एचडीएफसी सिक्योरिटीज में इंस्टीट्यूशनल रिसर्च हेड वरुण लोहचब ने देश की इकोनॉमी और बाजार से जुड़े मुद्दों पर मनीकंट्रोल से एक लंबी बातचीत की है। यहां हम आपके लिए इसी बातचीत का संक्षिप्त अंश दे रहे हैं। बताते चलें की वरुण लोहचब को इक्विटी और कैपिटल मार्केट का 18 साल का अनुभव ये। वरुण फिडिलिटी, फ्रैंकलिन टेम्पलटन और जेफ़रीज़ जैसी नामचीन कंपनियों के साथ काम कर चुके हैं। इनका मानना है कि निफ्टी इस कैलेंडर वर्ष में दायरे में घूमता रहेगा। बाजार से 2023 के अंत तक सिंगल-डिजिट रिटर्न की ही उम्मीद है।
लोहचब की राय है कि कैपिटल गुड्स, इंफ्रास्ट्रक्चर, पावर और सीमेंट सेक्टर को देश में विकास पर हो रहे निवेश का फायदा मिल रहा है। आने वाली तिमाहियों में इनका कारोबारी प्रदर्शन मजबूत रहने की उम्मीद है। लोहचब ने इस बातचीत में आगे कहा कि वित्त वर्ष 2023 की चौथी तिमाही के नतीजों के बाद एचडीएफसी सिक्योरिटीज ने बड़े बैंकों की लीडरशिप में अर्निंग में बढ़त नोटिस किया है। लेकिन बैंकिग शेयरों के अर्निंग में हुई बढ़त को इस अवधि में आईटी की अर्निंग में आई कमजोरी ने बेअसर कर दिया है। चौथी तिमाही में IT सेक्टर के लिए किसी मजबूत ग्रोथ ट्रिगर का अभाव दिखा है।
क्या आपको बाकी बचे कैलेंडर ईयर में इक्विटी बाजार में किसी बड़े उठापटक की उम्मीद है?
इसका जवाब देते हुए लोहचब ने कहा कि 2023 के अंत तक भारतीय बाजार से सिंगल-डिजिट रिटर्न की ही उम्मीद है। इस कैलेंडर वर्ष में निफ्टी रेंजबाउंड ही रहेगा। लेकिन बाजार में कुछ ऐसे सेक्टर हैं जो अर्निंग में मजबूती और अच्छे वैल्यूशन के चलते बेहतर रिटर्न देते नजर आएंगे। कैपिटल गुड्स, इंफ्रास्ट्रक्चर, पावर और सीमेंट सेक्टर को देश में विकास पर हो रहे निवेश का फायदा मिल रहा है। आने वाली तिमाहियों में इनका कारोबारी प्रदर्शन मजबूत रहने की उम्मीद है। इन सेक्टर्स के कुछ स्टॉक अब बॉटम पर नजर आ रहे हैं। यहां से अब इनमें तेजी आने की संभावना है। ये आगे अच्छी कमाई करा सकते हैं।
Q4FY23 नतीजों का मौसम मोटे तौर पर उम्मीद के मुताबिक
वित्त वर्ष 2023 की मार्च तिमाही के नतीजों और कंपनियों के मैनेजमेंट की कमेंट्री पर आपनी राय देते हुए वरुण लोहचब ने कहा कि Q4FY23 नतीजों का मौसम मोटे तौर पर उम्मीद के मुताबिक ही रहा है, लेकिन सेक्टर-विशेष अपवाद देखने को मिले हैं। बीएफएसआई स्पेस में अच्छी क्रेडिट ग्रोथ और नर्म क्रेडिट क्वालिटी का असर देखने को मिला है। कंपनियों के मैनेजमेंट ने डिपॉजिट पर प्रेशर बने रहने का संकेत दिया। बड़े बैंक भविष्य एसेट क्वालिटी से जुड़ी चुनौती से निपटने के लिए अपने रिजर्व में बढ़त कर रहे हैं।
आईटी सेक्टर की आय ग्रोथ और डील पाइपलाइन को लेकर कोई पॉजिटिव संकेत नहीं
कमोडिटी कंज्यूमर सेक्टर में कमोडिटी कीमतों में गिरावट के चलते ऑपरेटिंग मार्जिन में सुधार देखने को मिला है। आईटी सेक्टर की आय में ग्रोथ और डील पाइपलाइन में मजबूती को लेकर कोई पॉजिटिव संकेत नहीं दिखा है। हालांकि अधिकांश मैनेजमेंट कमेंट्री में ग्रामीण मांग में सुधार के शुरुआती संकेत मिलने की बात कही गई है। कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि आगे आने वाली कुछ तिमाहियों में बड़े बैंकों और बढ़ते कैपेक्स से लाभान्वित होने वाले सेक्टरों और कंपनियों की ही बोलबाला रहेगा।
मार्च तिमाही के नतीजों के बाद कौन से सेक्टर नजर आ रहे हैं अच्छे?
इस सवाल के जवाब में वरुण ने कहा कि सरकार देश में ग्रोथ को बढ़ाव देने के लिए उपभोग बढ़ाने की जगह निवेश बढ़ाने पर फोकस कर रही है। सरकार ने इस निवेश आधारित ग्रोथ अप्रोच को ध्यान रखते हुए हमें उन सेक्टरों में निवेश करना चाहिए जिनको आगे सरकारी और प्राइवेट कैपेक्स का फायदा मिलने की उम्मीद है। इनमें कैपिटल गुड्स, इंफ्रास्ट्रक्चर, पावर, सीमेंट और सेलेक्टेड फाइनेंशियल शेयर शामिल हैं। मध्यम अवधि के निवेश के नजरिए से बड़े बैंक अच्छे दिख रहे हैं। इसके अलावा, कुछ चुनिंदा फंडामेंटल रूप से मजबूत एनबीएफसी कंपनियों पर भी नजर रखने की सलाह होगी।
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