Market This Week: इस हफ्ते पश्चिम एशिया के हालात, Q4 नतीजों, कच्चे तेल की चाल समेत इन अहम फैक्टर्स से तय होगा बाजार का मूड
Market This Week: पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष पर स्थिति सबसे अहम फैक्टर है। अगर तेल की कीमतों में स्थिरता या गिरावट आती है तो इससे आर्थिक चिंताओं में कमी आ सकती है। नए सप्ताह में 208 कंपनियां जनवरी-मार्च 2026 तिमाही के नतीजे जारी करने वाली हैं
विदेशी निवेशकों की गतिविधि पर भी बाजार की नजर रहेगी।
24 अप्रैल को खत्म हुए पिछले कारोबारी सप्ताह में सेंसेक्स ने कुल 1,829.33 अंक या 2.33 प्रतिशत की गिरावट देखी। वहीं निफ्टी 455.6 अंक या 1.87 प्रतिशत नीचे आया। शुक्रवार को लगातार तीसरे दिन गिरावट झेलते हुए बाजार लाल निशान में बंद हुआ था। सेंसेक्स लगभग 1000 अंकों की गिरावट के साथ 76,664.21 पर और निफ्टी 275.10 अंकों की गिरावट के साथ 23,897.95 पर बंद हुआ।
अमेरिका-ईरान के बीच सीजफायर को लेकर बातचीत पर अनिश्चितता, कच्चा तेल फिर 100 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल जाने, महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग होर्मुज स्ट्रेट के आसपास तनाव बढ़ने, विदेशी निवेशकों की ओर से भारतीय शेयरों में लगातार बिकवाली, रुपये में जारी गिरावट और वैश्विक बाजारों की कमजोरी का असर भारतीय बाजारों में देखने को मिला। अब 27 अप्रैल से शुरू सप्ताह में बाजार की चाल किन फैक्टर्स के आधार पर तय होगी, आइए जानते हैं...
पश्चिम एशिया की भू-राजनीतिक स्थिति
पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष पर स्थिति सबसे अहम फैक्टर है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची शनिवार को पाकिस्तान के शीर्ष नेताओं के साथ चर्चा करने और अमेरिका के साथ युद्ध को स्थायी रूप से समाप्त करने के लिए ईरान की मांगों की लिस्ट साझा करने के बाद इस्लामाबाद से रवाना हो गए। इससे ईरान और अमेरिका के बीच शांति वार्ता के दूसरे दौर के भविष्य को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई है। पहले खबर आई थी कि अमेरिकी विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर शनिवार को पाकिस्तान जा रहे हैं। हालांकि ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा था कि ईरान और अमेरिका के बीच किसी मीटिंग की योजना नहीं है। ईरान का पक्ष पाकिस्तानी अधिकारियों तक पहुंचाया जाएगा।
अराघची के पाकिस्तान से रवाना होते ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की कि स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर अब ईरान के साथ बातचीत के लिए इस्लामाबाद नहीं जाएंगे। ट्रंप ने ‘ट्रुथ सोशल’ पर पोस्ट डाली, ‘‘मैंने ईरानियों से मिलने के लिए इस्लामाबाद जाने वाले अपने प्रतिनिधियों की यात्रा रद्द कर दी है।’’ ट्रंप का कहना है कि हमारे पास सारे विकल्प हैं, ईरान के पास एक भी नहीं। अगर ईरान बात करना चाहता है तो उसे बस फोन करना है। अमेरिका और ईरान के बीच 11 और 12 अप्रैल को हुई पहले दौर की बातचीत बेनतीजा रही थी। इजरायल-अमेरिका और ईरान के बीच लड़ाई 28 फरवरी 2026 को शुरू हुई थी।
कंपनियों के चौथी तिमाही के नतीजे
नए सप्ताह में 208 कंपनियां जनवरी-मार्च 2026 तिमाही के नतीजे जारी करने वाली हैं। इनमें कोटक महिंद्रा बैंक, डीमार्ट की पेरेंट कंपनी एवेन्यू सुपरमार्ट्स, जिंदल स्टील, नेशनल एल्यूमीनियम कंपनी लिमिटेड, डॉ. लाल पैथ लैब्स, हिंदुस्तान यूनिलीवर, बजाज फिनसर्व, अदाणी पोर्ट्स, वारी एनर्जीस, इंडियन बैंक, फेडरल बैंक, बजाज फाइनेंस, मारुति सुजुकी इंडिया, जोमैटो की पेरेंट कंपनी एटर्नल, सिएट, बंधन बैंक, एसबीआई कार्ड्स, एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक, अल्ट्राटेक सीमेंट, कोल इंडिया, अदाणी एंटरप्राइजेज आदि शामिल हैं।
अगर तेल की कीमतों में स्थिरता या गिरावट आती है तो इससे आर्थिक चिंताओं में कमी आ सकती है। लेकिन अगर होर्मुज स्ट्रेट में तनाव बढ़ता है या रुकावट लंबे समय तक बनी रहती है तो कच्चा तेल और महंगा हो सकता है। यह महंगाई बढ़ने का जोखिम बढ़ा देगा। इससे बाजार में फिर से अस्थिरता और मुनाफावसूली देखी जा सकती है। इस वक्त ब्रेंट क्रूड 107 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बना हुआ है। भारत अपनी कच्चे तेल की कुल जरूरत का 85 प्रतिशत आयात के जरिए पूरा करता है। महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग होर्मुज स्ट्रेट में रुकावटें भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा जोखिम बनकर उभर रहे हैं। कच्चे तेल की बढ़ी हुई कीमतें महंगाई, रुपये और चालू खाते पर दबाव डाल सकती हैं।
IIP और विदेशी मुद्रा भंडार का डेटा
देश का मार्च 2026 का इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन (IIP) डेटा 28 अप्रैल को जारी होगा। विदेशी मुद्रा भंडार के आंकड़े 1 मई को सामने आएंगे।
फेडरल रिजर्व की मीटिंग
अमेरिका का केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व अगले सप्ताह में ब्याज दर पर अपने फैसले की घोषणा करेगा। फेडरल ओपन मार्केट कमेटी की मीटिंग 28-29 अप्रैल को होने वाली है। फेड के फैसले पर भी निवेशकों की नजर रहेगी। फेडरल रिजर्व ने मार्च की मीटिंग में भी बेंचमार्क ब्याज दरों में कोई बदलाव न करते हुए इन्हें 3.50-3.75% की रेंज में स्थिर रखा था। जनवरी में भी कोई बदलाव नहीं किया था। दिसंबर 2025 की मीटिंग में लगातार तीसरी बार रेट कट करते हुए ओवरनाइट लेंडिंग रेट में 0.25 प्रतिशत की कटौती की थी। इसके अलावा नए सप्ताह में US की पहली तिमाही (Q1) की GDP का शुरुआती अनुमान और ISM मैन्युफैक्चरिंग PMI पर भी नजर रहेगी।
ग्लोबल मार्केट्स
अमेरिकी बाजार शुक्रवार को हरे निशान में बंद हुए। वहीं यूरोपीय बाजारों में गिरावट रही। एशियाई बाजारों में जकार्ता कंपोजिट 3 प्रतिशत गिरकर बंद हुआ। शंघाई कंपोजिट, सेट कंपोजिट में भी गिरावट रही। हालांकि निक्केई, हेंग सेंग और ताइवान वेटेड हरे निशान में रहे। शनिवार की रात अमेरिका में व्हाइट हाउस संवाददाताओं के वार्षिक रात्रिभोज कार्यक्रम में कई हथियारों से लैस एक व्यक्ति ने होटल के बॉलरूम के बाहर गोलीबारी कर दी। डोनाल्ड ट्रंप, उनकी पत्नी मेलानिया ट्रंप और अन्य मेहमान सुरक्षित हैं। यह घटना स्थानीय समयानुसार रात करीब 8 बजकर 34 मिनट पर वॉशिंगटन हिल्टन होटल में हुई, जब खाना परोसा जा रहा था। इस घटना की वजह से भी अमेरिकी बाजारों पर नजर रहेगी।
विदेशी निवेशकों की गतिविधि पर भी बाजार की नजर रहेगी। विदेशी संस्थागत निवेशक (FII) भारतीय बाजार में लगातार सेलर बने हुए हैं। शेयर बाजार के आंकड़ों के मुताबिक, गुरुवार को उन्होंने 3,254.71 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। एक्सपर्ट्स का मानना है कि विदेशी निवेशकों की फिर से शुरू हुई बिकवाली, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और रुपये में कमजोरी के साथ मिलकर, लार्ज-कैप शेयरों पर दबाव बनाए रख सकती है।
रुपये में गिरावट
रुपये में शुक्रवार को लगातार पांचवें सत्र में गिरावट रही। यह 22 पैसे गिरकर 94.23 प्रति डॉलर पर बंद हुआ। कच्चे तेल की अस्थिर कीमतों और मजबूत अमेरिकी डॉलर के कारण घरेलू मुद्रा पर दबाव कायम है।
Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।