पिछले पांच दिनों की लगातार गिरावट के बाद बाजार को थोड़ी राहत की दरकार थी। निफ्टी करीब 700 अंक लुढ़क चुका था। हालांकि शुक्रवार को कोई खास तेजी नहीं आई, लेकिन अच्छी बात ये रही कि सूचकांक और नहीं गिरा बल्कि मामूली बढ़त के साथ बंद हुआ। हालांकि निफ्टी ने छह महीने में सबसे खराब हफ्ते से बचा लिया, लेकिन दो महीने में सबसे बड़ी साप्ताहिक गिरावट दर्ज की गई।
गौर करने वाली बात ये भी है कि निफ्टी किसी तरह साप्ताहिक आधार पर 22,000 के आंकड़े को छूने में कामयाब रहा है। फरवरी के बाद से यह पहली बार है कि यह हफ्ते में 22,000 से नीचे बंद नहीं हुआ। वहीं, दूसरी तरफ वॉल स्ट्रीट से मिलने वाले संकेत सकारात्मक हैं। डॉओ ने लगातार आठवें दिन बढ़त दर्ज की और 2024 का अपना बेस्ट हफ्ता पूरा किया। हालांकि, पिछले हफ्ते के दौरान भी कुछ ऐसा ही देखने को मिला था। लेकिन भारतीय शेयर बाजार अपनी ही चिंताओं से ग्रस्त है।
भारत का वोलैटिलिटी इंडेक्स भी 19 के लेवल के करीब पहुंच रहा है, जो आखिरी बार अक्टूबर 2022 में देखा गया था। यह इंडेक्स शुक्रवार को लगातार 12वें दिन बढ़कर 18.47 के स्तर पर बंद हुआ। विदेशी इंवेस्टर शुक्रवार को भी नकद बाजार में नेट सेलर बने रहे, जिससे उनकी साप्ताहिक बिकवाली 21,000 करोड़ रुपये या लगभग 2.3 बिलियन डॉलर से अधिक हो गई। हालांकि, डोमेस्टिक इंस्टीट्यूट शुद्ध खरीदार बने रहे।
कोटक सिक्योरिटीज के अमोल अथवाले को मौजूदा लेवल से अस्थायी रूप से ओवरसोल्ड परिस्थितियों के कारण पुलबैक रैली की उम्मीद है। उनका मानना है कि निफ्टी 22,200 के लेवल या 50-DMA के 22,300 तक जा सकता है। अमोल अथवाले को 21,950 से नीचे नए सिरे से बिकवाली की भी आशंका है, जो इंडेक्स को 21,700 के लेवल तक ले जा सकती है।
एचडीएफसी सिक्योरिटीज के नागराज शेट्टी भी मामूली तेजी की उछाल की संभावना जताते हैं। हालांकि, उन्हें आने वाले समय में 21,900 - 21,850 के सपोर्ट जोन के टूटने और निफ्टी के 21,700-21,600 के लेवल तक गिरने की भी आशंका है। वहीं रेजिस्टेंस लेवल 22,300 पर देखा जा रहा है।
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