Jyotivardhan Jaipuria's Stock Picks : आज मार्केट फंडामेंटल पर चर्चा के लिए सीएनबीसी-आवाज़ के साथ रहे वैलेंटिस एडवाइजर्स (Valentis Advisors) के फाउंडर और MD ज्योतिवर्धन जयपुरिया। ज्योतिवर्धन जयपुरिया के पास बाजार का 37 साल का अनुभव है। ये देश के टॉप स्ट्रैटेजिस्ट में गिने जाते हैं। ये 21 साल तक DSP Merrill Lynch से जुड़े रहे और DSP Merrill Lynch की रिसर्च टीम को लीड किया। इन्होंने 8 साल तक ICICI के साथ भी काम किया है। ज्योतिवर्धन जी ने IIM अहमदाबाद से MBA की डिग्री हासिल की है।
बाजार का वैल्यूएशन काफी महंगा
बाजार पर बात करते हुए ज्योति जी ने कहा कि बाजार का वैल्यूएशन इसके ऐतिहासिक एवरेज से महंगा है। इस समय बाजार 20-21 गुना पर ट्रेड कर रहा है। अगर सिर्फ इमर्जिंग मार्केट से तुलाना करें तो हमारा वैल्यूएशन करीब 80 फीसदी महंगा है। ऐसे में एफआईआई को लॉन्ग टर्म इंडिया तो अच्छा लग रहा है। लेकिन वे शॉर्ट टर्म में पैसे बनाने के लिए दूसरे सस्ते बाजारों की तरफ रुख कर रहे हैं।
इसके अलावा अमेरिका में नई सरकार के आने के बाद उभरते बाजारों से थोड़ा पैसा निकलकर विकसित बाजारों खास कर अमेरिका की तरफ भी जाने लगा है। इससे भी हमारे बाजार पर दबाव आया है।
पेंट सेक्टर में प्रतिस्पर्धा बढ़ी
एशियन पेंट के नतीजों पर बात करते हुए ज्योति जी ने कहा कि पेंट सेक्टर में दो बड़े प्लेयर और आ गए हैं जिससे प्रतिस्पर्धा बढ़ गई है। इसके चलते एशियन पेंट के मार्जिन में गिरावट आई है। इससे अलावा देश में इस समय कंज्यूमर डिमांड में नरमी है। डिमांड बढ़ नहीं रही है। इसका असर खपत से जुड़ी कंपनियों पर देखने को मिल रहा है। जब कभी भी वैल्यूशन ज्यादा रहने पर कंपनी के नतीजे खराब रहते हैं तो शेयर की पिटाई कुछ ज्यादा ही हो जाती है। वही एशियन पेंट्स में देखने को मिला है।
रुपए की कमजोरी और डिमांड पिक अप से आईटी को फायदा
आईटी शेयरों पर बात करते हुए ज्योतिवर्धन जयपुरिया ने कहा कि आईटी के लिए अच्छी बात ये है कि डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर हो रहा है। डॉलर के मुकाबले रुपए में नरमी शॉर्ट टर्म में आईटी के लिए अच्छाृी रहती है। हालांकि लॉन्ग टर्म में इससे कोई खास फर्क नहीं पड़ता। इसके आलावा आईटी के लिए डिमांड भी ठीक है। हालांकि ट्रंप के आने के बाद आमेरिका में एच-1 बी वीज़ा को लेकर होने वाले बदलाव को लेकर चिंता है।
कैपिटल गुड्स पर बात करते हुए ज्योतिवर्धन ने कहा कि पिछले 6 महीनों में इंफ्रा डेवलपमेंट पर होने वाला सरकारी खर्च घटा है। ऐसे में बाकी बचे साल के 6 महीनों के लिए सरकार के पास खर्च करने के लिए काफी पैसे है। आगे हर महीने करीब 1 लाख करोड़ रुपये का सरकारी कैपेक्स देखने को मिल सकता है। ऐसे में आगे हमें कैपिटल एक्सपेंडीचर और डिमांड में पिकअप देखने को मिल सकता है। इसके बावजूद यह कहना होगा कि कैपिटल गुड्स के वैल्युएशन काफी महंगे हैं। यहां पर काफी केयर फुल रहना चाहिए। अभी तक प्राइवेट कैपेक्स काफी सुस्त रहा है। ऐसे में कैपिटल गुड्स के उन्ही क्वालिटी शेयरों पर दांव लगाना चाहिए जिनके वैल्यूशन अच्छे हैं।
डिफेंस, रेलवे और पीएसयू शेयरों पर बात करते हुए ज्योति ने कहा कि ये शेयर बहुत महंगे हो गए हैं। इस समय इनमें निवेश की सलाह नहीं होगी। किसी करेक्शन में सस्ता होने को बाद ही इनमें निवेश करें। केमिकल शेयरों पर बात करते हुए ज्योति ने कहा कि ये सेक्टर काफी बड़ा है। इस सेक्टर में कुछ शेयरों के वैल्यूएशन अच्छे लग रहें हैं। जिन शेयरों के वैल्यूएशन सस्ते है और जिनकी अर्निंग विजिबिलिटी ज्यादा है उन शेयरों में खरीदारी की जा सकती है।
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