लगातार तीसरे हफ्ते घरेलू शेयर बाजारों में गिरावट आई। कमजोर विदेशी संकेतों के साथ ही डॉलर के मुकाबले रुपये की गिरावट का असर घरेलू बाजार पर पड़ा। विदेशी फंडों की बिकवाली का असर भी बाजार के सेंटीमेंट पर पड़ा। हालांकि, शुक्रवार को बाजार में जबर्दस्त तेजी देखने को मिली।
30 सितंबर (शुक्रवार) को खत्म हफ्ते के दौरान BSE का 30 शेयरों वाला Sensex 672 यानी 1.34 फीसदी की कमजोरी के साथ 57,462 अंक पर आ गया। NSE का 50 शेयरों वाला NIFTY 233 अंक यानी 1.34 फीसदी लुढ़ककर 17,094 अंक पर आ गया। सितंबर महीने में दोनों बेंचमार्क 3-3 फीसदी गिर चुके हैं।
कई सेक्टर के सूचकांकों में भी बड़ी गिरावट देखने को मिली। निफ्टी मेंटल इंडेक्स 4.3 फीसदी गिर गया। निफ्टी एनर्जी इंडेक्स 3.4 फीसदी लुढ़का। निफ्टी ऑटो और रियल्टी सूचकांकों में भी करीब 3-3 फीसदी की कमजोरी आई। दूसरी तरफ निफ्टी फॉर्मा इंडेक्स में करीब 3 फीसदी और आईटी इंडेक्स में 1.5 फीसदी की मजबूत देखने को मिली। BSE स्मॉलकैप, मिडकैप और लार्जकैप सूचकांक 1-1 फीसदी गिर गए।
बाजार में गिरावट के बावजूद DB Realty, Transformers and Rectifiers India, Dish TV India, Tanfac Industries, Tata Investment Corporation, Jai Corp, Venus Pipes and Tubes, Schneider Electric Infrastructure, Vinyl Chemicals (India), Aurionpro Solutions, Inox Wind, Hercules Hoist और JTL Infra के शेयरों में 30-64 फीसदी की तेजी देखने को मिली।
एंजेल वन के चीफ एनालिस्ट (टेक्निकल एंड डेरिवेटिव) समीत चौहान ने कहा, "हफ्ते के आखिर में ग्लोबल मार्केट्स में कोहराम मचा। इसकी वजह यूएस डॉलर में आई मजबूती है। यह बहुत ज्यादा ऊंचे स्तर पर पहुंच गया है। शेयर बाजार और डॉलर इंडेक्स में विपरीत संबंध है। विदेशी बाजारों में कमजोरी के बीच सोमवार को घरेलू बाजार कमजोरी के साथ खुले। हफ्ते के दौरान बाजार में बिकवाली दबाव बढ़ता गया।"
शुक्रवार को RBI की मॉनेटरी पॉलिसी के बाद मार्केट में जबर्दस्त तेजी देखने को मिली। इसकी वजह यह है कि केंद्रीय बैंक ने रेपो रेट में 0.50 फीसदी की वृद्धि की। बाजार इसकी उम्मीद पहले से कर रहा था। केंद्रीय बैंक ने कहा है कि दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं पर दबाव के बावजूद इंडियन इकोनॉमी मजबूत स्थिति में है। इससे बाजार का उत्साह बढ़ा। इनवेस्टर्स ने जमकर खरीदारी की।