Titan Shares: वैश्विक ब्रोकरेज फर्म यूबीएस ने टाइटन कंपनी के शेयरों को खरीदने की सलाह दी है और टारगेट प्राइस ₹5300 पर फिक्स किया है। इस बुलिश रुझान के बावजूद आज शुरुआती कारोबार में इसके शेयर टूट गए लेकिन यूबीएस ने जिन पांच वजहों से इस पर दांव लगाया है, उसके हिसाब से इसमें गिरावट को गोल्डेन चांस के रूप में लिया जा सकता है। यूबीएस के मुताबिक स्टोर चेक्स से संकेत मिलता है कि ग्रोथ की रफ्तार मजबूत बनी हुई है लेकिन पश्चिमी एशिया में चल रही लड़ाई के चलते नियर टर्म में इंटरनेशनल ग्रोथ पर दबाव दिख सकता है। शेयरों की बात करें तो आज बीएसई पर यह 0.08% की गिरावट के साथ ₹4135.70 पर बंद हुआ है। इंट्रा-डे में यह 2.56% टूटकर ₹4033.40 तक आ गया था।
5 वजहों से Titan पर UBS ने लगाया दांव
यूबीएस का कहना है कि करीब दो वर्षों तक बड़े पैमाने पर फ्लैट रहने के बाद अक्टूबर से टाइटन करीब 22% चढ़ चुका है लेकिन अभी भी यह अपनी कंपाउंडिंग जर्नी के आधे रास्ते में ही है।
ब्रोकरेज फर्म का कहना है कि टाटइन का ऑपरेटिंग परफॉरमेंस और मार्जिन डिलीवरी लगातार उम्मीद से बेहतर है जिससे कंपनी को गोल्ड की कीमतों में तेज उठा-पटक और बढ़ते कॉम्पटीशन को लेकर चिंता नहीं करनी पड़ रही है।
यूबीएस के मुताबिक ज्वैलरी मार्केट अनऑर्गेनाइज्ड से ऑर्गेनाइज्ड मार्केट की तरफ शिफ्ट हो रहा है और इसका टाइटन को काफी फायदा मिल रहा है जिससे कुछ वर्षों तक इसके रेवेन्यू की ग्रोथ 15-20% रह सकती है।
ब्रोकरेज फर्म का कहना है कि टाइटन ने बेयॉन ब्रांड्स के तहत लैब-ग्रोन डायमंड फील्ड में एंट्री की है जिससे कंपनी को जड़े हुए गहनों में अपना कारोबार बढ़ाने की सहूलियत मिली है।
यूबीएस के मुताबिक जियोपॉलिटिकल स्थिति स्थिर होने पर टाइटन के इंटरनेशनल ज्वैलरी ब्रांड दमास से भी इसके कारोबार को तगड़ा सपोर्ट मिल सकता है।
एक साल में कैसी रही शेयरों की चाल?
टाइटन के शेयरों ने मार्केट की उठा-पटक के बीच निवेशकों के पोर्टफोलियो की चमक अच्छी-खासी बढ़ाई। पिछले साल 7 अप्रैल 2025 को बीएसई पर यह ₹2947.55 के भाव पर था जो इसके शेयरों के लिए एक साल का रिकॉर्ड निचला स्तर है। इस निचले स्तर से 10 ही महीने में यह 48.60% चढ़कर पिछले महीने 11 फरवरी 2026 को ₹4,379.95 के लेवल पर पहुंच गया जो इसके शेयरों के लिए रिकॉर्ड हाई लेवल है। कंपनी के शेयरहोल्डिंग पैटर्न की बात करें तो उपलब्ध आंकड़ों के हिसाब से इसमें प्रमोटर्स की 52.90% हिस्सेदारी है। वहीं पब्लिक शेयरहोल्डिंग में बात करें तो इसमें 54 म्यूचुअल फंड्स की 8.23% और 29 बीमा कंपनियों की 5.16% और विदेशी निवेशकों की 15.55% होल्डिंग है। वहीं खुदरा निवेशकों की बात करें तो ₹2 लाख तक के निवेश वाले 7,18,796 निवेशकों की इसमें 8.46% होल्डिंग है।
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