SIP ने संभाल लिया भारतीय मार्केट, दो वजहों से शेयरों में आया ताबड़तोड़ निवेश, लेकिन जेपीमॉर्गन ने जारी किया यह अलर्ट

जियो-पॉलिटिकल अनिश्चितता और टैरिफ वार के बीच विदेशी निवेशकों की ताबड़तोड़ बिकवाली में पिछले दो वर्षों में घरेलू शेयर मार्केट में सुस्ती छा गई। हालांकि घरेलू निवेशकों को मार्केट को ढहने से बचाए रखा और एसआईपी (SIP) ने इसमें काफी बड़ी भूमिका निभाई। जेपीमॉर्गन का मानना है कि दो अहम वजहों से इक्विटी मार्केट को सपोर्ट मिल रहा लेकिन इस बात को लेकर अलर्ट भी किया

अपडेटेड Jun 28, 2026 पर 4:16 PM
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जेपी मॉर्गन ने अपनी इक्विटी स्ट्रैटेजी रिपोर्ट में कहा कि पॉलिसी और टैक्स से इक्विटी मार्केट को सपोर्ट मिल रहा है।

टैक्स और पॉलिसी में कई बदलाव ने भारतीय स्टॉक मार्केट में निवेश को अधिक आकर्षक बना दिया है। यह दावा जेपी मॉर्गन की एक रिपोर्ट में किया गया है। इस रिपोर्ट के मुताबिक पिछले दो वर्षों में शेयर बाजार से सुस्त रिटर्न के बावजूद इन बदलावों के चलते घरेलू शेयर मार्केट में निवेश की रफ्तार यानी इनफ्लो के लगातार मजबूत बने रहने की संभावना है। जेपीमॉर्गन के मुताबिक लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स, डेट म्यूचुअल फंड और इंश्योरेंस प्रोडक्ट्स पर टैक्स में हालिया बदलावों ने रिस्क-रिवॉर्ड रेश्यो को ऐसा बना दिया कि इक्विटी में निवेश अधिक आकर्षक हो गया।

पॉलिसी और टैक्स से इक्विटी मार्केट को मिल रहा सपोर्ट

जेपी मॉर्गन ने अपनी इक्विटी स्ट्रैटेजी रिपोर्ट में कहा कि पॉलिसी और टैक्स से इक्विटी मार्केट को सपोर्ट मिल रहा है। इक्विटी पर 12.5% ​​LTCG टैक्स लगता है, और इंडेक्सेशन हटाने, इंश्योरेंस पॉलिसी से मिलने वाले पैसे पर टैक्स और डेट म्यूचुअल फंड के लिए स्लैब-रेट टैक्स से इक्विटी की चमक बढ़ी। ब्रोकरेज फर्म का मानना ​​है कि इन स्ट्रक्चरल बदलाव और SIP के जरिए खुदरा निवेशकों की बढ़ती भागीदारी से इक्विटी मार्केट में घरेलू निवेश लगातार मजबूत बना रहेगा।


जेपीमॉर्गन का कहना है कि वित्त वर्ष 2025 और वित्त वर्ष 2026 के दौरान विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने भारतीय इक्विटी में अपना निवेश कम किया लेकिन फिर भी घरेलू निवेशक डटे रहे। इस दौरान बेंचमार्क इंडेक्स ने भले ही बहुत ज्यादा रिटर्न नहीं दिया, लेकिन रिटेल निवेशकों ने एसआईपी के जरिए निवेश जारी रखा। ब्रोकरेज फर्म के मुताबिक इससे बाजार में लॉन्ग टर्म बदलाव का संकेत मिल रहा है।

SIP से मिला सपोर्ट लेकिन इस बात को लेकर किया अलर्ट

जेपीमॉर्गन ने अपनी रिपोर्ट में एसआईपी के बढ़ते महत्व पर जोर दिया, जो इक्विटी म्यूचुअल फंड में निवेश आने का मुख्य जरिया बन गए हैं। जेपीमॉर्गन के मुताबिक हर महीने एसआईपी में निवेश का लगातार बढ़ना दिखाता है कि घरों की बचत का अधिकतर हिस्सा अब फाइनेंशियल एसेट्स में जा रहा है और आने वाले वर्षों में भी इस रुझान के बने रहने की उम्मीद है। हालांकि जेपीमॉर्गन ने चेतावनी दी है कि अगर लंबे समय तक एसआईपी में मासिक निवेश ₹25 हजार करोड़ से कम रहता है, तो निवेशकों के नजरिए पर दबाव पड़ सकता है।

एक और रिस्क रेगुलेटरी बदलावों से जुड़ा है। ब्रोकरेज फर्म के मुताबिक इन बदलावों से डेरिवेटिव्स ट्रेडिंग वॉल्यूम में 20% से अधिक की गिरावट आ सकती है और इसका असर मार्केट की एक्टिविटीज पर पड़ सकता है।

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