IndiGo Q4 Results: विमान कंपनी को 2536 करोड़ रुपये का भारी घाटा, इन दो फैक्टर का दिखा असर
IndiGo Q4 Results: इंडिगो को मार्च तिमाही में 2,536 करोड़ रुपये का घाटा हुआ है। फॉरेक्स नुकसान, महंगे ईंधन और बढ़ते खर्चों ने कंपनी की कमाई पर दबाव डाला। हालांकि रेवेन्यू और यात्री संख्या में बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
शुक्रवार को इंटरग्लोब एविएशन का शेयर 3.28% गिरकर 4,420 रुपये पर बंद हुआ।
IndiGo Q4 Results: देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो को चलाने वाली इंटरग्लोब एविएशन मार्च तिमाही में भारी घाटे में चली गई है। कंपनी ने चौथी तिमाही में 2,536.3 करोड़ रुपये का शुद्ध घाटा दर्ज किया। पिछले साल इसी तिमाही में उसे 3,067.5 करोड़ रुपये का मुनाफा हुआ था। इस बार घाटे के दो अहम कारण रहे- एकमुश्त खर्च और फॉरेक्स नुकसान।
कंपनी का प्रदर्शन बाजार की उम्मीदों से भी काफी कमजोर रहा। एनालिस्टों को 1,871 करोड़ रुपये के मुनाफे की उम्मीद थी, लेकिन नतीजे इसके उलट आए।
रेवेन्यू बढ़ा, लेकिन मुनाफा नहीं बचा
मार्च तिमाही में इंडिगो का रेवेन्यू 1.3% बढ़कर 22,438.4 करोड़ रुपये हो गया। पिछले साल इसी अवधि में यह 22,151.9 करोड़ रुपये था। हालांकि आय बढ़ने के बावजूद कंपनी बढ़ती लागत और अन्य खर्चों की वजह से घाटे में चली गई।
ऑपरेटिंग प्रदर्शन में बड़ी गिरावट
तिमाही के दौरान इंडिगो का EBITDAR 67.9% गिरकर 2,227.8 करोड़ रुपये रह गया। एक साल पहले यह 6,948.2 करोड़ रुपये था। वहीं EBITDAR मार्जिन 31.4% से घटकर सिर्फ 9.9% रह गया। इससे साफ है कि कंपनी के ऑपरेशनल प्रॉफिट पर बड़ा दबाव पड़ा है।
फॉरेक्स नुकसान बना सबसे बड़ा कारण
इंडिगो के कमजोर नतीजों की सबसे बड़ी वजह विदेशी मुद्रा एक्सचेंज रेट में उतार-चढ़ाव रहा। मार्च तिमाही में इंडिगो को 4,823 करोड़ रुपये का फॉरेक्स नुकसान हुआ। इसके मुकाबले पिछले साल इसी अवधि में कंपनी को 136.6 करोड़ रुपये का फॉरेक्स फायदा हुआ था।
इसके अलावा कंपनी ने करीब 250 करोड़ रुपये के एकमुश्त खर्च भी दर्ज किए। ये खर्च मुख्य रूप से नए श्रम कानूनों को लागू करने से जुड़े थे।
ईंधन और अन्य खर्च बढ़े
तिमाही के दौरान कंपनी का ईंधन खर्च 6,650 करोड़ रुपये रहा। वहीं कुल खर्च बढ़कर 25,932.5 करोड़ रुपये पहुंच गया, जो पिछले साल 19,928.1 करोड़ रुपये था। मेंटेनेंस, कर्मचारियों पर खर्च और फाइनेंस लागत में बढ़ोतरी ने भी कंपनी की कमाई पर असर डाला।
यात्रियों की संख्या बढ़ी
कमजोर नतीजों के बावजूद परिचालन स्तर पर कंपनी का प्रदर्शन बेहतर रहा। तिमाही के दौरान इंडिगो की क्षमता (ASK) 3.4% बढ़कर 43.6 अरब उपलब्ध सीट किलोमीटर हो गई। वहीं यात्रियों की संख्या 1.1% बढ़कर 3.16 करोड़ पहुंच गई।
पूरे साल भी घाटे में रही कंपनी
वित्त वर्ष 2025-26 में इंडिगो का ऑपरेशनल रेवेन्यू बढ़कर 84,961.9 करोड़ रुपये हो गया। यह पिछले साल 80,802.9 करोड़ रुपये था। इसके बावजूद इंडिगो को पूरे साल में 2,393.6 करोड़ रुपये का शुद्ध घाटा हुआ। FY25 में कंपनी ने 7,258.4 करोड़ रुपये का मुनाफा कमाया था।
एकमुश्त खर्चों ने बढ़ाई परेशानी
FY26 के दौरान कंपनी ने 1,796.4 करोड़ रुपये के एकमुश्त खर्च दर्ज किए। इनमें नए श्रम कानून लागू करने की लागत, दिसंबर 2025 में ऑपरेशनल दिक्कतों के कारण उड़ान रद्द होने से जुड़ा खर्च, यात्रियों को मिला मुआवजा और DGCA का जुर्माना शामिल है।
वित्त वर्ष 2026 के अंत तक इंडिगो के पास 441 विमानों का बेड़ा और 51,651 करोड़ रुपये की नकदी मौजूद थी। कंपनी को उम्मीद है कि FY27 की पहली तिमाही में उसकी क्षमता 3% से 4% तक बढ़ सकती है।
मैनेजमेंट ने क्या कहा?
इंडिगो के मैनेजिंग डायरेक्टर राहुल भाटिया ने कहा कि FY26 एयरलाइन इंडस्ट्री के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण रहा। इसका सीधा असर कंपनी की लाभप्रदता पर पड़ा। हालांकि उनका कहना है कि कंपनी का मूल कारोबार अब भी मजबूत है। पूरे साल के दौरान क्षमता 9.5% बढ़ी और कुल आय में 6% से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई।
राहुल भाटिया के मुताबिक, अगर फॉरेक्स नुकसान और एकमुश्त खर्चों को अलग कर दिया जाए तो कंपनी ने FY26 में 7,502.5 करोड़ रुपये का मुनाफा कमाया होता।
शेयर पर क्या रहा असर?
नतीजों से पहले शुक्रवार को इंटरग्लोब एविएशन का शेयर 3.28% गिरकर 4,420 रुपये पर बंद हुआ। पिछले छह महीनों में शेयर करीब 24% टूट चुका है। इस साल अब तक इसमें लगभग 14% की गिरावट दर्ज की गई है।
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