Trump Tariffs: ट्रंप आज करेंगे टैरिफ का ऐलान, इन फार्मा कंपनियों के शेयरों पर आ सकती है आफत

Trump Reciprocal Tariffs: अमेरिका अभी तक भारत से आने वाले फार्मा उत्पादों पर कोई टैक्स नहीं लगाता है, जबकि भारत अमेरिका से आने वाली दवाओं पर 10% का टैरिफ लगाता है। ट्रंप ने अब भारत समेत सभी देशों पर जवाबी टैक्स लगाने का संकेत दिया है। इसका मतलब होगा कि अमेरिका भी नए टैरिफ नियमों के तहत भारतीय दवाओं पर 10% तक का इंपोर्ट ड्यूटी लगा सकता है

अपडेटेड Apr 02, 2025 पर 2:47 PM
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Trump Reciprocal Tariffs: ट्रंप आज 2 अप्रैल को रेसिप्रोकल टैरिफ (जवाबी टैक्स) लागू करने का ऐलान करने वाले हैं

Trump Reciprocal Tariffs: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप आज 2 अप्रैल को रेसिप्रोकल टैरिफ (जवाबी टैक्स) लागू करने का ऐलान करने वाले हैं। पूरी दुनिया इस बात का इंतजार कर रही है कि अमेरिका किन देशों और किन इंडस्ट्री पर टैरिफ लगाएगा। एक्सपर्ट्स का कहना है कि भारतीय फार्मा सेक्टर को सबसे बड़ा झटका लग सकता है, क्योंकि भारत की फार्मास्युटिकल कंपनियां अपने उत्पादों का बड़ा हिस्सा अमेरिका को निर्यात करती हैं। हालांकि, व्हाइट हाउस ने संकेत दिया है कि आज की घोषणा किसी सेक्टर को ध्यान में रखकर नहीं, बल्कि देशों को ध्यान में रखकर ली जा सकती है। लेकिन अंतिम फैसला ट्रम्प की रणनीति पर निर्भर करेगा।

फार्मा सेक्टर क्यों है निशाने पर?

अमेरिका अभी तक भारत से आने वाले फार्मा प्रोडक्ट्स पर कोई टैक्स नहीं लगाता है, जबकि भारत अमेरिका से आने वाली दवाओं पर 10% का टैरिफ लगाता है। ट्रंप ने अब भारत समेत सभी देशों पर जवाबी टैक्स लगाने का संकेत दिया है। इसका मतलब होगा कि अमेरिका भी नए टैरिफ नियमों के तहत भारतीय दवाओं पर 10% तक का इंपोर्ट ड्यूटी लगा सकता है।

पिछले हफ्ते ही ट्रंप ने अमेरिकी बाजार में ऑटोमोबाइल आयात पर 25% टैरिफ लगाने का ऐलान किया था, जिससे यह आशंका और बढ़ गई है कि फार्मा सेक्टर भी जल्द ही प्रभावित हो सकता है।


अगर टैरिफ लागू हुआ तो भारतीय कंपनियों पर क्या असर पड़ेगा?

ब्रोकरेज फर्म Citi का मानना है कि टैरिफ बढ़ने से भारतीय दवा कंपनियां की लागत बढ़ेगी और वे इसका असर बीमा कंपनियों या रिटेल विक्रेताओं पर डालने की कोशिश करेंगी। हालांकि, अगर ये अतिरिक्त लागत ग्राहकों तक नहीं पहुंचाई जाती, तो पूरी सप्लाई चेन को इसका बोझ उठाना पड़ेगा। Citi के एनालिस्ट्स का मानना है कि टैरिफ का पूरा भार उपभोक्ताओं पर डालना कठिन होगा।

क्या होगा कंपनियों के मुनाफे पर असर?

अगर कंपनियां टैरिफ की लागत पूरी तरह से नहीं निकाल पातीं, तो जिनका अमेरिका में बड़ा व्यापार है, उनकी ऑपरेटिंग प्रॉफिट (EBITDA) पर 9% से 12% तक का असर पड़ सकता है। सिटी के अनुमानों को आप नीचे देख सकते हैं।

कंपनी
रेवेन्यू में अमेरिका का हिस्सा (% में)  EBITDA पर असर
ग्लैंड फार्मा
50%
8-10%
अरबिंदो
48%
12-13%
डॉ. रेड्डीज
47%
10-12%
जाइडस लाइफ
46%
8-10%
ल्यूपिन
37%
6-7%
सिप्ला
29%
4-5%
सन फार्मा
32%
2-3%
टोरेंट फार्मा
9%
1-2%

वहीं अगर कंपनियां बढ़ी हुई लागत का 50% हिस्सा ग्राहकों को पास कर देती हैं, तो भी उनका EBITDA 1% से 7% तक प्रभावित हो सकता है।

कंपनी
अमेरिका से रेवेन्यू (% में) EBITDA पर असर
ग्लैंड फार्मा
50%
4-5%
अरबिंदो
48%
5-7%
डॉ रेड्डीज
47%
4-6%
जाइडस
46%
4-5%
ल्यूपिन
37%
3-4%
सिप्ला
29%
2-3%
सन फार्मा
32%
1-2%
टोरेंट फार्मा
9%
0-1%

क्या भारत अमेरिकी उत्पादों पर टैक्स जीरो कर सकता है?

ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म जेफरीज का मानना है कि भारत अमेरिकी दवाओं पर लगाए गए 10% टैरिफ को हटाने पर विचार कर सकता है। भारत, अमेरिका से लगभग 80 करोड़ डॉलर की दवाएं आयात करता है, जबकि अमेरिका को 8.7 बिलियन डॉलर की दवाएं एक्सपोर्ट करता है। ऐसे में अगर भारत अपने टैरिफ को पूरी तरह हटा भी देता है, तो भी भारत-अमेरिका व्यापार संतुलन पर इसका बहुत बड़ा असर नहीं पड़ेगा।

क्या भारतीय कंपनियां अमेरिका में मैन्युफैक्चरिंग शुरू कर सकती हैं?

एक्सपर्ट्स का कहना है कि भारतीय कंपनियों के लिए अमेरिका में उत्पादन शुरू करना एक लंबी प्रक्रिया होगी। अमेरिका में मैन्युफैक्चरिंग प्लांट लगाने में कम से कम 5-6 साल का समय लगेगा। वहां कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capex) और ऑपरेटिंग लागत (Opex) भी भारत की तुलना में 2 से 2.5 गुना अधिक होगी।

जेफरीज के मुताबिक, जिन भारतीय कंपनियों का फोकस जेनेरिक दवाओं और कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरिंग ऑर्गेनाइजेशन (CMO) पर है, उन्हें इस टैरिफ से सबसे ज्यादा नुकसान झेलना पड़ सकता है।

कुछ भारतीय कंपनियों के पहले से अमेरिका में मैन्युफैक्चरिंग प्लांट हैं, उनके नाम नीचे दिए गए हैं-

कंपनी
अमेरिका में प्लांट्स 
सिप्ला
न्यूयॉर्क में 2 फॉर्मूलेशन प्लांट, मैसाचुसेट्स में एक  फॉर्मूलेशन प्लांट
डॉ रेड्डीज
न्यूयॉर्क में API फैसिलिटीज,  लुइसियाना में फॉर्मूलेशन प्लांच
वृक
R&D सेंटर  - न्यू जर्सी और फ्लोरिडा,  फॉर्मूलेशन प्लांट - न्यू जर्सी
सिंजेन
बायोलॉजिक्स API - मैरीलैंड
पिरामल फार्मा
एपीआई - मिशिगन , फॉर्मूलेशन प्लांट - केंटकी और पेंसिल्वेनिया
साई लाइफसाइंसेज
R&D - मैसाचुसेट्स

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