TCS में छंटनी का रियल एस्टेट पर भी पड़ेगा असर? जानिए क्या घरों के घट सकते हैं दाम

TCS Layoffs: टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) और कुछ दूसरी बड़ी आईटी कंपनियों में संभावित छंटनी की खबरों ने रियल एस्टेट सेक्टर में भी चिंता की लहर दौड़ा दी है। खासतौर से बेंगलुरु और हैदराबाद जैसे टेक-हब शहरों में। इन शहरों में लंबे समय से आईटी प्रोफेशनल्स की मजबूत मांग की वजह से प्रॉपर्टी मार्केट की मांग मजबूत बनी हुई है। ऐसे में यह चिंता उठने लगी है कि क्या आईटी सेक्टर में अब संभावित छंटनी का असल रियल एस्टेट सेक्टर की बिक्री पर भी पड़ सकता है?

अपडेटेड Jul 30, 2025 पर 9:11 AM
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TCS Layoffs: टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) ने करीब 12,000 कर्मचारियों की छंटनी करने की योजना का खुलासा किया है

TCS Layoffs: टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) और कुछ दूसरी बड़ी आईटी कंपनियों में संभावित छंटनी की खबरों ने रियल एस्टेट सेक्टर में भी चिंता की लहर दौड़ा दी है। खासतौर से बेंगलुरु और हैदराबाद जैसे टेक-हब शहरों में। इन शहरों में लंबे समय से आईटी प्रोफेशनल्स की मजबूत मांग की वजह से प्रॉपर्टी मार्केट की मांग मजबूत बनी हुई है। ऐसे में यह चिंता उठने लगी है कि क्या आईटी सेक्टर में अब संभावित छंटनी का असल रियल एस्टेट सेक्टर की बिक्री पर भी पड़ सकता है?

हालांकि इक्विरस कैपिटल के मैनेजिंग डायरेक्टर विजय अग्रवाल का मानना है कि इसका असर सीमित रहेगा। हमारे सहयोगी CNBCTV-18 के एक कार्यक्रम में अग्रवाल ने कहा कि ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs) में इन दिनों जोरदार हायरिंग देखने को मिल रही है। ऐसे में आईटी सेक्टर में जो भी छंटनी होगी उसका असर इन नई भर्तियों से बैंलेस हो जाएगा। उन्होंने कहा, "अगर TCS या दूसरी आईटी कंपनियां छंटनी करती भी हैं, तो GCCs उस प्रभाव को एडजस्ट कर सकते हैं।" हालांकि उन्होंने साथ में यह भी कहा कि इस स्थिति को पूरी तरह समझने में अभी दो से तीन तिमाहियों का समय लग सकता है।

बेंगलुरु को लग सकता है झटका

बेंगलुरु में घर खरीदने वालों में करीब 40% आईटी प्रोफेशनल्स शामिल होते हैं। ऐसे में अगर नौकरी जाने का डर बढ़ता है तो इसका असर वहां की हाउसिंग डिमांड पर जरूर पड़ेगा। हालांकि, अग्रवाल के अनुसार बड़े या लिस्टेड डेवलपर्स की बिक्री में फिलहाल कोई बड़ी गिरावट नहीं दिखी है। बेंगलुरु में औसतन फ्लैट की कीमतें 2 करोड़ रुपये के आसपास बनी हुई हैं और जब तक बड़े पैमाने पर छंटनी नहीं होती, तब तक रियल एस्टेट सेक्टर स्थिर बना रह सकता है।


हैदराबाद बन रहा है नया हॉटस्पॉट

विजय अग्रवाल ने यह भी बताया कि हैदराबाद अब GCCs के लिए एक आकर्षक बाजार बनकर उभर रहा है। उन्होंने कहा, "हैदराबाद किराए और मकान की लागत के हिसाब से बहुत कॉम्पिटिटीव है। कंपनियां अब लोकेशन डाइवर्सिफिकेशन के तहत बेंगलुरु और हैदराबाद के बीच विकल्प देख रही हैं।"

डेवलपर्स के लिए राहत की खबर

रियल एस्टेट डेवलपर्स जैसे लोढ़ा डेवेलपर्स, DLF, ओबेरॉय रियल्टी और प्रेस्टिज एस्टेट्स लगातार मजबूत प्री-सेल्स आंकड़े पेश कर रहे हैं। विजय अग्रवाल ने बताया कि अप्रैल-जून 2025 तिमाही में देखी गई मामूली गिरावट अस्थायी थी और इसके पीछे मुख्य वजह भूराजनीतिक अनिश्चितताओं थीं, न कि घरेलू मांग की कमजोरी।

ऑफिस स्पेस सेगमेंट में भी दिख रही है मजबूती

GCCs से सिर्फ रेजिडेंशियल मार्केट ही नहीं, बल्कि ऑफिस स्पेस की मांग को भी सपोर्ट मिल रहा है। अग्रवाल ने बताया, "आम तौर पर अगर आप देखें तो, कुल लीजिंग का लगभग 20 से 30% हिस्सा GCCs ही ले रहें है।" न्होंने कर्मचारियों की बढ़ती संख्या को प्रॉपर्टी मार्केट के लिए एक पॉजिटिव ट्रेंड बताया।

उन्होंने कहा कि इस बदलाव से प्रेस्टीज एस्टेट्स, ब्रिगेड एंटरप्राइजेज और शोभा जैसे 1 से 2 करोड़ रुपये के रेंज वाले फ्लैट्स पर ध्यान देने वाले डेवलपर्स को सबसे अधिक फायदा मिल सकता है। खासकर साउथ इंडिया के मार्केट में।

लोढ़ा डेवेलपर्स का भी पॉजिटिव नजरिया

लोढ़ा डेवेलपर्स के फाइनेंस एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर सुशील कुमार मोदी ने भी हाल ही में CNBC-TV18 को दिए इंटरव्यू में कहा कि बेंगलुरु जैसे शहरों में डिमांड अब भी मजबूत बनी हुई है। उन्होंने कहा, "इस इंडस्ट्री के कई सेगमेंट अब भी बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं।" मोदी ने इस तथ्य पर भी जोर दिया कि रियल एस्टेट ना केवल खुद एक बड़ा सेक्टर है बल्कि अपने साथ स्टील, सीमेंट, टाइल्स, केबल जैसी अन्य कई इंडस्ट्रीज को भी सहारा देता है।

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