आकाश नाम के एक इनवेस्टर ने अप्रैल 2018 में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट किया। इसमें उन्होंने मनीकंट्रोल के डेटा के आधार पर अपने तीन शेयरों के पिछले 10 साल के रिटर्न के बारे में बताया। 2008 से 2018 के बीच रिलायंस इंडस्ट्रीज का कंपाउंडेड एनुअल ग्रोथ रेट (सीएजीआर) 2.4 फीसदी, एसबीआई का 1.02 फीसदी और एबीबी का -1.89 फीसदी था। इस महीने उन्होंने बीते 7 सालों में तीनों स्टॉक्स के सीएजीआर के बारे में बताया। रिलायंस का सीएजीआर 18 फीसदी, एसबीआई का 19 फीसदी और एबीबी का 27 फीसदी है।
नए इनवेस्टर (Investors) को कुछ बातें जरूरत समझ लेनी चाहिए। अगर किसी स्टॉक में आपको लॉस हो रहा है, तो इसका मतलब यह नहीं है कि आपसे गलती हुई है। दरअसल, इस लॉस के फेज में आप अपनी पर्चेज कॉस्ट को एवरेज कर सकते हैं। लेकिन, ऐसा तभी करना समझदारी है, जब आपको कंपनी के बिजनेस में पूरा भरोसा है। बिजनेस को समझे बगैर आप शेयर खरीद रहे हैं तो आप गलती कर रहे हैं। अगर आप शेयर खरीदने से पहले कंपनी के बारे में बुनियादी बातें (Company Fundementals) समझने की कोशिश नहीं करते हैं तो भी आप गलती कर रहे हैं। अगर आप बुल रन में यह मानते हुए शेयर खरीद रहे हैं कि आगे सबकुछ अच्छा रहेगा तो भी आप गलती कर रहे हैं।
मेरा मतलब यह है कि आपके लॉस की वजह आपका गलत फैसला नहीं होना चाहिए। अमेरिकन फाइनेंशियल एनालिस्ट, इनवेस्टर और एडवाइजर थॉमस फेल्प्स ने इस बारे में 1972 में अपनी बुक '100 to 1 in the Stock Market' में बताया था। उन्होंने एक उदाहरण की मदद से अपनी बात समझाने की कोशिश की थी। उन्होंने 20 साल के Pfizer के फाइनेंशियल्स (वित्तीय स्थिति) का एक टेबल तैयार किया था।
Pfizer की सेल्स 20 साल के दौरान 6.7 गुनी हो गई थी। अर्निंग्स 4.7 गुनी हो गई थी। डिविडेंड 3.5 गुना हो गया था। शेयरहोल्डर्स को मिला औसत रिटर्न काफी ज्यादा यानी करीब 17 फीसदी था। अगर किसी ने सिर्फ फाइजर के शेयरों के प्राइस पर फोकस किया होता तो तस्वीर अलग रही होती। इस बात की उम्मीद है कि उसने इस स्टॉक में निवेश नहीं किया होता। इस स्टॉक की कीमतों में उतारचढ़ाव देखने को मिला था और 5 साल के पीरियड में इसका प्रदर्शन मार्केट के मुकाबले कमजोर था।
इनवेस्टर को तिमाही दर तिमाही या साल दर साल आधार पर भी इस स्टॉक का रिटर्न खराब लगा होता और उसने इस बेच दिया होता। यह एक महंगी गलती होती, क्योंकि उन 20 सालों में यह स्टॉक 25 गुना हो गया। इसमें डिविडेंड शामिल नहीं है।
फेल्प्स ने अपने दोस्त और अमीर निवेशक कार्ल पेटिट की कहानी भी बताई थी। दरअसल पेटिट ने कंप्यूटिंग-टैबुलेटिंग-रिकॉर्डिंग कंपनी में इनवेस्ट किया था, जिसका नाम बाद में IBM हो गया था। पेटिट ने बताया था, "1925 में मेरे पास 6,500 स्टॉक्स थे। तब आउटस्टैंडिंग शेयरों की संखअया सिर्फ 1,20,000 थी। मैंने अपने शेयर कुछ लाख डॉलर में बेच दिए। अगर आज (यह बुक 1972 में लिखी गई थी) वे स्टॉक्स मेरे पास होते तो उनकी वैल्यू करीब 2 अरब डॉलर होती।"
इसका मतलब है कि शेयरों को जल्द बेचना आपकी बड़ी गलती साबित हो सकती है। जल्द शेयरों को बेचने वाले इनवेस्टर्स के लिए फेल्प्स की सलाह काफी उपयोगी हो सकती है। पहला, जब शेयर की कीमतें ऊपर होती है तो वह शेयर ज्यादातर लोगों को अट्रैक्टिव लगता है और जब कीमत काफी कम होती है तो वह लोगों को खराब लगता है। इस वजह से शेयर खरीदने में और बेचने में गलती करते हैं।
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दूसरा, जब कभी आपके मन में किसी स्टॉक को रखने या बेचने का सवाल आए तो आपको उसके करेंट प्राइस के आधार पर फैसला नही करना चाहिए। आपको उसकी अर्निंग पावर को देखना चाहिए। आपको किसी स्टॉक में तब तक बने रहना चाहिए जब तक कंपनी की अर्निंग्स बढ़ रही है।
तीसरा, बगैर रिसर्च के कभी कोई फैसला नहीं करें। जैसे- मेरे स्टॉक की कीमत बहुत ज्यादा है, मेरे स्टॉक की कीमत बढ़ नहीं रही है आदि के आधार पर कभी किसी स्टॉक को बेचने का फैसला नहीं करें। चौथा, मार्केट में उतारचढ़ाव को लेकर कभी चिंता नहीं करें। अगर किसी स्टॉक की कीमतें पिछले 10-15 साल में बढ़ी है तो यह इस बात की गारंटी नहीं है कि वह आगे भी एक साल या दो साल में चढ़ता रहेगा।
(फर्नांड पर्सनल फाइनेंस और इनवेस्टमेंट पर लिखती हैं। यहां व्यक्ति विचार उनके निजी विचार हैं। इसका इस पब्लिकेशन से संबंध नहीं है)