है, देश का आयात बिल बढ़ सकता है, रुपये पर दबाव आ सकता है और कंपनियों का मार्जिन घट सकता है।

पिछले हफ्ते बाजार पर काफी दबाव रहा। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया और महंगाई, वैश्विक ब्याज दरों और आर्थिक विकास को लेकर चिंता बढ़ गई। निफ्टी-50 ने लगातार 5वें हफ्ते लाल निशान में क्लोजिंग की।

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