बाजार में 4-5 साल में 12-15% से ज्यादा रिटर्न की उम्मीद नहीं, पावर और रीन्यूएबल एनर्जी स्पेस में काफी दम
सुनील सिंघानियां का कहना है कि Q1 नतीजों से ज्यादा उम्मीदें नहीं थीं। निफ्टी अर्निंग्स में 5-6 फीसदी ग्रोथ की उम्मीद है। मार्केट में 12-14 फीसदी अर्निंग्स ग्रोथ जरूरी है। सितंबर तिमाही से नतीजों में सुधार संभव है। लिक्विडिटी का असर 3-6 महीने में दिखेगा
बाजार पर बात करते हुए सुनील सिंघानियां ने कहा कि बाजार में खास ट्रिगर नहीं दिख रहा है। बाजार दिशाहीन नजर आ रहा है
बाजार में लगातार दूसरे दिन भी दबाव देखने को मिल रहा है। निफ्टी 180 अंक से ज्यादा फिसलकर 24900 के नीचे दिख रहा है। HDFC बैंक, बजाज फिनसर्व, RIL और इंफोसिस ने दबाव बनाया है। हालांकि बैंक निफ्टी में निचले स्तरों से रिकवरी आई है। लेकिन मिडकैप-और स्माॉल कैप में कमजोरी देखने को मिल रही है। ऑटो, कैपिटल गुड्स और डिफेंस शेयरों में आज दबाव दिख रहा है। वहीं सरकारी बैंक और फार्मा में खरीदारी का मूड है। सरकारी बैंकों में केनरा बैंक, यूनियन बैंक और बैंक ऑफ इंडिया में रौनक है।
इस माहौल में आज मार्केट गुरु सुनील सिंघानिया ने सीएनबीसी-आवाज़ के मैनेजिंग एडिटर अनुज सिंघल से बातचीत में कहा कि दूसरी तिमाही से अर्निंग इंजन स्टार्ट होने की उम्मीद है। बैंकिंग-फाइनेंशियल, एग्रोकेमिकल और पावर सेक्टर में दम है। टेस्ला की एंट्री पर बात करते हुए सुनील सिंघानिया ने कहा कि भारतीय इकोनॉमी में मजबूत ग्रोथ देखने को मिल रही है। भारत एक बड़ा मार्केट है। ग्लोबल कंपनियां भारत को नजरअंदाज नहीं कर सकतीं। विकसित देशों को छोड़कर टेस्ला ज्यादा जगह मौजूद नहीं है। टेस्ला वहीं जा रही है, जहां उसे संभावना दिख रही है। वर्ल्ड क्लास कंपनियां अब भारत आना चाहती हैं। घरेलू मैन्युफैक्चरिंग से टेस्ला की कारें सस्ती होंगी। देश में कोस्टल रोड जैसी इंफ्रा की काफी जरूरत है।
आगे अर्बन डिस्क्रिशनरी कंजम्प्शन में सुधार संभव, ऑटो सेक्टर को मिलेगा बूस्ट
ऑटो सेक्टर से क्या उम्मीदें हैं? इसके जवाब में सुनील सिंघानियां ने कहा कि 2 साल से डिस्क्रिशनरी कंजम्प्शन पर दबाव दिख रहा है। सख्त पॉलिसी और महंगाई का कंजम्प्शन पर असर देखने को मिला है। हालांकि 6 महीने से लिक्विडिटी बढ़ी है। साथ ही ब्याज दरें 1 फीसदी घटी हैं। रूरल डिस्क्रिशनरी कंजम्प्शन में सुधार आया है। सुनील सिंघानिया ने आगे कहा कि 6 महीने में करीब 8 लाख करोड़ रुपए की लिक्विडिटी बढ़ी है। CRR कटौती से सितंबर-दिसंबर में 2.5 लाख करोड़ रुपए की लिक्विडिटी बढ़ेगी। रूरल डिस्क्रिशनरी कंजम्प्शन में सुधार दिख रहा है। मॉनसून के बाद अर्बन डिस्क्रिशनरी कंजम्प्शन में सुधार संभव है। इससे ऑटो सेक्टर को बूस्ट मिलेगा।
Q1 नतीजों से ज्यादा उम्मीदें नहीं, सितंबर तिमाही से नतीजों में सुधार संभव
सुनील सिंघानियां का कहना है कि Q1 नतीजों से ज्यादा उम्मीदें नहीं थीं। निफ्टी अर्निंग्स में 5-6 फीसदी ग्रोथ की उम्मीद है। मार्केट में 12-14 फीसदी अर्निंग्स ग्रोथ जरूरी है। सितंबर तिमाही से नतीजों में सुधार संभव है। लिक्विडिटी का असर 3-6 महीने में दिखेगा। मॉनसून जल्द शुरू हुआ है। कैपेक्स में देरी हुई है। टैरिफ की अनिश्चितता का कुछ सेक्टरों पर असर पड़ा है।
मौजूदा बाजार के रिस्क-रिवॉर्ड पर बात करते हुए सुनील सिंघानियां ने कहा कि भारतीय शेयर बाजार एक ग्रोथ मार्केट है। भविष्य के लिए लोग इक्विटी में निवेश करते हैं। भारत की ग्रोथ 6.5 से 7 फीसदी पर पहुंच सकती है। पहले 15-20 फीसदी अर्निग्स ग्रोथ की उम्मीद रहती थी। अब 10-12 फीसदी अर्निग्स ग्रोथ की उम्मीद रहती है। महंगाई में भी काफी कमी आई है। सुनील सिंघानिया की राय है कि अब मार्केट से रिटर्न की उम्मीद भी कम करनी होगी। मार्केट से लो डबल डिजिट से मिड टीन रिटर्न की उम्मीद रखें।
जोमैटो और स्विगी जैसे नए बिजनेस में बड़े मौके
ETERNAL को क्यों रिवॉर्ड कर रहा है बाजार? इसके जवाब में सुनील सिंघानियां ने कहा कि ETERNAL में उनका निवेश नहीं है। वे घाटे वाली कंपनियों में निवेश नहीं करते। जोमैटो और स्विगी जैसे नए बिजनेस में बड़े मौके हैं। क्विक कॉमर्स लाइफ का हिस्सा बन गया है। जब स्केल बढ़ेगा तब मुनाफा तेजी से बढ़ेगा। सुनील सिंघानिया की राय है कि जोमैटो और स्विगी में ग्रोथ के बड़े मौके हैं।
पावर और रीन्यूएबल एनर्जी स्पेस में काफी दम
सुनील सिंघानियां ने निवेश की अपनी पसंदीदा थीम पर बात करते हुए कहा कि उन्हें बैंकिंग-फाइनेंशियल, NBFCs थीम पसंद हैं। वेल्थ और एसेट मैनेजमेंट स्पेस भी बेहतर लग रहे हैं। घरेलू फार्मा और CDMO में भी निवेश के मौके हैं। एग्रो केमिकल और केमिकल थीम बेहतर लग रही है। कमोडिटी में स्टील और सीमेंट पसंद हैं। सुनील का कहना है कि दूसरी छमाही कैपेक्स से जुड़े सेक्टर के लिए अच्छी रहेगी। पावर और रीन्यूएबल एनर्जी स्पेस में काफी दम है।
IT सेक्टर में ग्रोथ नहीं
कब खत्म होंगी IT सेक्टर की चुनौती? इसका जबाव देते हुए सुनील सिंघानियां ने कहा कि IT सेक्टर में ग्रोथ नहीं दिख रही है। निवेश के लिए ग्रोथ और वैल्युएशन को साथ-साथ देखने की जरूरत है। ग्रोथ नहीं बढ़ी तो आगे वैल्युएशन पर दबाव बढ़ेगा। PE के लिहाज से कंपनियों की ग्रोथ होनी चाहिए।
ट्रेड डील को लेकर क्या रिस्क है? इस पर बात करते हुए सिंघानियां ने कहा कि ट्रेड डील में देरी से बाजार पर असर पड़ा है। बाजार को अनिश्चितता पसंद नहीं है। ट्रेड डील में देरी से इंपोर्ट पर भी असर पड़ा है। ट्रेड डील की तस्वीर जल्द साफ होनी चाहिए।
बाजार नजर आ रहा दिशाहीन, मिडकैप स्पेस में थोड़ी हलचल
बाजार पर बात करते हुए सुनील सिंघानियां ने कहा कि बाजार में खास ट्रिगर नहीं दिख रहा है। बाजार दिशाहीन नजर आ रहा है। मिडकैप स्पेस में थोड़ी हलचल है। बाजार में 4-5 साल में 12-15 फीसदी रिटर्न की उम्मीद रखनी चाहिए।
रियल्टी सेक्टर पर बात करते हुए सुनील सिंघानियां ने कहा कि रियल्टी सेक्टर में बिक्री अच्छी है। रियल्टी सेक्टर में प्राइसिंग के लिहाज से चुनौतियां हैं।
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