US-Iran War: अमेरिका-ईरान लड़ाई का कितना असर क्रूड, गोल्ड और शेयरों पर पड़ सकता है? जानिए क्या कहता है इतिहास
US-Iran War: पिछले 60 सालों में मिडिलईस्ट में बड़े टकराव को देखने पर एक क्लियर पैटर्न नजर आता है। मार्केट के लिए इस टकराव से ज्यादा अहम ग्लोबल इकोनॉमी की सेहत रही है। कई बार टकराव का ज्यादा असर ऑयल की कीमतों पर नहीं पड़ा है
28 फरवरी से शुरू अमेरिका-इजरायल और ईरान की लड़ाई का असर शेयर बाजार पर पड़ा है।
US-Iran War: जब कोई युद्ध शुरू होता है तो सबसे पहले फाइनेशियल मार्केट्स पर उसका असर पड़ता है। अनिश्चितता की वजह से निवेशकों में डर देखने को मिलता है। हालांकि, पिछले 60 सालों में मिडिलईस्ट में बड़े टकराव को देखने पर एक क्लियर पैटर्न नजर आता है। मार्केट के लिए इस टकराव से ज्यादा अहम ग्लोबल इकोनॉमी की सेहत रही है। इन टकरावों के क्रूड ऑयल, गोल्ड, सिल्वर, एसएंडपी 500 और सेंसेक्स पर 1 महीने, 3 महीने, 6 महीने और 12 महीनों के असर की स्टडी से कुछ बातें पता चलती हैं।
1. 1967 की छह दिन की लड़ाई
मिस्र, जॉर्डन और सीरिया से चली छह दिन की लड़ाई में इजरायल की निर्णायक जीत हुई थी। चूंकि यह लड़ाई जल्द खत्म हो गई, जिससे ऑयल की सप्लाई पर पड़ा असर नहीं पड़ा। कीमतें सिर्फ 2 फीसदी चढ़ी। गोल्ड पर सरकार का नियंत्रण था, जिससे इसकी कीमतें 35 डॉलर प्रति औंस पर स्थिर रहीं। अगले साल S&P500 में 10 फीसदी उछाल आया, जिसकी वजह लड़ाई के बाद इंडस्ट्रियल एक्टिविटी और कंज्यूमर स्पेंडिंग में उछाल था।
2. 1973 का योम किप्पुर युद्धऔर ओपेक का प्रतिबंध
इजरायल पर योम किप्पुर के दिन मिस्र और सीरिया ने अचानक हमला बोल दिया। आखिर में अमेरिकी की मदद से इस लड़ाई में इजरायल की जीत हुई। जवाब में अरब के तेल उत्पादक देश ओपेक के तहत एकजुट हुए और अमेरिका और पश्चिमी यूरोप को तेल की सप्लाई पूरी तरह बंद कर दी। इससे 12 महीनों में ऑयल की कीमतें 302 फीसदी चढ़ गईं। पहली बार तेल का इस्तेमाल राजनीतिक हथियार के रूप में हुआ। गोल्ड 1971 में 35 डॉलर प्रति औंस की फिक्स्ड कीमत वाले सरकार के नियंत्रण से बाहर आ चुका था। इससे गोल्ड पर प्रतिबंध का असर दिखा। यह 12 महीनों में 69 फीसदी चढ़ा। S&P500 35 फीसदी टूट गया, क्योंकि अमेरिका की अर्थव्यवस्था को इस प्रतिबंध का काफी नुकसान पहुंचा था। पेट्रोल के लिए लंबी लाइन लगती थीं। फैक्ट्रीज बंद हो गई थीं। इनफ्लेशन में उछाल आया था। मॉडर्न हिस्ट्री में फाइनेंशियल मार्केट्स पर युद्ध का पड़ने वाला यह सबसे ज्यादा असर था। यह लड़ाई के चलते नहीं हुआ था बल्कि तेल की कीमतों की वजह से हुआ था।
3. ईरान-इराक लड़ाई (1080)
इरान ने सितंबर 1980 में ईरान पर हमला कर दिया। यह लड़ाई 8 साल तक चली। जब लड़ाई शुरू हुई तब गोल्ड का भाव 670 डॉलर प्रति औंस था। 12 महीनों में यह 36 फीसदी गिरा। सप्लाई घटने के डर से तेल की कीमतों में 7 फीसदी उछाल आया। लेकिन, पूरी लड़ाई के दौरान ईरान और इराक ने जमकर ऑयल बेचे। इस पैसे का इस्तेमाल उन्होंने हथियार खरीदने और सेनाओं पर खर्च किए। हालांकि, इससे ऑयल की कीमतों में तेजी नहीं आई और लंबी अवधि में इसमें गिरावट दिखी। S&P500 में सिर्फ 6 फीसदी की तेजी आई।
4. 1990-91 का खाड़ी युद्ध I और ऑपरेशन डेजर्ट स्टॉर्म
इरान ने 2 अगस्त, 1990 को कुवैत पर हमला कर उसे कब्जे में ले लिया। इससे एक दिन में ग्लोबल ऑयल मार्केट से करीब 9 फीसदी सप्लाई कम हो गई। सिर्फ एक महीने में तेल की कीमत 17 डॉलर से बढ़कर 36 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई। यह 112 फीसदी का उछाल था। ग्लोबल मार्केट्स में डर था, क्योंकि इस बात की चर्चा थी कि क्या इराक का अगला निशाना सऊदी अरब होगा। एसएंडपी500 14 फीसदी गिर गया। हालांकि, 17 जनवरी, 1991 को ऑपरेशन डेजर्ट ऑपरेशन शुरू होने पर उस दिन ऑयल 33 फीसदी फिसला। यह साफ होने पर कोएलिशन की जल्द जीत होगी, डर खत्म हो गया। यह इस बात का सबूत है कि मार्केट पर तथ्य से ज्यादा डर का असर पड़ता है।
5. इराक पर अमेरिका का हमला (2003)
अमेरिका ने 20 मार्च, 2003 को इराक पर हमला कर दिया। उसका दावा था कि इरान केमिकल और व्यापक जनसंहार के हथियार बना रहा है। बाद में ऐसा कोई हथियार नहीं मिला। हमले के बाद के कुछ हफ्तों में ऑयल की कीमतें 10-15 फीसदी गिर गईं, क्योंकि इराक की पराजय के बाद डर खत्म हो गया। सबसे बड़ी बात यह है कि BSE Sensex में 12 महीनों में 80 फीसदी तेजी आई। आईटी एक्सपोर्ट्स और विदेशी निवेश से इंडियन इकोनॉमी तेजी से बढ़ रही थी।
6. लेबनान का युद्ध
2006 में इजरायल और हिजबुल्लाह के बीच दक्षिण लेबनान और उत्तरी इजरायल में दो महीने तक लड़ाई चली। शुरुआत में ऑयल की कीमत सिर्फ 5 फीसदी उछली। उसके बाद वह तेजी खत्म हो गई, क्योंकि लेबनना तेल का उत्पादन नहीं करता है और हिजबुल्लाह के पास ऑयल के बड़े रूट को नुकसान पहुंचाने की क्षमता नहीं थी। 12 महीनों में गोल्ड 5 फीसदी और सिल्वर 53 फीसदी चढ़ा। इसमें चीन की डिमांड का बड़ा हाथ था। एसएंडपी500 में 14 फीसदी तेजी आई और सेंसेक्स 46 फीसदी चढ़ा। इसकी वजह स्ट्रॉन्ग ग्लोबल इकोनॉमिक ग्रोथ रही।
हमास ने 7 अक्तूबर, 2023 को इजरायल पर बड़ा हमला किया था। इसमें 1,200 लोगों की मौत हो गई। जवाब ने इजरायल ने गाजा के खिलाफ सैन्य अभियान शुरू किया। शुरुआत में ऑयल की कीमत 5 फीसदी उछली। लेकिन बाद में उसमें 13 फीसदी (12 महीनों में) से ज्यादा गिरावट आई। अमेरिका में शेल प्रोडक्शन की वजह से ग्लोबल सप्लाई पर असर नहीं पड़ा। 12 महीनों में सोना 38 फीसदी चढ़ा। इसमें लड़ाई का नहीं बल्कि दुनिया के कई केंद्रीय बैंकों की गोल्ड की खरीदारी का हाथ था। एक साल में सिल्वर 43 फीसदी चढ़ा। एसएंडपी500 में 12 महीनों में 36 फीसदी से ज्यादा उछाल आया। इसमें एनवीडिया के शेयरों में तेजी, एआई बूम और फेडरल रिजर्व के इंटरेस्ट रेट घटाने के अनुमान का हाथ था।