स्टॉक मार्केट (Stock Markets) पर मंदड़ियों (Bears) ने अपनी गिरफ्त बढ़ा दी है। निफ्टी (Nifty) 16,000 के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे आ गया है। हफ्ते के दौरान निफ्टी में करीब 4 फीसदी गिरावट आई। प्रमुख सूचकांकों के साथ ही अलग-अलग सेक्टर के सूचकांकों पर भी दबाव दिख रहा है।
मौजूदा हालात में मार्केट एक्सपर्ट इनवेस्टर्स को सावधानी बरतने की सलाह दे रहे हैं। उनका कहना है कि इनवेस्टर्स को एक बार में पूरे पैसे का इनवेस्टमेंट करने से बचना चाहिए। इसकी वजह यह है कि मार्केट की दिशा होगी, इस बारे में पक्के तौर पर कुछ कहना मुश्किल है।
ब्रोकरेज फर्म IIFL में रिसर्च के वाइस प्रेसिडेंट अनुज गुप्ता ने कहा कि मार्केट दबाव में है। बीता हफ्ता पिछले साल में सबसे कमजोर हफ्ता रहा। दुनिया की प्रमुख छह करेंसी के बास्केट के मुकाबले डॉलर इंडेक्स लगातार चढ़ रहा है। यह 104 के स्तर पर पहुंच गया है। यह इंडिया सहित उभरते बाजारों के लिए अच्छा नहीं है।
इन पांच बातों का अगले हफ्ते मार्केट पर पड़ेगा असर:
डॉलर इंडेक्स 104 के लेवल पर पहुंच गया है। यह पिछले 50 साल में इस स्तर पर नहीं पहुंचा था। इसका असर इंडिया सहित उभरते बाजारों पर पड़ रहा है। फॉरेन इनवेस्टर्स उभरते बाजारों से पैसा निकाल अमेरिकी बाजार में लगा रहे हैं। अगले हफ्ते डॉलर इंडेक्स का रुख मार्केट पर असर डालेगा।
2. कमोडिटी की कीमतों में गिरावट
पिछले हफ्ते कमोडिटी की कीमतें में तेज गिरावट आई। इसका असर मेटल शेयरों पर पड़ा है। सेल, वेदांता और हिंडाल्को जैसी कंपनियों के शेयरों में गिरावट आई। अगर कमोडिटी की कीमतों में गिरावट जारी रहती है तो कमोडिटी कंपनियों के शेयरों पर दबाव बढ़ेगा।
3. डॉलर के मुकाबले रुपया का भाव
पिछले हफ्ते डॉलर के मुकाबले रुपया गिरकर रिकॉर्ड लो लेवल पर पहुंच गया था। दरअसल, फॉरेन फंडों की बिकवाली का असर रुपया पर पड़ रहा है। यह इंडियन इकोनॉमी के लिए अच्छी खबर नहीं है। इससे आयात करना महंगा हो जाएगा। अगर रुपये में गिरावट जारी रहती है तो इसका असर मार्केट पर पड़ेगा।
4. अमेरिकी रिटेल सेल्स डेटा
अगले हफ्ते अमेरिका में रिटेल सेल्स के डेटा आने वाले हैं। अगर सेल्स डेटा बेहतर रहते हैं तो इससे डॉलर को मजबूती मिलेगी। बेहतर सेल्स डेटा का मतलब यह होगा कि यूएस इकोनॉमी रिकवरी के रास्ते पर है।
5. कंपनियों के तिमाही नतीजे
अगले हफ्ते कई बड़ी कंपनियों के नतीजे आने वाले हैं। इनमें आईओसी, डीएलएफ, ल्यूपिन शामिल हैं। इनका सीधा असर स्टॉक मार्केट पर पड़ेगा। अब तक आए कंपनियों के नतीजे मिलेजुले रहे हैं।