एसएंडपी बीएसई सेंसेक्स ने 22 जून, 2023 को 63601.71 अंक का ऑल टाइम हाई हिट किया। बाजार जानकार एक नए और उभरते भारत को लेकर आशावादी हैं। भारत को दुनिया में भर में हो रहे बदलाव और प्रौद्योगिकी और ऊर्जा में हो रहे घरेलू निवेश से फायदा मिलने की संभावना है। ऐसा माना जा रहा है कि भारत 2027 तक दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनकर उभर सकता है। भारत आगे जापान और जर्मनी को पीछे छोड़ सकता है। इसके अलावा 2030 तक भारत में दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा शेयर बाजार होने की उम्मीद है। भारत आने वाले सालों में एशियाई और ग्लोबल ग्रोथ अहम भूमिका निभाने के लिए तैयार है। अगले दशक में भारत में उसी तरह का परिवर्तनकारी विकास देखने को मिल सकता है जैसा 2006 के बाद चीन में देखने को मिला था।
हमारा मानना है कि भारत के इस परिवर्तनकारी विकास यात्रा में 6 सेक्टरों को सबसे ज्यादा फायदा होगा। निवेशकों की इन पर नजर रहनी चाहिए। आइए डालते हैं इन पर एक नजर।
मैन्यूफैक्चरिंग: भारत के ग्लोबल मैन्यूफैक्चरिंग हब बनने की उम्मीद है। कॉर्पोरेट टैक्स में कटौती, निवेश के मिल रहे प्रोत्साहन, मेक इन इंडिया जैसी सरकारी योजनाओं और बुनियादी ढांचे में हो रहे विकास के चलते भारत में कैपिटल गुड्स, फार्मास्यूटिकल्स, इंजीनियरिंग और दूसरे क्षेत्रों में ग्रोथ को बढ़ावा मिल रहा है। दुनिया के तमाम देशों की तरफ से अपनाई जा रही चाइना-प्लस-वन रणनीति से भी भारत के मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर को मदद मिलने की उम्मीद है। अनुमान है की 2031 तक भारत की जीडीपी में मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर की हिस्सेदारी 21 फीसदी तक हो जाएगी।
मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर में भी डिफेंस सबसे अच्छा नजर आ रहा है। दशकों तक डिफेंस सेक्टर की कंपनियों में भारत का निवेश काफी कम था। लेकिन अब जब सरकार ने इस सेक्टर को निजी निवेश के लिए खोल दिया है, तो इस सेक्टर में काफी ज्यादा अवसर दिख रहे हैं। उदाहरण के लिए, अमेरिका के साथ प्रस्तावित जेट इंजन सौदा हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) जैसे शेयरों को पंख लगा सकते हैं। एलएंडटी ने इस क्षेत्र में बड़ी प्रगति की है। इसके अलावा डीसीएक्स सिस्टम्स, एआईए इंजीनियरिंग जैसी कंपनियों ने भी इस सेक्टर में बड़ी प्रगति की है।
डिफेंस के लगभग हर हिस्से में रिलायंस इंडस्ट्रीज की पकड़ है। यह दशकों से एक दमदार स्टॉक रहा है। आगे भी इस स्टॉक में जोरदार ग्रोथ देखने को मिलेगी।
गैर जरूरी उभोक्ता खर्च (Discretionary spending):कुछ दशक पहले जो चीज़ विलासिता मानी जाती थी, वह वे अब जरूरत बनती नजर आ रही हैं। पहले लोग कभी-कभार ही बाहर खाना खाते थे, लेकिन अब यह कई परिवारों के लिए रोजाना का मामला बन गया है। कार और एयर कंडीशनर का मालिक होना अब आम बात है। कोविड के बाद घर से होने वाले काम में बढ़ोतरी के कारण युवा बड़े घर खरीदने को वरीयता दे रहे हैं। इस सब के कारण गैरजरूरी खर्च (discretionary spending) में बढ़त हुई है। इसके चलते इस सेक्टर के स्टॉक हाई पर हाई लगा रहे हैं।
भारतीय उपभोक्ताओं की खर्च योग्य आय में आगे और बढ़त होने की उम्मीद है। दशक के अंत तक देश की कुल खपत 2 ट्रिलियन डॉलर से बढ़कर 4.9 ट्रिलियन डॉलर होने की संभावना। इससे अपेरल, एसेसरीज, मौज-मस्ती, मनोरंजन और घरेलू सामान जैसे नान-ग्रोसरी खुदरा सेक्टर को सबसे ज्यादा फायदा होने की उम्मीद है। इस सेक्टर की कुछ अच्छी कंपनियां वोल्टास, डिक्सन टेक्नोलॉजीज, एम्बर एंटरप्राइजेज हैं। इन पर निवेशकों की नजर रहेगी।
ऑटोमोबाइल (Automobile):कार अब एक विलासिता की वस्तु नहीं है, बल्कि एक अनिवार्य जरूरत बन गई है। मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटेड जैसा ब्रांड अभी भी अपनी कीमत और कम ईंधन खपत के चलते बाजार में दबदबा रखता है। लेकिन नए भारत ने टाटा और महिंद्रा एंड महिंद्रा जैसे ब्रांडों को भी हाथो-हाथ लिया है। ऐसे में इनके शेयर अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं। साथ ही बजाज ऑटो और आयशर मोटर्स के शेयर भी अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं।
ट्रैवल एंड लेज़र
यह सेक्टर भी एक औसत भारतीय उपभोक्ता के बढ़ते गैरजरूरी खर्च से जुड़ा है। उड़ान जैसी योजनाओं, टियर 2 और 3 शहरों को कनेक्ट और वंदे भारत जैसी ट्रेनों पर सरकार के जोर से भारतीय मध्यम वर्ग को नए मौके मिल रहे हैं। इससे आगे आईआरसीटीसी, आईटीसी, इंडियन होटल्स, इंडिगो एयरलाइंस और यहां तक कि ईजमाईट्रिप (easemytrip) जैसी बुकिंग साइटों के शेयरों में तेजी आने की संभावना है।
बैंकिंग एंड फानेंशियल सर्विसेज
खर्च करने के लिए पैसे की जरूर होती है और जहां पैसा है, वहां बैंक और फाइनेंशियल सर्विसेज कंपनियां जरूर रहेंगी। नई अर्थव्यवस्था नए फिनटेक प्रोडक्ट भी लेकर आई है जो बैंकिंग को आसान बनाते हैं। आगे हमें सरकारी और निजी दोनों क्षेत्रों के बैंकों के साथ-साथ एनबीएफसी कंपनियों (एनबीएफसी) और फिनटेक फर्मों में अच्छी तेजी आने की उम्मीद है। ऐसे में निवेशकों को एक्सिस बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, केनरा बैंक, भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई), साथ ही बजाज फाइनेंस जैसी एनबीएफसी पर नजर रखनी चाहिए।
रिन्यूएबल एनर्जी
2030 तक भारत में 450 गीगावॉट रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता होने की उम्मीद है। जिसमें जल विद्युत, जैव ईंधन, सौर ऊर्जा (280 गीगावॉट) और पवन ऊर्जा (140 गीगावॉट) शामिल हैं। देश ने अपने रिन्यूएबल एनर्जी इंडस्ट्री को बढ़ाने में काफी प्रगति की है और इस इस क्षेत्र में अपने लक्ष्य को हासिल करने की ओर अग्रसर है। भारत में एनर्जी ट्रांसफॉर्मेशन और बढ़ती ऊर्जा खपत से निवेश और विकास के नए अवसर पैदा होंगे। जिससे रिलायंस इंडस्ट्रीज, एनटीपीसी, अदानी ट्रांसमिशन, अदानी ग्रीन एनर्जी, टाटा पावर, ओएनजीसी लिमिटेड और दूसरी कई कंपनियों को फायदा हो सकता है।
निवेशकों को क्या करना चाहिए?
कोई भी समझदार निवेशक भारत के तेजी से ग्रो करते सेक्टर्स में लंबे नजरिए से निवेश करना चाहेगा। लेकिन याद रखें कि हर बढ़ता हुआ उद्योग बढ़िया रिटर्न नहीं देता। जो बात आज उम्मीदभरी लग सकती है हो सकता है कल वह अच्छी न रह जाए। इसलिए हर तिमाही में अपने पोर्टफोलियो की समीक्षा करे और अपनी निवेश रणनीति को बेहतर बनाएं। हो सकता है किसी सेक्टर का विकास तो जारी रहे लेकिन उस सेक्टर किसी खास स्टॉक का प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक न हो। ऐसे में अपने पोर्टफोलियो में विविधता लाएं।
ऊंची महंगाई दर, बढ़ता जियो पोलिटिकल तनाव और केंद्रीय बैंकों द्वारा ग्रोथ को प्रोत्साहित करने के बजाय महंगाई से निपटने को प्राथमिकता देने सो कई देशों के लिए चुनौतियां पैदा हो गई हैं। इसके चलते कुछ देशों को मंदी के दबाव का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में हमें 2023 -2024 की चिंताओं से परे लंबे नजरिए से निवेश करने की जरुरत है।
अंतिम नोट: इस लेख में उल्लिखित स्टॉक केवल संदर्भ बिंदु के रूप में हैं। ये निवेश अनुशंसा नहीं हैं।
ऋषभ पारख एक चार्टर्ड अकाउंटेंट और एनआरपी कैपिटल्स के संस्थापक हैं।
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