Suzlon Energy Case: सुजलॉन और उसके एग्जिक्यूटिव्स पर ₹29 करोड़ का जुर्माना, जानिए सेबी ने क्यों लिया एक्शन
Suzlon Energy Case: सुजलॉन एनर्जी पर सेबी ने 15.95 करोड़ रुपये और उसके शीर्ष अधिकारियों पर भी भारी जुर्माना लगाया है। OMS कारोबार से जुड़े एक पुराने सौदे में आखिर ऐसी क्या गड़बड़ी मिली कि मामला फॉरेंसिक ऑडिट और करोड़ों रुपये की पेनल्टी तक पहुंच गया? जानिए पूरी डिटेल।
सेबी ने सुजलॉन के कई सीनियर एग्जीक्यूटिव्स पर भी जुर्माना लगाया है।
Suzlon Energy Case: कैपिटल मार्केट रेगुलटर सेबी (SEBI) ने सुजलॉन एनर्जी और उसके कुछ वरिष्ठ अधिकारियों पर कुल 29 करोड़ रुपये से ज्यादा का जुर्माना लगाया है। यह कार्रवाई कंपनी के ऑपरेशन एंड मेंटेनेंस सर्विसेज (OMS) कारोबार के ट्रांसफर, वित्तीय खातों में कथित गड़बड़ियों और रिलेटेड पार्टी ट्रांजैक्शन से जुड़े मामले में की गई है। अकेले सुजलॉन एनर्जी पर 15.95 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया है।
किन अधिकारियों पर कितना जुर्माना लगा?
सेबी ने कंपनी के कई सीनियर एग्जीक्यूटिव्स पर भी जुर्माना लगाया है। विनोद आर. तांती पर 5.75 करोड़ रुपये, गिरीश आर. तांती पर 5.45 करोड़ रुपये, कीर्ति जे. वगाडिया पर 1.5 करोड़ रुपये और अमित अग्रवाल पर 30 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है। इन सभी को मिलाकर कुल जुर्माना 29 करोड़ रुपये से ज्यादा हो गया है।
कैसे शुरू हुई जांच?
इस मामले की शुरुआत 12 दिसंबर 2019 को मिली एक गुमनाम शिकायत से हुई थी। शुरुआती जांच के लिए मामला NSE को भेजा गया था। जांच के दौरान निवेश, लोन, एसेट इम्पेयरमेंट, रिलेटेड पार्टी ट्रांजैक्शन और सेबी के नियमों के संभावित उल्लंघन से जुड़े कई सवाल सामने आए।
इसके बाद सेबी ने FY15 से FY20 और FY21 की पहली तीन तिमाहियों तक की अवधि की विस्तृत जांच की। इस जांच में सारथ एंड एसोसिएट्स द्वारा किए गए फॉरेंसिक ऑडिट का भी सहारा लिया गया।
OMS कारोबार के सौदे पर उठे सवाल
सेबी की जांच का केंद्र 29 मार्च 2014 को हुआ एक बड़ा सौदा था। उस समय सुजलॉन एनर्जी ने अपना OMS कारोबार अपनी सहायक कंपनी Suzlon Global Services Ltd (SGSL) को 2,000 करोड़ रुपये में ट्रांसफर किया था। जबकि इस कारोबार की घोषित वैल्यू सिर्फ 77.08 करोड़ रुपये बताई गई थी।
इस सौदे के आधार पर कंपनी ने FY14 में 1,922.92 करोड़ रुपये का लाभ 'एक्सेप्शनल आइटम' के रूप में दर्ज किया था।
1,300 करोड़ रुपये के लेनदेन पर सवाल
सेबी के मुताबिक बिक्री रकम में से 1,300 करोड़ रुपये कंपनी को 90 दिनों के भीतर नहीं मिले थे। नियामक का कहना है कि मार्च 2017 में कुछ दिनों के दौरान यह रकम सुजलॉन एनर्जी और SGSL के बैंक खातों के बीच कई बार ट्रांसफर की गई। सेबी ने इसे सर्कुलर ट्रांजैक्शन बताया है, यानी पैसा अलग-अलग खातों के बीच घूमता रहा।
दो बार दिखाया गया मुनाफा
सेबी ने कहा कि OMS कारोबार ट्रांसफर होने के बाद SGSL की एसेट वैल्यू में बड़ा इजाफा हुआ। इससे पहले कंपनी की गतिविधियां सीमित थीं। बाद में FY16 में SGSL की हिस्सेदारी Suzlon Structures Ltd को 927.83 करोड़ रुपये में बेची गई। इस सौदे से 829.78 करोड़ रुपये का अतिरिक्त लाभ दर्ज किया गया।
सेबी का आरोप है कि OMS से जुड़े इन सौदों से हुए लाभ को अलग-अलग वित्तीय वर्षों में दो बार दर्ज किया गया।
कंपनी की वित्तीय स्थिति पर भी टिप्पणी
सेबी ने कहा कि अगर इन लेनदेन को अलग कर दिया जाए तो कंपनी की नेटवर्थ काफी कमजोर नजर आती।
नियामक ने FY15 में 6,026 करोड़ रुपये के इम्पेयरमेंट का भी जिक्र किया है। साथ ही इस दौरान कंपनी द्वारा किए गए इक्विटी इश्यू और रिस्ट्रक्चरिंग उपायों का भी उल्लेख किया गया है।
सेबी ने क्या कहा?
सेबी ने माना कि कंपनी ने सेबी एक्ट, PFUTP नियम, LODR नियम और लिस्टिंग एग्रीमेंट के कुछ प्रावधानों का उल्लंघन किया है।
नियामक ने SEBI Act और SCRA के तहत जुर्माना लगाया है। आदेश में यह भी कहा गया है कि 27 जून 2025 का एक पुराना आदेश रद्द कर दिया गया था, लेकिन उल्लंघनों की पुष्टि करते हुए अब नया जुर्माना लगाया गया है।
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