लोकसभा चुनाव नतीजों वाले हफ्ते में मार्केट में किसने कमाएं सबसे ज्यादा पैसे?
लोकसभा चुनावों के नतीजों वालो हफ्ते में मार्केट में काफी ज्यादा उतारचढ़ाव दिखा। काग्रेस के पूर्व अध्यक्ष ने अचानक वॉल्यूम बढ़ने की जांच एक ससंदीय समिति से कराने की मांग की है
MoneyControl News
अपडेटेड Jun 18, 2024 पर 9:25 PM
एग्जिट पोल से एक दिन पहले यानी 31 मई को ट्रेडिंग वॉल्यूम काफी ज्यादा थी।
लोकसभा चुनावों के नतीजे वाले हफ्ते में मार्केट में नाटकीय उतारचढ़ाव देखने को मिला था। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने एग्जिट पोल नतीजों से पहले मार्केट में अचानक गतिविधियां बढ़ने की जांच एक संयुक्त संसदीय समिति से कराने की मांग की है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण के लोकसभा चुनावों के बाद मार्केट में तेजी के अनुमान जताने पर भी सवाल खड़े किए हैं। कॉमर्स मिनिस्टर पीयूष गोयल ने इन आरोपों को खारिज किया है।
गिरावट से रिटेल इनवेस्टर्स को फायदे की उम्मीद
गोयल ने कहा है कि रिटेल इनवेस्टर्स (Retail Investors) को 4 जून को मार्केट में आई गिरावट से फायदा हुआ, क्योंकि उन्होंने कीमतें गिरने पर खरीदारी की। दुनियाभर में स्टॉक्स मार्केट्स को समझना बहुत मुश्किल है। चुनावी नतीजे आने से पहले और बाद मार्केट में जो हुआ, आइए उसे समझने की कोशिश करते हैं।
एग्जिट पोल से एक दिन पहले यानी 31 मई को ट्रेडिंग वॉल्यूम काफी ज्यादा थी, तब कौन खरीदारी कर रहा था?
31 मई को ट्रेडिंग वॉल्यूम ज्यादा था। यह एक पहले के औसत का दोगुना था। लेकिन, इलेक्शंस नतीजों पर ट्रेडर्स की बेटिंग इसकी अकेली वजह नहीं थी। सबसे बड़ी वजह MSCI इंडेक्स में बदलाव थी। एमएससीआई इंडेक्स पैसिव फंडों के लिए बेंचमार्क है। उस दिन करीब 2 अरब डॉलर का पैसिव निवेश मार्केट में आया। हेज फंड इस बदलाव से पहले फटाफट मुनाफा कमाने के लिए शेयर खरीद और बेच रहे थे।
एग्जिट पोल के नतीजों से पहले निवेशकों की पॉजिशन कैसी थी?
रिटेल निवेशकों ने 1,770 करोड़ रुपये मूल्य के शेयर बेचे थे। FPI ने 1,540 करोड़ रुपये की शुद्ध खरीदारी की थी। लेकिन, असल एक्शन डेरिवेटिव मार्केट में था। उन्होंने इंडेक्स फ्यूचर्स में शॉर्ट-सेलिंग की थी। उन्हें BJP का प्रदर्शन उम्मीद से कम रहने की उम्मीद थी। लेकिन, रिटेल इनवेस्टर्स ने अपनी बुलिश पॉजिशन बनाए रखी। वे बीजेपी की दमदार जीत पर दांव लगा रहे थे।
निवेशकों ने 3 जून को एग्जिट पोल के नतीजों पर कैसी प्रतिक्रिया जताई?
3 जून को विदेशी निवेशक और लोकल इंस्टीट्यूशंस दोनों ने खरीदारी की। रिटेल इनवेस्टर्स ने भी इस मौके का इस्तेमाल मुनाफा कमाने के लिए किया। उन्होंने शेयरों की ऊंची कीमतों से अच्छा मुनाफा कमाया होगा।
क्या उस दिन शेयर रखने वाले हर निवेशक ने मुनाफा कमाया?
ऐसा नहीं है। करीब 2,375 शेयरों की कीमतें चढ़ीं, जबकि 1,565 शेयरों में गिरावट देखने को मिली। इसका मतलब है कि चढ़ने वाले हर 3 शेयरों पर गिरने वाले शेयरों की संख्या 2 थी।
डेरिवेटिव मार्केट में क्या हुआ था?
विदेशी निवेशकों ने जल्द इंडेक्स फ्यूचर में अपने शॉर्ट पॉजिशन काटे। जब मार्केट आपके खिलाफ हो जाता है तो लॉस मेकिंग के ज्यादा पॉजिशन पर आगे स्थिति और खराब होने पर आपको मार्जिन बढ़ाने की जरूरत पड़ जाती है। फॉरेन इनवेस्टर्स ने अपनी नेट शॉर्ट पॉजिशन करीब 38 फसदी तक घटा दिया। एफआईआई के भी शॉर्ट पाजिशन के सौदे को स्केवयर ऑफ करने से मार्केट में और तेजी आई। इस बीच रियल एस्टेट ने अपनी लॉन्ग पॉजिशन 39 फीसदी तक बढ़ा दी।
इंडिविजुअल स्टॉक फ्यूचर्स में क्या पॉजिशन थी?
इंडिजुअल स्टॉक्स में फॉरेन इनवेस्टर्स और रिटेल इनवेस्टर्स दोनों लॉन्ग थे। घरेलू म्यूचुअल फंड्स बेच रहे थे। आम तौर पर घरेलू म्यूचुअल फंड आर्टिट्राज ट्रेड करते हैं। कीमतों में अंतर का फायदा उठाने के लिए वे एक साथ लॉन्ग और शॉर्ट पॉजिशन बनाते हैं। इसलिए उनकी पॉजिशन को मार्केट में बेयरिश कॉल की तरह नहीं देखन चाहिए।
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क्या आप बता सकते हैं सबसे ज्यादा पैसे किसने बनाए?
नहीं, लोकल मार्केट्स में कनेक्टेड प्लेयर्स हो सकते हैं। सिर्फ रेगुलेटर्स जिसके पास अकाउंट वाइज ट्राजेक्शन की जानकारी है वह बता सकते है कि कि स तरह से मुनाफा हुआ और यह पैसा किस तरह से समय-समय पर देश से बाहर गया।