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Suzlon Energy Share Price: SEBI के ₹29 करोड़ के जुर्माने ने बढ़ाई निवेशकों की टेंशन, शेयर 5% तक लुढ़का

Suzlon Energy Share Price: कंपनी ने निवेशकों को भरोसा दिलाया है कि उसकी फाइनेंशियल, ऑपरेशनल या दूसरी एक्टिविटीज पर जुर्माने के आदेश का कोई असर नहीं पड़ेगा। लेकिन फिर भी शेयर के लिए सेंटिमेंट बिगड़ा है

Edited By: Ritika Singhअपडेटेड Jun 01, 2026 पर 1:26 PM
Suzlon Energy Share Price: SEBI के ₹29 करोड़ के जुर्माने ने बढ़ाई निवेशकों की टेंशन, शेयर 5% तक लुढ़का
Suzlon Energy ने कहा है कि वह जुर्माने के खिलाफ SAT में अपील करेगी।

रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर की कंपनी सुजलॉन एनर्जी के शेयरों में 1 जून को दिन में लगभग 5 प्रतिशत तक की गिरावट दिखी। बीएसई पर शेयर 54.40 रुपये के लो तक गया। गिरावट की अहम वजह है- SEBI की ओर से लगाया गया 29 करोड़ रुपये का जुर्माना। कैपिटल मार्केट रेगुलेटर SEBI ने सुजलॉन एनर्जी लिमिटेड, उसके 2 प्रमोटर्स और 2 पूर्व चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर्स (CFO) पर 28.95 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है। कंपनी के ऑपरेशंस एंड मेंटेनेंस सर्विसेज (OMS) कारोबार के ट्रांसफर, फाइनेंशियल स्टेटमेंट्स में कथित गड़बड़ियों और रिलेटेड पार्टी ट्रांजेक्शन से जुड़े मामले में यह कार्रवाई की गई है।

कंपनी ने कहा है कि वह आदेश के खिलाफ सिक्योरिटीज अपीलेट ट्राइब्यूनल (SAT) में अपील करेगी। साथ ही निवेशकों को यह भरोसा दिलाया है कि उसकी फाइनेंशियल, ऑपरेशनल या दूसरी एक्टिविटीज पर इस आदेश का कोई असर नहीं पड़ेगा। लेकिन फिर भी शेयर के लिए सेंटिमेंट बिगड़ा है। SEBI ने सुजलॉन एनर्जी लिमिटेड पर 15.95 करोड़ रुपये, विनोद आर तांती पर 5.75 करोड़ रुपये और गिरीश आर तांती पर 5.45 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है। पूर्व CFOs कीर्ति जे वागड़ी और अमित अग्रवाल पर 1.5 करोड़ रुपये और 30 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है।

SEBI ने 27 जून, 2025 को दिए गए एक आदेश को रद्द करते हुए 29 मई, 2026 को इस लगभग 29 करोड़ रुपये के जुर्माने का आदेश पास किया। इससे पहले दिए गए फैसले में सुजलॉन एनर्जी और उसके प्रमोटर्स-डायरेक्टर्स विनोद आर तांती, गिरीश आर तांती और पूर्व CFOs- कीर्ति जे. वागड़ी व अमित अग्रवाल को बिना कोई जुर्माना लगाए दोषमुक्त कर दिया गया था। मामला वित्त वर्ष 2013-14 और वित्त वर्ष 2017-18 के बीच फाइनेंशियल स्टेटमेंट्स में गलत या भ्रामक जानकारी देने के आरोपों का था।

SEBI ने सितंबर 2025 में अपनी रिविजनरी शक्तियों के तहत एक कारण बताओ नोटिस जारी किया। इसमें कंपनी से पूछा गया कि 27 जून, 2025 को पास आदेश की जांच क्यों नहीं की जानी चाहिए। कंपनी ने नोटिस का जवाब दिया और आरोपों से इनकार किया। इसके बाद SEBI ने 29 मई 2026 को पुराने आदेश को रद्द करते हुए लगभग 29 करोड़ रुपये के जुर्माने का आदेश पास किया।

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