क्या आप छप्परफाड़ कमाई वाले शेयरों की तलाश में हैं? अगर हां तो आपको एस नरेन की सलाह पर ध्यान देने की जरूरत है। नरेन आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल म्यूचुअल फंड के चीफ इनवेस्टमेंट अफसर हैं। उनका मानना है कि इंडिया और अमेरिका को छोड़ इनवेस्टर्स को दूसरे मार्केट्स में निवेश के बारे में सोचना चाहिए। मनीकंट्रोल से बातचीत में उन्होंने स्टॉक एक्सचेंज और इनवेस्टमेंट के बारे में कई खास बातें बताईं।
फॉरेन मार्केट्स में वैल्यूएश अट्रैक्टिव
नरेन ने कहा कि ज्यादातर फॉरेन मार्केट्स (Foreign Markets) में शेयरों की वैल्यूएशन कम हैं। उन्होंने कोरिया, ब्राजील, ताइवान और चीन जैसी उभरती अर्थव्यवस्थाओं का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इन मार्केट्स की वैल्यूएशन कम है और पिछले करीब डेढ़ दशक में इनका प्रदर्शन इंडिया के मुकाबले खराब रहा है। उन्होंने कहा कि अमेरिका को छोड़ बाकी ग्लोबल मार्केट्स का प्रदर्शन इंडिया के मुकाबले काफी कमजोर रहा है।
फॉरेन मार्केट्स में निवेश करना आसान नहीं
हालांकि, इंडियन इनवेस्टर्स के लिए फॉरेन मार्केट्स में निवेश करना आसान नहीं है। इंडियन म्यूचुअलस फंड्स फॉरेन मार्केट्स में 7 अरब डॉलर से ज्यादा इनवेस्ट नहीं कर सकते। घरेलू एसेट मैनेजमेंट कंपनियों का निवेश पहले ही इस लिमिट तक पहुंच चुका है। नरेन ने कहा कि अगर RBI और SEBI इस लिमिट को बढ़ाते हैं तो इंडियन इनवेस्टर्स के लिए फॉरेन मार्केट्स में निवेश का रास्ता खुल जाएगा। उन्होंने कहा कि आरबीआई की लिबरलाइज्ड रेमिटेंस स्कीम (LRS) के जरिए विदेश में इनवेस्ट किया जा सकता है। लेकिन, यह काफी मुश्किल है।
उभरते बाजारों का प्रदर्शन अमेरिका मार्केट्स से खराब
उन्होंने कहा कि 2008 से 2025 के बीच कई मार्केट्स खासकर उभरती अर्थव्यवस्था वाले देशों का प्रदर्शन अमेरिकी बाजार के मुकाबले काफी कमजोर रहा है। ऐसे में इन बाजारों में कई सालों तक तेजी बनी रहने के आसार हैं। दूसरा, इससे इनवेस्टर्स को डॉलर के मुकाबले डायवर्सिफाय करने का भी मौका मिलेगा। उन्होंने कहा कि डायवर्सिफिकेशन के लिहाज से गोल्ड में निवेश करना समझदारी है। हालांकि, उन्होंने सोने और चांदी पर बड़े दांव लगाने की सलाह नहीं दी। उनका मानना है कि कीमती मेटल्स पर बड़े दांव लगाने का समय खत्म हो चुका है।
इंडियन मार्केट्स लगातार छह हफ्ते गिरा
गौरतलब है कि इंडियन स्टॉक्स मार्केट्स में लगातार छह हफ्ते गिरावट जारी रही। इससे मार्केट में सेंटीमेंट काफी कमजोर है। हालांकि, 11 अगस्त को मार्केट के प्रमुख सूचकांकों में अच्छी तेजी देखने को मिली। इसकी वजह शॉर्ट कवरिंग हो सकती है। मार्केट के ट्रेंड के बारे में अंदाजा लगाने के लिए अगले कुछ दिन बाजार की चाल को देखना होगा।