ग्लोबल मार्केट में जारी रहेगी उठापटक, भारतीय बाजार में किसी बड़ी गिरावट का खतरा नहीं: नीलकंठ मिश्रा

भारतीय बाजार में किसी बड़ी गिरावट की संभावना नहीं है। दुनियाभर में भारत की सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है। कोविड के बाद भारत में सबसे तेज रिकवरी देखने को मिली है। लेकिन आगे ग्लोबल मार्केट की तुलना में इसका प्रीमियम 2022 के लेवल से कम हो सकता है

अपडेटेड Dec 15, 2022 पर 6:57 PM
पीएसयू बैंक इतनी तेजी आने के बाद अभी भी अच्छे लग रहे हैं। लेकिन इनमें चुनिंदा शेयरों पर ही दांव लगाने की राय होगी

साल 2022 अपने अंतिम पड़ाव पर पहुंच चुका है और नया साल हमारा इंतजार कर रहा है। बाजार के लिए ये साल खट्टी-मीठी यादों भरा रहा है। निफ्टी और सेंसेक्स ने सिंगल डिजिट में रिटर्न दिए हैं। लेकिन बैंक निफ्टी ने 20 फीसदी से ज्यादा की शानदार कमाई कराई है। उसमें भी सरकारी बैंकों में 80 फीसदी से ज्यादा का फायदा हुआ है। ये तो रही पिछले साल की बात। लेकिन सवाल ये है कि साल 2023 भारतीय बाजारों के लिए कैसा रह सकता है। ये समझने के लिए क्रेडिट सुइस इंडिया के MD और इंडिया इक्विटी स्ट्रैटेजिस्ट नीलकंठ मिश्रा से बेहतर कोई और शख्स नहीं हो सकता है।

बाजार में अभी 9-12 महीने और टाइम करेक्शन देखने को मिल सकता है

नीलकंठ मिश्रा ने बाजार की आगे की दशा और दिशा पर बात करते हुए सीएनबीसी-आवाज़ से कहा कि बाजार में अभी 9-12 महीने और टाइम करेक्शन देखने को मिल सकता है। भारतीय बाजार में किसी बड़ी गिरावट की संभावना नहीं है। दुनियाभर में भारत की सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है। कोविड के बाद भारत में सबसे तेज रिकवरी देखने को मिली है। लेकिन आगे ग्लोबल मार्केट की तुलना में इसका प्रीमियम 2022 के लेवल से कम हो सकता है। 2023 में ग्लोबल पीई में भी ज्यादा ग्रोथ की उम्मीद कम है।


ग्लोबल में मार्केट में किसी बड़े एक्सिडेंट के बाद ही भारतीय बाजार में आ सकता है करेक्शन

उन्होंने आगे कहा कि राहत पैकेजों की वापसी का पूरा असर अब तक नहीं दिखा है। 2023 में दुनिया भर में मौद्रिक नीतियों में आई कड़ाई का असर देखने को मिलना शुरू होगा। इसकी वजह से अगर ग्लोबल में मार्केट में कोई बड़ा एक्सिडेंट होता है तभी भारतीय बाजार में कोई बड़ा करेक्शन आ सकता है। अगर ऐसा कोई एक्सिडेंट नहीं होता भारतीय बाजार में किसी बड़ी गिरावट की संभावना नहीं है। लेकिन बाजार में टाइम करेक्शन का संभावना तो है ही।

आईटी सेक्टर पर बात करते हुए नीलकंठ मिश्रा ने कहा कि आईटी कंपनियों की बैलेंसशीट तो मजबूत है लेकिन इन कंपनियों के सामने अमेरिका की सुस्ती एक बड़ी चुनौती है। नीलकंठ मिश्रा ने आगे कहा कि फाइनेंशियल शेयरों का पीई रेशियो अच्छा है। इनके फंडामेंटल्स मजबूत हैं। इनमें आगे ग्रोथ की भी संभावना है।

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पीएसयू बैंक इतनी तेजी आने के बाद अभी भी अच्छे

पीएसयू बैंक इतनी तेजी आने के बाद अभी भी अच्छे लग रहे हैं। लेकिन इनमें चुनिंदा शेयरों पर ही दांव लगाने की राय होगी। नीलकंठ ने आगे कहा कि वे पीएसयू बैंकों में टॉप के 3-4 बैंकों पर ही 'ओवरवेट' हैं। चुनिंदा सरकारी बैंकों में आगे और तेजी संभव है। निवेशकों का पीएसयू बैंकों पर भरोसा बढ़ा है।

नीलकंठ मिश्रा ने इस बातचीत में ये भी कहा कि साल 2023 में भारत के जीडीपी में मजबूत बढ़त देखने को मिलेगी। सरकारी खर्च में बढ़त, लो इनकम ज़ॉब में बढ़ोतरी और सप्लाई चेन से जुड़ी समस्याओं में सुधार से देश की जीडीपी में अच्छी ग्रोथ की संभावना है। लेकिन कच्चे तेल के आयात और विदेशी पूंजी पर निर्भरता और ग्लोबल इकोनॉमी में मंदी भारत के लिए निगेटिव साबित हो सकती है।

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