Stock Markets: ईरान-इजरायल की लड़ाई के बाद आपकी इनवेस्टमेंट स्ट्रेटेजी क्या होनी चाहिए?
अमेरिका ने इजरायल और ईरान के बीच सीजफायर कराया। लेकिन, यह सीजफायर कितना टिकाऊ होगा, यह बताना मुश्किल है। इस बीच, हॉर्मुज की खाड़ी ईरान के लिए बड़े हथियार के रूप में सामने आया है। अगर ईरान इस रास्ते को बंद करता है तो दुनिया को तेल के एक बड़ी हिस्से की सप्लाई रुक जाएगी
गोल्ड में करीब 1.5 फीसदी गिरावट आई है। डॉलर भी गिरा है। उधर, अमेरिकी स्टॉक मार्केट के प्रमुख सूचकांक नैस्डेक में करीब 3 फीसदी तेजी आई है।
ईरान और इजरायल के बीच की लड़ाई 13 जून को भड़क गई। दोनों देश खुलकर आमने-सामने आ गए। मिडिल-ईस्ट में टेंशन चरम पर पहुंच गया। इसका असर सप्लाई चेन पर भी पड़ा। इससे ग्लोबल इकोनॉमिक की ग्रोथ को झटका लगा। सबसे बड़ा संकट तब सामने आया जब ईरान की संसद ने हॉर्मुज की खाड़ी को बंद करने का प्रस्ताव पारित किया। दरअसल, यह ईरान के हाथ में बड़ा हथियार था। ईरान के इस फैसले ने पूरी दुनिया को चिंतित कर दिया। हालांकि, निफ्टी 50 पर इसका ज्यादा असर नहीं पड़ा।
13 जून के बाद से मार्केट करीब 3 फीसदी चढ़ा है। सवाल है कि इंडियन मार्केट्स पर ईरान-इजराल की लड़ाई का ज्यादा असर क्यों नहीं पड़ा? अगर हॉर्मुज की खाड़ी बंद हो जाती है तो इंडिया को कितनी दिक्कत होगी?
इन सवालों के जवाब के लिए हॉर्मुज की खाड़ी (Strait of Hormuz) की अहमियत समझनी होगी। दुनिया में क्रूड ऑयल के 20 फीसदी हिस्से की सप्लाई इस रास्ते से होती है। लेकिन, इंडिया की बात की जाए तो यह रास्ता काफी मायने रखता है। भारत का करीब 40 फीसदी ऑयल बंदर अब्बास बंदरगाह से आता है, जो हॉर्मुज की खाड़ी के नजदीक स्थित है। चूंकि, इंडिया अपनी जरूरत के 85 फीसदी हिस्से क्रूड का इंपोर्ट करता है, जिससे यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि हॉर्मुज के रास्ते कितना ज्यादा ऑयल इंडिया आता है।
भारत चाबहार बंदरगाह को हॉर्मुज की खाड़ी के विकल्प के रूप में विकसित करना चाहता है। लेकिन, इसमें समय लगेगा, क्योंकि इसके लिए रेलवे और सड़क नेटवर्क को आपस में कनेक्ट करना होगा। बंदर अब्बास के रास्ते पर कभी भी रिस्क पैदा हो सकता है। इसलिए इंडिया ने चाबहार इलाके में इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलप करने पर फोकस बढ़ा दिया है। हालांकि, इसमें अभी समय लगेगा।
इस बीच, इंडिया शॉर्ट टर्म सॉल्यूशंस पर काम कर रहा है। अभी इंडिया 40 फीसदी क्रूड अमेरिका और रूस से खरीद रहा है। भारत इसे बढ़ा सकता है, क्योंकि यह सप्लाई हॉर्मुज खाड़ी के रास्ते नहीं आती है। भारत हॉर्मुज की खाड़ी के इस्तेमाल से बचने के लिए सऊदी अरब और अबूधाबी की ऑयल पाइपलाइन के इ्स्तेमाल पर भी विचार कर रहा है।
क्या लड़ाई से इंडिया पर कोई असर नहीं पड़ा?
अमेरिका ने इजरायल और ईरान के बीच सीजफायर कराया। लेकिन, यह सीजफायर कितना टिकाऊ होगा, यह बताना मुश्किल है। इस बीच, हॉर्मुज की खाड़ी ईरान के लिए बड़े हथियार के रूप में सामने आया है। अगर ईरान इस रास्ते को बंद करता है तो दुनिया को तेल के एक बड़ी हिस्से की सप्लाई रुक जाएगी। हार्मुज की खाड़ी बंद होने की चर्चा से क्रूड ऑयल की कीमतें 80 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई। हालांकि, जल्द कीमतें नीचे आ गईं।
अगर हॉर्मुज के रास्ते को बंद किया जाता है तो इंडिया वैकल्पिक उपायों का इस्तेमाल कर सकता है। लेकिन, ऑयल की कॉस्ट बढ़ जाएगी। लेकिन, इंडिया में आम लोगों के लिए फ्यूल की कीमतें तबतक नहीं बढ़ेगी, जब तक क्रूड का भाव 85-90 डॉलर प्रति बैरल के पार नहीं चला जाता। हालांकि, इंडिया का इंपोर्ट बिल बढ़ जाएगा। इसका असर विदेशी मुद्रा भंडार पर भी बढ़ सकता है।
ईरान-इजरायल की लड़ाई के बीच विदेशी संस्थागत निवेशकों ने इंडियन मार्केट्स में बिकवाली की। इधर, इस हफ्ते एक मजेदार बात सामने आई है। गोल्ड में करीब 1.5 फीसदी गिरावट आई है। डॉलर भी गिरा है। उधर, अमेरिकी स्टॉक मार्केट के प्रमुख सूचकांक नैस्डेक में करीब 3 फीसदी तेजी आई है। चीन के हांगकांग इंडेक्स में भी तेजी आई है। इससे ऐसा लगता है कि FIIs ने इंडिया में बिकवाली और चीन में खरीदारी फिर से शुरू कर दी है। एक बार फिर से निवेशकों की दिलचस्पी अमेरिकी स्टॉक मार्केट्स में बढ़ने लगी है।
यह भी पढ़ें: Stock Markets: जून सीरीज की मजबूत समाप्ति, कैसी रहेगी जुलाई सीरीज?
इनवेस्टर्स को क्या करना चाहिए?
अगर सीजफायर जारी रहता है तो इनवेस्टर्स दूसरी तिमाही के नतीजों के सीजन पर फोकस कर सकते हैं। अगर विदेशी निवेशक इंडिया में बिकवाली करते हैं तो भी घरेलू संस्थागत निवेशकों का सपोर्ट मार्केट को मिलता रहेगा। लेकिन म्यूचुअल फंडों में निवेश 14 महीनों के निचले स्तर पर आ जाने से घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) के सपोर्ट पर असर पड़ सकता है। ऐसे में मार्केट में शॉर्ट टर्म में उतारचढ़ाव की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। लेकिन, इंडिया की लॉन्ग टर्म ग्रोथ स्टोरी पर किसी तरह का असर नहीं पड़ा है। इसलिए इनवेस्टर्स मार्केट में गिरावट के मौके का इस्तेमाल खरीदारी के लिए कर सकते हैं। कई अच्छी कंपनियों के स्टॉक्स अच्छी वैल्यूएशन पर उपलब्ध हैं।
अनन्या रॉय
(रॉय क्रेडिटबुल कैपिटल की फाउंडर हैं। यहां व्यक्त विचार उनके निजी विचार हैं। इसका इस पब्लिकेशन से कोई संबंध नहीं है।)