Tata Power धड़ाम, ₹4700 करोड़ के झटके पर 4% टूटा शेयर, 9 प्वाइंट में समझें मामला

Tata Power Shares: करीब 4700 करोड़ के झटके पर टाटा पावर के शेयर 4% से अधिक टूट गया। सिंगापुर की एक अदालत ने टाटा पावर की याचिका खारिज कर दी और $49 करोड़ (करीब ₹4,700 करोड़) के आर्बिट्रेशन अवॉर्ड को बरकरार रखा तो निवेशक सहम उठे। प्वाइंटवाइज समझें पूरा मामला जैसे कि कब शुरू हुआ और कैसे-कैसे आगे बढ़ा और अब आगे क्या है

अपडेटेड Aug 27, 2026 पर 1:25 PM
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टाटा पावर (Tata Power) का क्लेरोस कैपिटल (Kleros Capital) के साथ लंबे समय से कानूनी विवाद चल रहा है।

Tata Power Share Price: टाटा ग्रुप की पावर कंपनी टाटा पावर के शेयरों में आज बिकवाली का ऐसा दबाव दिखा कि यह 4% से अधिक फिसल गया। टूटकर यह 7 महीने के रिकॉर्ड निचले स्तर पर आ गया। इसके शेयरों को सिंगापुर इंटरनेशनल कमर्शियल कोर्ट में एक अपील खारिज होने से झटका लगा। कंपनी ने $49 करोड़ (करीब ₹4,700 करोड़) के आर्बिट्रेशन अवॉर्ड के खिलाफ एक याचिका दायर की थी। इसके खारिज होने पर निवेशकों को झटका लगा और शेयर टूट गए। फिलहाल बीएसई पर यह 4.15% की गिरावट के साथ ₹350.20 पर है। इंट्रा-डे में यह 4.69% फिसलकर ₹348.20 तक आ गया था और निफ्टी 500 का टॉप लूजर बन गया।

Tata Power को किस मामले में लगा है झटका

इस पूरे मामले की शुरुआत साल 2013 में हुई, जब क्लेरोस ने टाटा पावर के साथ मिलकर रूस में एक कोयला खदान के लिए मिलकर बोली लगाने का प्रस्ताव दिया था।


क्लेरोस का अनुमान था कि इसमें करीब $110 करोड़ृ का कोयला भंडार मौजूद है। सितंबर 2013 में दोनों कंपनियों ने एक NDA (नॉन-डिस्क्लोजर एग्रीमेंट) किया था और इसे चार साल तक प्रभावी रहना था।

साल 2015 में दोनों कंपनियों के बीच प्रस्तावित बोली की लीडरशिप और प्रोजेक्ट के मालिकाना ढांचे को लेकर मतभेद हो गए और आखिरकार 2016 में दोनों कंपनियों की साझेदारी खत्म हो गई।

क्लेरोस ने बाद में दिसंबर 2017 में रूस में हुई केंद्रीय नीलामी में हिस्सा नहीं लेने का फैसला किया था और इसके बाद रूस में अपना कारोबार भी बंद कर दिया। वहीं दूसरी तरफ टाटा पावर ने रूस में अपनी सब्सिडरी के जरिए उसी कोयला खदान के लिए बाद में बोली लगाई। यह बोली कंपनी ने तब लगाई, जब दोनों कंपनियों के बीच NDA का पीरियड समाप्त हो चुका था।

टाटा पावर को माइनिंग लाइसेंस मिल गया लेकिन जब कंपनी को लगा कि यह प्रोजेक्ट कमर्शियल तौर पर फायदेमंद नहीं है तो लाइसेंस वापस कर दिया।

इसके बाद साल 2020 में क्लेरोस ने टाटा पावर के खिलाफ आर्बिट्रेशन प्रोसिडिंग्स शुरू की। क्लेरोस ने आरोप लगाया कि टाटा पावर ने उसके साथ साझा की गई गोपनीय जानकारी का गलत इस्तेमाल किया और उसे प्रोजेक्ट से बाहर रखने के लिए गलत तरीके से काम किया।

ऑर्बिट्रेशन ट्रिब्यूनल ने क्लेरोस के पक्ष में फैसला सुनाया और टाटा पावर से करीब $49.0 करोड़ का हर्जाना देने को कहा।

साल 2025 में टाटा पावर ने इस आर्बिट्रेशन अवार्ड को सिंगापुर की अदालत में चुनौती दी। कंपनी ने हर्जाने की रकम और मेजारिटी डिसीजन की की वैधता, दोनों पर सवाल उठाए। हालांकि टाटा पावर को यहां भी झटका लगा।

अब टाटा पावर 28 दिनों के भीतर इस मामले में अपील करने की तैयारी कर रही है।

एक साल में कैसी रही शेयरों की चाल

टाटा पावर के शेयर 27 जनवरी 2026 को ₹342.35 के भाव पर थे जोकि इसके शेयरों के लिए एक साल का रिकॉर्ड निचला स्तर है। इस निचले स्तर से तीन महीने में यह 35.77% उछलकर 28 अप्रैल 2026 को ₹464.80 पर पहुंच गया जोकि इसके शेयरों के लिए एक साल का रिकॉर्ड हाई लेवल है।

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डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

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