Swiggy Share Price : स्विगी (Swiggy) में विदेशी हिस्सेदारी पर कैपिंग से ब्रोकर्स भी शेयर पर बुलिश हो गए हैं। जेफरीज की बुलिश रिपोर्ट के बाद आज यह शेयर 3 फीसदी चढ़ा है। फिलहाल यह शेयर एनएसई पर 9.60 रुपए यानी 3.52 फीसदी की तेजी के साथ 382 रुपए के आसपास कारोबार कर रहा है। आज का इसका दिन का हाई 285.40 रुपए है। स्टॉक का 52 वीक हाई 474 रुपए और 52 वीक लो 235.75 रुपए है। पिछले 1 हफ्ते में यह शेयर 0.80 फीसदी भागा है। वहीं, 1महीने में इसने 4.25 फीसदी रिटर्न दिया है। जबकि, 1 साल में इसमें 33.02 फीसदी की गिरावट देखने को मिली है।
ग्लोबल ब्रोकरेज जेफरीज के बुलिश नजरिए के बाद इट्राडे में यह शेयर 5 फीसदी तक भागा है। जेफरीज ने इस स्टॉक के लिए 435 रुपए का टारगेट प्राइस दिया है, जिसका मतलब है कि बुधवार के क्लोजिंग लेवल से इसमें लगभग 60 फीसदी की बढ़त देखने को मिल सकती। NSE पर कंपनी के शेयर 4.78 प्रतिशत बढ़कर 285.40 रुपये के इंट्राडे हाई पर पहुंच गए। बाद में प्रॉफिट बुकिंग के कारण शेयर की बढ़त कुछ कम हुई।
जेफ़रीज द्वारा स्विगी (Swiggy)पर 435 रुपये के टारगेट प्राइस के साथ'बाय'कॉल शुरू करने के बाद शेयर में दो दिन से जारी गिरावट थम गई है। जेफरीज़ का कहना है कि शेयरहोल्डर्स द्वारा कुल विदेशी हिस्सेदारी पर 49.5 प्रतिशत की सीमा को मंज़ूरी देने के बाद,स्विगी के भारतीय मालिकाना हक और कंट्रोल वाली कंपनी (IOCC) बनने की दिशा में एक कदम और आगे बढ़ा है।
49.5 फीसदी विदेशी हिस्सेदारी सीमा को शेयरहोल्डर्स की मंजूरी से IOCC ट्रांजिशन का रास्ता साफ होने की उम्मीद है। नए स्ट्रक्चर से रेगुलेटरी रिस्क कम होने की उम्मीद है। नए विदेशी हिस्सेदारी फ्रेमवर्क से पैसिव आउटफ्लो संभव है। कंपनी ने कहा है कि यह कदम मैनेजमेंट के उस प्लान को सपोर्ट करोगा जिसके तहत इंस्टामार्ट को 'फर्स्ट-पार्टी इन्वेंट्री-बेस्ड मॉडल'में बदला जाएगा। इससे मार्जिन में लगभग 80 बेसिस पॉइंट्स की बढ़ोतरी हो सकती है।
जेफरीज़ का कहना है कि हालांकि ओनरशिप की सीमा रेगुलेटरी जोखिमों को कम करने में मदद कर सकती है,लेकिन विदेशी ओनरशिप का नया फ़्रेमवर्क लागू होने के बाद पैसिव आउटफ़्लो होने की संभावना है। ब्रोकरेज ने यह भी कहा कि इस प्रक्रिया में कुछ हफ़्ते लग सकते हैं।
स्विगी के IOCC स्टेटस की ओर बढ़ने से इंस्टामार्ट के लिए प्रति ऑर्डर लगभग 4-5 रुपये का अतिरिक्त कॉन्ट्रिब्यूशन मार्जिन मिल सकता है,क्योंकि क्विक-कॉमर्स बिजनेस को सीधे इन्वेंट्री ओनरशिप की ओर बढ़ने के लिए ज़्यादा फ़्लेक्सिबिलिटी मिलेगी।
बता दें कि 18 अगस्त को स्विगी के शेयरहोल्डर्स ने कुल विदेशी हिस्सेदारी पर 49.5 प्रतिशत की सीमा और कंपनी के गवर्नेंस स्ट्रक्चर में बदलाव को मंज़ूरी दे दी है। इससे कंपनी के IOCC (भारतीय मालिकाना हक और कंट्रोल वाली कंपनी) के तौर पर क्वालिफ़ाई करने की कोशिश में आ रही एक बड़ी बाधा दूर हो गई है।
एनालिस्ट्स का कहना है कि मार्जिन का फायदा मुख्य रूप से प्रोक्योरमेंट से मिलने की उम्मीद है,क्योंकि सीधे इन्वेंट्री के मालिक बनने से इंस्टामार्ट उस मुनाफ़े का बड़ा हिस्सा अपने पास रख पाएगी जो अभी बिचौलियों को जाता है।
इक्विरस सिक्योरिटीज के एनालिस्ट्स ने हाल ही में क्लाइंट्स के लिए जारी एक नोट में कहा है कि अगर स्विगी भारतीय मालिकाना हक और कंट्रोल वाली कंपनी बन जाती है तो इन्वेंट्री-बेस्ड मॉडल अपनाने से हर ऑर्डर पर 4-5 रुपये की अतिरिक्त कमाई हो सकती है।
हालांकि,यूनिट-इकोनॉमिक्स के स्तर पर यह फायदा भले ही बड़ा लगता हो,लेकिन अकेले इसके दम पर इंस्टामार्ट के मुनाफे में किसी बड़े इजाफे की संभावना कम ही है।
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