यूनियन बजट का असर! शेयर बायबैक पर टैक्स के नए नियम लागू होने से पहले 16 कंपनियों ने बायबैक के ऐलान किए

वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने 23 जुलाई को पेश बजट में शेयर बायबैक से हुई इनकम पर टैक्स लगाने का ऐलान किया था। इस नियम के लागू होने के बाद शेयर बायबैक प्रोग्राम में हिस्सा लेने वाले निवेशक को बायबैक से हुई इनकम पर टैक्स चुकाना पड़ेगा

अपडेटेड Aug 13, 2024 पर 4:02 PM
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इंडस टावर्स ने 2,640 करोड़ रुपये के शेयर बायबैक प्लान का ऐलान किया है। एआईए इंजीनियरिंग ने 500 करोड़ रुपये के बायबैक का का ऐलान किया है।

यूनियन बजट पेश होने के बाद से करीब 16 कंपनियों ने शेयर बायबैक प्लान का ऐलान किया है। इसकी वजह 23 जुलाई को पेश बजट में शेयर बायबैक पर टैक्स के नए नियम का ऐलान है। नए नियम 1 अक्टूबर से लागू होंगे। इंडस टावर्स ने 2,640 करोड़ रुपये के शेयर बायबैक प्लान का ऐलान किया है। एआईए इंजीनियरिंग ने 500 करोड़ रुपये के बायबैक का का ऐलान किया है। वेलस्पन लिविंग ने कहा है कि वह शेयर बायबैक पर 278 करोड़ रुपये खर्च करेगी।

शेयर बायबैक से हुई इनकम पर निवेशक को चुकाना पड़ेगा टैक्स

शेयर बायबैक प्रोग्राम (Share Buyback Program) का ऐलान करने वाली कंपनियों में TTK Prestige, Cera Sanitaryware और नवनीत एजुकेशन भी शामिल है। ये कंपनियां बायबैक पर 7 करोड़ से 200 करोड़ रुपये तक खर्च करेंगी। एक्सपर्ट्स का कहना है कि टैक्स के नए नियम लागू होने के बाद बायबैक में हिस्सा लेने वाले निवेशकों को ज्यादा टैक्स चुकाना पड़ेगा। वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने 23 जुलाई को पेश बजट में ऐलान किया था कि शेयरबायबैक से होने वाली इनकम पर निवेशक को टैक्स चुकाना पड़ेगा।


अभी कंपनियां 20 फीसदी टैक्स चुकाती हैं

अभी कंपनियां शेयर बायबैक पर 20 फीसदी टैक्स चुकाती हैं। निवेशक को कोई टैक्स नहीं चुकाना पड़ता है। नए नियम लागू होने के बाद कंपनियां टैक्स डिडक्ट नहीं करेंगी। निवेशक को बायबैक से होने वाली इनकम पर अपने टैक्स स्लैब के हिसाब से टैक्स चुकाना होगा। इनवेस्टर्स बायबैक शेयरों की कॉस्ट पर कैपिटल लॉस क्लेम कर सकते हैं। इसे अगले 8 साल तक होने वाले कैपिटल गेंस के साथ एडजस्ट किया जा सकेगा।

शेयरहोल्डर्स को फायदे में हिस्सेदार बनाने के लिए बायबैक का इस्तेमाल

एक्सपर्ट्स का कहना है कि यूनियन बजट में नियमों में बदलाव से टैक्स का बोझ बढ़ जाएगा। उनका यह भी कहना है कि बायबैक इनकम पर टैक्स लगाना अनुचित है, क्योंकि इसका मकसद अतिरिक्त पूंजी निवेशकों को वापस करना होता है। हालांकि, टैक्स के लिहाज से डिविडेंड्स और बायबैक के बीच अंतर था, जिससे कंपनियां बायबैक करना पसंद करती थीं। सरकार ने इस अंतर को खत्म कर दिया है।

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सबसे ज्यादा 55,743 करोड़ रुपये का बायबैक 2017 में

कंपनियां शेयरहोल्डर्स को फायदे में हिस्सेदार बनाने के लिए शेयर बायबैक के तरीके का काफी इस्तेमाल करती हैं। शेयर बायबैक प्रोग्राम में निवेशक को मार्केट प्राइस के मुकाबले ज्यादा प्राइस पर शेयर बेचने का मौका मिल जाता है। प्राइम डेटाबेस के मुताबिक, पिछले पांच साल में कंपनियों ने करीब 1.5 लाख करोड़ रुपये के शेयर बायबैक किए हैं। सबसे ज्यादा 55,743 करोड़ रुपये का बायबैक 2017 में हुआ था। साल 2023 इस मामले में दूसरे नंबर पर रहा, जब कंपनियों ने 48,452 करोड़ रुपये के बायबैक किए थे।

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