क्या लगातार तीन दिन की तेजी मार्केट में रिकवरी शुरू होने का संकेत है?

यह हफ्ता मार्केट के लिए पॉजिटिव है। 19 मार्च को लगातार तीसरे दिन स्टॉक मार्केट्स में तेजी देखने को मिली। 18 मार्च को सेंसेक्स में 1100 प्वाइंट्स से ज्यादा तेजी आई थी। इसकी बड़ी वजह विदेशी संस्थागत निवेशकों की खरीदारी थी। लंबे समय बाद FII ने इंडियन मार्केट में खरीदारी की

अपडेटेड Mar 19, 2025 पर 4:15 PM
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18 मार्च को फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस सेगमेंट के 220 स्टॉक्स में से 101 में FIIs की शॉर्ट-कवरिंग देखने को मिली।

यह हफ्ता इंडियन स्टॉक मार्केट्स के लिए अच्छा रह सकता है। 19 मार्च को लगातार तीसरे दिन स्टॉक मार्केट्स में रौनक दिखी। 18 मार्च को 1,131 प्वाइंट्स के उछाल के साथ 75,000 से ऊपर बंद हुआ था। मिडकैप और स्मॉलकैप सूचकांकों में 2 फीसदी से ज्यादा उछाल आया था। सभी सेक्टर के सूचकांक हरे निशान में बंद हुए थे। सवाल है कि क्या मार्केट का सेंटिमेंट बदल गया है?

मार्केट में आगे आ सकता है करेक्शन

एनालिस्ट्स का कहना है कि इस तेजी के बाद मार्केट में करेक्शन (Correction) आ सकता है। फाइडेंट एसेट मैनेजमेंट के सीआईओ और फाउंडर ऐश्वर्य दधीच ने कहा, "कई स्टॉक्स में हम ओवरसोल्ड जोन में हैं। आज की तेजी की मुख्य वजह टेक्निकल है।" डेरिवेटिव मार्केट्स में ऑउटस्टैंडिंग पोजीशंस से पता चलता है कि 18 मार्च को सेंसेक्स में 1100 प्वाइंट्स से ज्यादा की रिकवरी की मुख्य वजह विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की शॉर्ट-कवरिंग थी। लगातार एक महीने तक बिकवाली करने के बाद उन्होंने मार्केट्स में खरीदारी की।


FII की शॉर्ट-कवरिंग से आई तेजी

स्टॉक एक्सचेंजों के डेटा के मुताबिक, फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस सेगमेंट के 220 स्टॉक्स में से 101 में FIIs की शॉर्ट-कवरिंग देखने को मिली। कैश सेगमेंट में एफआईआई ने शुद्ध रूप से खरीदारी की। उनकी खरीदारी 1,463 करोड़ रुपये की रही। ब्रोकरेज फर्म जियोजित फाइनेंशियल सर्विसेज के इनवेस्टमेंट स्ट्रेटेजिस्ट गौरंग शाह ने कहा कि मार्केट में रिकवरी अच्छी है, लेकिन ग्लोबल प्रॉब्लम्स बनी हुई हैं। 18 मार्च को अमेरिकी मार्केट बड़ी गिरावट के साथ बंद हुए। S&P 500 फिसला, जबकि नैस्डेक में 1.71 फीसदी की गिरावट आई।

स्मॉलकैप और मिडकैप स्टॉक्स में कमजोरी जारी

मिडकैप और स्मॉलकैप स्टॉक्स अब भी कमजोर दिख रहे हैं। बीएसई मिडकैप और बीएसई स्मॉलकैप सूचकांक अपने पीक से 20-23 फीसदी तक गिर चुके हैं। इसलिए पिछले तीन दिनों से जारी ट्रेंड को मार्केट के सेंटिमेंट में बदलाव का संकेत नहीं माना जा सकता। मार्केट में तभी स्थिरता आएगी, जब विदेशी संस्थागत निवेशकों की खरादीरी जारी रहेगी। अच्छी बात यह है कि अमेरिकी डॉलर इंडेक्स नवंबर 2024 के अपने 110 के हाई से गिरकर 103 पर आ गया है।

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म्यूचुअल फंडों ने इन सेक्टर पर लगाया दांव

हालिया तेजी का ज्यादा असर इंफ्रास्ट्रक्चर, कैपिटल गुड्स और रियल एस्टेट सेक्टर के मिडकैप और स्मॉलकैप स्टॉक्स पर देखने को मिला है। हालांकि, एक्सपर्ट्स का कहना है कि मीडियम टर्म में आईटी और फार्मा का प्रदर्शन अच्छा रह सकता है। ब्रोकरेज फर्म मोतीलाल ओसवाल ने फरवरी में अपनी रिपोर्ट में कहा था कि म्यूचुअल फंडों ने प्राइवेट बैंकों, एनबीएफसी, हेल्थकेयर, टेलीकॉम और मेटल्स शेयरों में निवेश बढ़ाया है। उन्होंने कैपिटल गुड्स, टेक्नोलॉजी, ऑटो और पीएसयू शेयरों में अपना निवेश घटाया है।

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