अगले वित्त वर्ष में अर्निंग्स ग्रोथ और मार्केट का रिटर्न 12-13 फीसदी रह सकता है। महिंद्रा मनुलाइफ के सीआईओ कृष्णा सांघवी ने यह अनुमान जताया है। उन्होंने कहा कि अगर बाहरी स्थितियां ठीक रहती हैं और घरेलू स्थितियां बेहतर होती हैं तो वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनियों की अर्निंग्स ग्रोथ 12-13 फीसदी रह सकती है। उन्होंने कहा कि ऐसे में स्टॉक मार्केट के प्रमुख सूचकांकों में भी इतनी तेजी आ सकती है। उन्होंने कहा कि अर्निंग्स ग्रोथ में घरेलू पूंजीगत खर्च, कंजम्प्शन में रिकवरी और कुछ फाइनेंशियल कंपनियों का बड़ा योगदान होगा।
अमेरिकी टैरिफ से उथलपुथल की स्थिति बन सकती है
उन्होंने कहा कि इस बीच वैश्विक स्थितियों खासकर अमेरिका में टैरिफ (US Tariff) पर नजर रखनी होगी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ पॉलिसी से दुनिया में उथलपुथल की स्थिति बन सकती है। इसका असर कई सेक्टर की कंपनियों की अर्निंग्स पर भी दिख सकता है। इससे इनवेस्टमेंट से जुड़ा सेंटिमेंट भी प्रभावित होगा। उन्होंने कहा कि ऐसे में मार्केट को लेकर किसी तरह का अनुमान व्यक्त करने की जगह उन स्टॉक्स पर फोकस करना ठीक होगा, जिनके फंडामेंटल्स स्ट्रॉन्ग बने हुए हैं।
इंडियन इकोनॉमी काफी हद तक टैरिफ वॉर से सुरक्षित
उन्होंने कहा कि ग्लोबल ट्रेड को लेकर स्थितियां अप्रैल में साफ होने की उम्मीद है। ट्रंप की पॉलिसी का असर अमेरिका में ग्रोथ की संभावनाओं पर पड़ेगा। इनका इंडिया में अलग-अलग सेक्टर पर अलग-अलग असर दिख सकता है। उन कंपनियों के अर्निंग्स पर ज्यादा असर दिख सकता है, जिनके रेवेन्यू में एक्सपोर्ट की ज्यादा हिस्सेदारी है। हालांकि, इंडिया एक कंजम्प्शन आधारित इकोनॉमी है, जिससे कुछ हद तक यह अमेरिका में होने वाले डेवलपमेंट से सुरक्षित है।
एफएमसीजी कंपनियों के प्रदर्शन में सुधार की उम्मीद
एफएमसीजी स्टॉक्स के प्रदर्शन के बारे में उन्होंने कहा कि एफएमसीजी कंपनियों के प्रदर्शन पर कमजोर डिमांड और ज्यादा इनपुट कॉस्ट का असर पड़ा है। लेकिन, आगे स्थितियां पॉजिटिव दिख रही हैं। सेमी-अर्बन और रूरल इलाकों में डिमांड बढ़ने से एफएमसीजी कंपनियों को फायदा होगा। मीडियम टर्म में कुछ चुनिंदा एफएमसीजी कंपनियों की अर्निंग्स के अनुमान में इजाफा दिख सकता है। हालांकि, डिमांड में रिकवरी धीरे-धीरे आएगी।
यह भी पढ़ें: दिग्गज इनवेस्टर शंकर शर्मा ने Elon Musk की इंडिया में एंट्री पर उठाए सवाल, पूछा-आखिर मस्क को फ्री पास क्यों मिल रहा?
पूंजीगत खर्च बढ़ने से इकोनॉमी और मार्केट पर पॉजिटिव असर
सांघवी ने कहा कि FY26 में प्राइवेट और पब्लिक दोनों के पूंजीगत खर्च में इजाफा होगा। सरकार अपना खर्च बढ़ा सकती है। खासकर रूरल डेवलपमेंट और इंफ्रास्ट्रक्चर पर सरकार का खर्च बढ़ सकता है। इसके अलावा कई कंपनियां जिनकी बैलेंसशीट पिछले सालों में मजबूत रही हैं, वे अपने ग्रोथ प्लान पर निवेश कर सकती हैं। हमारा मानना है कि इनवेस्टमेंट की साइकिल बदलने जा रही है। इससे जीडीपी ग्रोथ को भी सपोर्ट मिलेगा।