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Bhushan Power Case: भूषण पावर मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला IBC के लिए बड़ा झटका, जानिए इसकी वजह

जेएसडब्ल्यू स्टील ने इनसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (आईबीसी) के तहत 2019 में भूषण पावर एंड स्टील (बीपीसीएल) का अधिग्रहण किया था। सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस बेला त्रिवेदी और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा के आदेश से न सिर्फ यह डील रद्द हो गई है बल्कि इनसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (IBC) के प्रोसेस पर भी सवाल खड़े हो गए हैं

Edited By: Rakesh Ranjanअपडेटेड May 05, 2025 पर 2:05 PM
Bhushan Power Case: भूषण पावर मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला IBC के लिए बड़ा झटका, जानिए इसकी वजह
IBC 2016 में लागू हुआ था। कंपनियों के रिजॉल्यूशन प्रोसेस को आसान बनाने, कंपनी में फंसे बैंकों के पैसे की रिकवरी और मार्केट आधारित रिस्ट्रक्चरिंग को आसान बनाना इसका मकसद था।

भूषण पावर एंड स्टील (बीपीएसएल) के अधिग्रहण मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले से इंडिया में इनसॉलवेंसी के मौजूदा नियमों को बड़ा झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने हाल में दिए अपने फैसले में 19,000 करोड़ रुपये में बीपीएसएल के अधिग्रहण को खारिज कर दिया है। यह अधिग्रहण जेएसडब्ल्यू स्टील ने इनसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (आईबीसी) के तहत किया था। देश की सबसे बड़ी अदालत ने बीपीएसएल के लिक्विडेशन का भी आदेश दिया है।

IBC के प्रोसेस पर सवालिया निशान

सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस बेला त्रिवेदी और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा के आदेश से न सिर्फ यह डील रद्द हो गई है बल्कि इनसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (IBC) के प्रोसेस पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। इससे अदालत के लंबे हो रहे हाथ पर भी सवालिया निशान लग गए हैं। आइए इस पूरे मामले और इस मामले से में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के असर को समझते हैं।

IBC से जुड़े दूसरे मामलों पर भी असर

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