शेयर बाजारों पर अमेरिका-इजरायल और ईरान की लड़ाई का असर पड़ा है। हालांकि, 5 मार्च को 2 बजे बाद बाजार में तेज उछाल देखने को मिला। इसके बावजूद निवेशकों में डर का माहौल है। अभी के माहौल में निवेशकों को क्या करना चाहिए? मनीकंट्रोल ने यह सवाल अल्फा ग्रेप के सीईओ भौतिक अंबानी से पूछा। उनसे यह भी पूछा कि अभी के माहौल में सही एसेट ऐलोकेशन क्या होना चाहिए।
इन सेक्टर्स से निवेशकों को दूर रहने की सलाह
अंबानी ने कहा, "यह हीरो बनने का समय नहीं है। यह सेक्टर्स के मामले में सेलेक्टिव होने का समय है।" उनका मानना है कि डिफेंस में स्ट्रक्चरल विजिबिलिटी दिख रही है। अनिश्चितता बढ़ने पर फार्मा स्टॉक्स स्टैबिलिटी के लिए सही हैं। निवेशकों को एविएशन, ऑयल मार्केटिंग कंपनियों और उन कंपनियों के स्टॉक्स से दूर रहना चाहिए, जिन पर क्रूड ऑयल की कीमतों का असर पड़ता है। उन्होंने कहा कि अगर क्रूड की कीमतें कुछ हफ्तों तक भी हाई रहती हैं तो इसका हमारे ऊपर बड़ा असर पड़ेगा। इसका असर रुपया, इनफ्लेशन और करेंट अकाउंट पर पड़ेगा।
अमेरिकी पॉलिसी ने बढ़ाई है अनिश्चितता
उन्होंने कहा कि अमेरिका की पॉलिसी की वजह से अनिश्चितता बढ़ी है। इसका असर ऑयल की कीमतों, डॉलर में मजबूती और फॉरेन फ्लो में कमी के रूप में दिखा है। लेकिन, यह सिर्फ एक रिस्क है। एआई का असर दूसरा बड़ा रिस्क है। खासकर इंडियन आईटी कंपनियों पर इसका बड़ा असर पड़ सकता है। मार्केट अभी जानने की कोशिश कर रहा है कि एआई का असर आईटी कंपनियों के ट्रेडिशनल सर्विसेज मॉडल्स पर किस तरह से पड़ता है।
आज के माहौल में एसेट ऐलोकेशन काफी अहम
आज निवेश में किस तरह का एसेट ऐलोकेशन करना ठीक रहेगा? इस सवाल के जवाब में अंबानी ने कहा कि मौजूदा माहौल में स्टॉक की कीमतों से ज्यादा अहम एसेट ऐलोकेशन है। हमारा मल्टी-एसेट फ्रेमवर्क पहले से ज्यादा कंजरेविटव हो गया है। अभी यह इक्विटी में करीब 25 फीसदी, गोल्ड में करीब 30 फीसदी और बाकी 45 फीसदी का निवेश फिक्स्ड इनकम में करने का संकेत दे रहा है। गोल्ड में ज्यादा ऐलोकेशन की वजह जियोपॉलिटिकल और करेंसी को लेकर अनिश्चितता है। फिक्स्ड इनकम स्टैबिलिटी और फ्लेक्सिबिलिटी के लिए जरूरी है। उतार-चढ़ाव बढ़ने पर रिटर्न के पीछे भागने की जगह पैसे को बचाना और अनुशासन ज्यादा जरूरी है।
आईटी शेयरों में निवेश में नहीं करें जल्दबाजी
आईटी शेयरों के बारे में अंबानी ने कहा कि निवेशकों को धैर्य रखने की जरूरत है। आईटी कंपनियों को एक साथ दो चैलेंजेज का सामना करना पड़ रहा है। पहला वैश्विक अनिश्चितता और दूसरा एआई का रेवेन्यू मॉडल पर संभावित असर। उन्होंने कहा कि वैल्यूएशंस में काफी कमी आई है खासकर लार्जकैप शेयरों में ऐसा हुआ है। लेकिन, अर्निंग्स को लेकर अभी तस्वीर साफ होनी बाकी है। सस्ते भाव का भाव उठाने की जगह निवेशकों के लिए धीरे-धीरे निवेश करना ठीक रहेगा और यह देखना होगा कि कंपनियां किस तरह से बदलती स्थितियों के साथ तालमेल बैठा रही हैं।