Tata Sons AGM Update: टाटा ग्रुप की होल्डिंग कंपनी टाटा संस की एनुअल जनरल मीटिंग (AGM) का आयोजन आज होना है। हालांकि, कोरम यानी न्यूनतम सदस्यों की उपस्थिति पूरा न होने की आशंका के कारण इस अहम बैठक के स्थगित होने के आसार हैं।

Tata Sons AGM Update: टाटा ग्रुप की होल्डिंग कंपनी टाटा संस की एनुअल जनरल मीटिंग (AGM) का आयोजन आज होना है। हालांकि, कोरम यानी न्यूनतम सदस्यों की उपस्थिति पूरा न होने की आशंका के कारण इस अहम बैठक के स्थगित होने के आसार हैं।
सर रतन टाटा ट्रस्ट (SRTT) की ओर से संयुक्त प्रतिनिधि नामांकित न कर पाने की कानूनी अड़चन के चलते यह स्थिति पैदा हुई है। आइए जानते हैं क्या है पूरा मामला और क्यों टल सकती है यह ऐतिहासिक बैठक।
क्या है एजीएम की बैठक पर संकट? जानिए कोरम का नियम
टाटा संस के आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन (आर्टिकल 86) के मुताबिक, जनरल मीटिंग के लिए कम से कम 5 सदस्यों का व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होना अनिवार्य है। इन 5 सदस्यों की उपस्थिति में सर रतन टाटा ट्रस्ट (SRTT) और सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट (SDTT) द्वारा संयुक्त रूप से नामांकित एक प्रतिनिधि का होना बेहद जरूरी है, क्योंकि इन दोनों ट्रस्टों की टाटा संस में मिलकर 40% से अधिक (लगभग 51%) हिस्सेदारी है।
महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर के मई के आदेशों के कारण SRTT अपने ट्रस्टियों की बैठक आयोजित नहीं कर सका है। इस वजह से SDTT और SRTT मिलकर एजीएम के लिए अपना संयुक्त प्रतिनिधि तय नहीं कर पाए हैं।
चैरिटी कमिश्नर के पास क्या है विवाद?
यह विवाद महाराष्ट्र पब्लिक ट्रस्ट एक्ट के सेक्शन 30A (2) से जुड़ा हुआ है। कानून के मुताबिक किसी पब्लिक ट्रस्ट के बोर्ड में लाइफटाइम या परमानेंट ट्रस्टियों की संख्या 1/4 से अधिक नहीं हो सकती। सर रतन टाटा ट्रस्ट का तर्क है कि यह नियम नया है और इसे पुराने नियुक्त किए गए ट्रस्टियों पर लागू नहीं किया जा सकता। इसी की जांच चैरिटी कमिश्नर के पास लंबित है।
एजीएम टलने से किन बड़े फैसलों पर लगेगा ब्रेक?
अगर कोरम पूरा न होने के कारण आर्टिकल 87 के तहत एजीएम स्थगित होती है, तो कंपनी के कई महत्वपूर्ण एजेंडे अटक जाएंगे:
चेयरमैन के चयन और नए नेतृत्व पर क्या पड़ेगा असर?
12 अगस्त को एन चंद्रशेखरन ने ऐलान किया था कि वे टाटा संस के चेयरमैन के रूप में दूसरा कार्यकाल नहीं लेंगे। SDTT ने नए चेयरमैन की खोज के लिए चयन समिति बनाने का प्रस्ताव पास किया है, लेकिन SRTT की बैठक न हो पाने के कारण टाटा संस के स्तर पर सर्वसम्मति से नई चयन समिति का गठन जटिल हो गया है।
पिछले एक साल से टाटा ट्रस्ट्स के बोर्ड में लिस्टिंग, कैपिटल एलोकेशन (Air India, Tata Digital, Tata Electronics) और ट्रस्टी नियुक्तियों को लेकर मतभेद देखने को मिले हैं। इसी के चलते विजय सिंह और मेहली मिस्त्री जैसे कई प्रमुख ट्रस्टियों की विदाई या विवाद की स्थिति बनी है।
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