Share Market: शेयर बाजार में लौटी तेजी, तो एक महीने में ₹21 लाख करोड़ बढ़ गई निवेशकों की संपत्ति

Sensex और Nifty में पिछले एक महीने में 6% से अधिक की तेजी आई है, मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्सों में इस दौरान 11 फीसदी से अधिक की उछाल दर्ज की गई है

अपडेटेड Jul 19, 2022 पर 7:20 PM
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BSE में लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप बढ़कर 256 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया है

अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर होने के बावजूद, शेयर बाजार में पिछले महीने में अच्छी रिकवरी देखी है। खासतौर से जून में 52 सप्ताह के सबसे निचले स्तर पर पहुंचने के बाद बाजार तेजी से ऊपर उठा है, जिससे पिछले एक महीने में निवेशकों को करीब 21 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति बनाने में मदद मिली है।

ग्लोबल बाजारों में रिकवरी, तेल की कीमतों में स्थिरता और नरमी आने (जो तेल आयात करने वाले देश के रूप में भारत के लिए सबसे बड़ी चिंता है) के साथ-साथ अन्य कमोडिटी की कीमतें घटने और विदेशी निवेशकों (FII) की तरफ से बिकवाली धीमी होने (पिछले कुछ दिनों में वे शुद्ध बायर्स रहे हैं) से बाजार का माहौल मजबूत हुआ है।

ऑटो, FMCG, कैपिटल गुड्स, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, इंडस्ट्रियल्स, ऑयल एंड गैस, रियल्टी और पावर सेक्टर की कंपनियों में खरीदारी बढ़ने से भी सेंटीमेंट को मजबूती मिली। इन सेक्टर्स में पिछले महीने 10 से 17 फीसदी की तेजी देखी गई और इसके बाद बैंकिंग सेक्टर भी करीब 9 प्रतिशत की उछाल दर्ज की गई।


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बेंचमार्क सूचकांकों ने बीते 17 जून 2022 को अपने 52-सप्ताह के निचले स्तर को तोड़ा था। इसके बाद से इनमें धीरे-धीरे रिकवरी देखी जा रही है। इससे संकेत मिलता है कि बाजार ने शायद अब अपने निचले स्तर को छू लिया है और यहां से वह ऊपर जाने की तैयारी कर रही है। कुछ विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि बाजार अब महंगाई को लेकर बेफिक्र नजर आ रहा है।

BSE सेंसेक्स और निफ्टी-50 (Nifty50) में पिछले एक महीने में 6 फीसदी से अधिक की तेजी आई। जबकि BSE के मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स में क्रमश: 11 फीसदी और 12 फीसदी से अधिक की तेजी दर्ज की गई।

BSE में लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैपिटलाइजेशन बढ़कर 256 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया है, जो एक महीने पहले 17 जून को 234.86 लाख करोड़ रुपये था। इस तरह कई महीनों की लगातार गिरावट के बाद पिछले एक महीने में निवेशकों की संपत्ति में बढ़ोतरी दर्ज की गई और यह करीब 21 लाख करोड़ रुपये बढ़ा।

जियोजित फाइनेंशियल सर्विसेज के चीफ इनवेस्टमेंट स्ट्रैटजिस्ट, वी के विजयकुमार ने बताया, "FPI की बिकवाली से पिछले साल 21 अक्टूबर से बाजार पर दबाव बना हुआ था। हालांकि अब उनकी बिकवाली का थोड़ा बदलता दिख रहा है। FPI इस महीने भी शुद्ध सेलर्स बने हुए हैं। हालांकि इस दौरान वह तीन दिन शुद्ध बायर्स भी थे। इसका मतलब है कि कुछ FPI कुछ सेगमेंट में वैल्यू देख रहे हैं।"

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