टाटा संस ने एन चंद्रशेखरन को तीसरा कार्यकाल देने का फैसला जून में होने वाली बोर्ड बैठक तक के लिए टाल दिया है। सूत्रों के हवाले से मिली खबरों के मुताबिक टाटा ट्रस्ट के चेयरमैन नोएल टाटा, एन चंद्रशेखरन के रि-अप्वाइंटमेंट के लिए कुछ शर्ते जोड़ना चाहते हैं। नोएल कुछ ग्रुप कंपनियों में नुकसान को लेकर चिंतित हैं। वोटिंग की जगह फैसला टालने पर चंद्रा भी सहमत थे।
टाटा ग्रुप: क्या हो रणनीति?
ऐसे में टाटा ग्रुप के शेयरों में अब क्या हो रणनीति इस पर बात करते हुए सीएनबीसी-आवाज़ के मैनेजिंग एडिटर अनुज सिंघल ने कहा कि एन चंद्रा ने टाटा ग्रुप को तब संभाला जब इसकी जरूरत थी। अगर मीडिया की खबरें सही हैं तो जो कल हुआ काफी दुर्भाग्यपूर्ण है। चंद्रा के नेतृत्व में टाटा ग्रुप का रेवेन्यू दोगुना और मुनाफा तीन गुना हुआ है। 9 साल पहले ग्रुप का मुनाफा 35,000 करोड़ रुपए था, जो पिछले साल 1 लाख करोड़ रुपए पर पहुंच गया।
किसी भी बड़े ग्रुप में 1-2 नुकसान करने वाली कंपनियां तो होंगी ही। 2017 में टाटा स्टील का घाटा 4,400 करोड़ रुपए था। अब 3,400 करोड़ रुपए का मुनाफा है। इंडियन होटल्स के 63 करोड़ रुपए के घाटे के सामने अब 1,900 करोड़ रुपए का मुनाफा है। लेकिन TCS की परफॉर्मेंस काफी खराब हुई है। मगर ये समझिए कि TCS अकेला IT शेयर नहीं है जो गिर रहा है। अच्छी बात ये है कि अभी चंद्रा का समय 1 साल बचा है। उम्मीद है कि अगली बोर्ड मीटिंग में मामला ठीक हो जाएगा। अगर ऐसा नहीं हुआ तो टाटा ग्रुप में अनिश्चितता का रिस्क होगा।
बता दें कि टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा द्वारा टाटा संस की बोर्ड मीटिंग के दौरान चिंता जताए जाने के कारण टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन को फरवरी 2027 से शुरू होने वाले तीसरे टर्म के लिए फिर से अपॉइंट करने का प्रोसेस मंगलवार को आगे नहीं बढ़ पाया। सूत्रों के मुताबिक,चंद्रशेखरन के रिन्यूअल की शुरुआत करने का सवाल मंगलवार को बोर्ड में हुई चर्चा के दौरान उठा था, लेकिन टाटा के ग्रुप के कुछ नए बिज़नेस में नुकसान और कैपिटल डिप्लॉयमेंट की रफ़्तार पर चिंता जताने के बाद यह आगे नहीं बढ़ा। यह चर्चा ग्रुप के परफॉर्मेंस,कैपिटल एलोकेशन और गवर्नेंस के रिव्यू तक बढ़ गई और मामले को वोटिंग के लिए रखने के बजाय टाल दिया गया।
चंद्रशेखरन का मौजूदा टर्म फरवरी 2027 तक है। सूत्रों के मुताबिक चंद्रशेखरन भी इस बात पर सहमत थे कि टाटा संस और ट्रस्ट्स के बीच तालमेल की अहमियत को देखते हुए इस मामले को वोटिंग के लिए आगे बढ़ाने के बजाय टाल देना चाहिए।