भारतीय टेक्सटाइल और सीफूड कंपनियों के शेयरों में आज 21 अप्रैल को शानदार तेजी देखने को मिली। गोकलदास एक्सपोर्ट्स और वेल्सपन लिविंग के शेयर कारोबार के दौरान 5.5 प्रतिशत तक उछल गए। वहीं अवंति फीड्स और एपेक्स फ्रोजन फूड्स के के शेयर लगभग 2% की बढ़त के साथ कारोबार कर रहे थे। यह तेजी इस खबर के बाद आई कि अमेरिकी सरकार ने टैरिफ रिफंड की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
अमेरिका ने उन कंपनियों को राहत देने की प्रक्रिया शुरू की है, जिन्होंने पहले ऐसे टैरिफ का भुगतान किया था जिन्हें अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने असंवैधानिक करार दिया था। इन टैरिफ को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सत्ता संभालने के बाद लगाया थे।
इस फैसले के तहत कंपनियों को ब्याज सहित कुल 166 अरब डॉलर का रिफंड मिलना है। इसके लिए अमेरिकी कस्टम्स विभाग ने एक नया ऑनलाइन पोर्टल लॉन्च किया है, जहां कंपनियां आवेदन कर सकती हैं।
कस्टम्स विभाग के मुताबिक, आवेदन स्वीकृत होने के बाद 60 से 90 दिनों के भीतर रिफंड जारी किया जा सकता है। सरकार को उम्मीद है कि रिफंड को चरणों में किया जाएगा, यानी एक साथ नहीं बल्कि धीरे-धीरे। इसमें पहले हाल ही में दिए गए टैक्स को प्राथमिकता दी जाएगी। लेकिन कई तकनीकी कारणों और प्रक्रिया से जुड़ी दिक्कतों की वजह से कंपनियां के आवेदन में देरी भी हो सकती है।
यह रिफंड प्रक्रिया “कंसॉलिडेटेड एडमिनिस्ट्रेशन एंड प्रोसेसिंग ऑफ एंट्रीज (CAPE)” प्रोग्राम के तहत होगी। इसका उद्देश्य अलग-अलग एंट्री के बजाय एक साथ रिफंड प्रोसेस करना है, जिससे प्रक्रिया तेज और आसान हो सके। यह टैरिफ इंटरनेशनल इमर्जेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) के तहत लगाए गए थे, जिन्हें अब समाप्त कर दिया गया है।
सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने 6-3 के फैसले में कहा था कि ट्रंप प्रशासन ने पिछले अप्रैल में लगभग हर दूसरे देश के उत्पादों पर नए इंपोर्ट ड्यूटी तय करने में अमेरिकी संसद के अधिकारों का अतिक्रमण किया था। न्होंने अमेरिका के व्यापार घाटे को राष्ट्रीय आपात स्थिति बताकर 1977 के एक आपातकालीन कानून का इस्तेमाल किया था। कोर्ट ने इसे संवैधानिक सीमाओं से बाहर बताया।
सोमवार से शुरू होने वाली नई व्यवस्था के तहत जो कंपनियां ये टैक्स दे चुकी हैं, उन्हें सीधे पैसे वापस मिलेंगे। हालांकि इन कंपनियों के लिए यह जरूरी नहीं है कि वे यह पैसा अपने ग्राहकों को भी लौटाएं। इस खबर के बाद भारत की एक्सपोर्ट-आधारित कंपनियों के शेयरों में निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ी।
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