सूरत ट्रेडिंग स्कैम का दायरा बढ़ता दिख रहा है। पहले ऐसा लगा था कि यह स्कैम सिर्फ सूरत तक सीमित है। लेकिन, अब इसके तार कई राज्यों तक जुड़े होने की आशंका दिख रही है। इस स्कैम के शिकार कई लोग खुद अब सामने आ रहे हैं। यह स्कैम उन लोगों के लिए बड़ा सबक है, जो आंख मूंद कर इनवेस्टमेंट के मामले में किसी पर भरोसा कर लेते हैं। यह पूरा मामला क्या था, इसकी शुरुआत कैसे हुई, इनवेस्टर्स को किस तरह नुकसान हुआ? आइए इन सवालों के जवाब जानने की कोशिश करते हैं।
इस स्कैम की जड़ है ग्रीन वॉल एंटरप्राइजेज
यह पूरा स्कैम ग्रीन वॉल एंटरप्राइजेज से जुड़ा है। यह एक शेयर ट्रेडिंग फर्म है। इस फर्म के ओनर्स जयनाम ब्रोकिंग (Jainam Broking) के कथित एजेंट के रूप में काम करते थे। इस स्कैम का पता तब चला जब 14 अगस्त को एक क्लाइंट का ट्रेडिंग अकाउंट अचानक डिसेबल हो गया। बाद में ग्रीन वॉल एंटरप्राइजेज के कई क्लाइंट्स ने ऐसी शिकायत की। इसके बाद क्लाइंट्स ने पुलिस में शिकायत की। पुलिस इस मामले की जांच कर रही है।
ग्रीन वॉल ने जयनाम के नाम और होर्डिंग्स का किया इस्तेमाल
क्लाइंट्स को शुरुआत में लगा कि ग्रीन वॉल एंटरप्राइजेज जयनाम ब्रोकिंग की ब्रांच है। इसकी वजह यह है कि ग्रीन वॉल ने जयनाम के नाम और होर्डिंग्स का इस्तेमाल किया था। पुलिस ने इसके एक मालिक हिरने जाधव को गिरफ्तार किया है, जबकि दूसरा निमित शाह फरार है। जयनाम ब्रोकिंग ने मनीकंट्रोल के ईमेल के जवाब में बताया है कि उसका ग्रीन वॉल एंटरप्राइजेज से कोई संबंध नहीं है। उसने अपने जवाब में कहा है, "ग्रीन वॉल हमारा एजेंट नहीं था। यह कंपनी किसी तरह से हमसे संबंधित नहीं है।"
इनवेस्टर्स को ऐसे बनाया गया इस स्कैम का शिकार
बताया जाता है कि ग्रीन वॉल इनवेस्टर्स को प्रॉपरायटरी ट्रेडिंग की सुविधा ऑफर करती थी। इनवेस्टर्स सिर्फ 5 लाख रुपये के डिपॉजिट पर 50 लाख रुपये तक की ट्रेडिंग कर सकते थे। कंपनी बाकी पैसे पर 6-18 फीसदी इंटरेस्ट लेती थी। ट्रेडिंग से मुनाफा कमाने वाले इनवेस्टर्स को यह डील अट्रैक्टिव लगती थी। इससे एक के बाद कई इनवेस्टर्स ग्रीन वॉल से जुड़ते चले गए। उन्होंने ट्रेडिंग लिमिट बढ़ाने के लिए ग्रीन वॉल के पास डिपॉजिट अमाउंट भी बढ़ाने लगे। अब ग्रीन वॉल के अचानक गायब हो जाने से उनके पैसे फंस गए है।
नोएडा की आईट्रेड एसोसिएट्स के फंसे 40 करोड़
बाजार के सूत्रों के मुताबिक, ग्रेटर नोएडा की फर्म iTrade Associates भी इस स्कैम का शिकार हुई है। यह फर्म दर्शन जोशी की है। आईट्रेड एसोसिएट्स ग्रीन वॉल के साथ मिलकर काम करती थी। बताया जाता है कि इस स्कैम में आईट्रेड एसोसिएट्स के करीब 40 करोड़ रुपये फंस गए हैं। हालांकि, मनीकंट्रोल इस अमाउंट की स्वतंत्र रूप से जांच नहीं कर पाया है। आईट्रेड एसोसिएट्स ने सूरत पुलिस से शिकायत की है। इसमें उसने 22.06 करोड़ रुपये फंसे होने का दावा किया है।
जयपुर, रांची और कोल्हापुर के इनवेस्टर्स के पैसे भी फंसे
सूत्रों का कहना है कि दर्शन जोशी (iTrade Associates) ने दिल्ली-एनसीआर, जयपुर, रांची, कोल्हापुर सहित कुछ और शहरों क्लाइंट्स बनाए थे। मनीकंट्रोल ने दर्शन जोशी से बात की तो उन्होंने कहा कि वह खुद इस स्कैम के शिकार हुए हैं। उन्होंने कहा, "मैं पूरी तरह उन लोगों के साथ हूं, जिसके पैसे इस स्कैम में फंसे हैं। मैं उन लोगों के साथ लगातार बातचीत कर रहा हूं। हम पैसे की रिकवरी के लिए कोशिश कर रहे हैं।"
एक इनवेस्टर्स की जिंदगीभर की कमाई डूबी
प्रॉपरायटरी ट्रेडिंग के इस स्कैम के एक दूसरे शिकार कृशन यादव ने मनीकंट्रोल को बताया कि उन्हें iTrade Associates की तरफ से F&O ट्रेडिंग के लिए ट्रेडिंग टर्मिनल उपलब्ध कराए गए थे। यह कंपनी ग्रीन वॉल की तरफ से मार्जिन मनी लेती थी। उन्होंने कहा कि शुरुआत में तो आईट्रेड एसोसिएट्स ने स्थिति संभालने की कोशिश की। उसने दूसरे स्रोतों से ट्रेडिंग लिमिट के इंतजाम किए। लेकिन, बाद में उसने भी मदद करनी बंद कर दी।
सूरत पुलिस की EoW कर रही मामले की जांच
उन्होंने कहा कि मैंने अपनी जिंदगी भर की कमाई दांव पर लगा दी। न सिर्फ मेरी पूंजी स्वाहा हो गई है बल्कि ट्रेडिंग से होने वाली इनकम का स्रोत भी बंद हो गया है। अभी इस मामले की जांच सूरत पुलिस की इकोनॉमिक ऑफेंसेज विंग (EoW) की तरफ से की जा रही है।