UPL Share Price: एग्रोकेमिकल सेक्टर की कंपनी यूपीएल लिमिटेड के शेयरों में आज 23 फरवरी को भारी गिरावट देखने को मिली। कंपनी के शेयर शुरुआती कारोबार में 12 परसेंट से अधिक गिरकर 661.10 रुपये के स्तर पर आ गए। यह गिरावट कंपनी के रिस्ट्रक्चरिंग योजना की ऐलान के बाद आया। ब्रोकरेज फर्म नुवामा ने इस रिस्ट्रक्चरिंग योजना के ऐलान के बाद कंपनी के शेयरों की रेटिंग को ‘बाय’ से घटाकर ‘होल्ड’ कर दिया है। साथ ही 816 रुपये का नया टारगेट प्राइस तय किया है।
सुबह 10.10 बजे के करीब, कंपनी के शेयर 11.96 फीसदी से अधिक की गिरावट के साथ 662.40 रुपये के स्तर पर कारोबार कर रहे थे। इस साल अब तक कंपनी के शेयरों में करीब 17.75 फीसदी की गिरावट चुकी है। हालांकि पिछले एक साल में इसके शेयरों का प्रदर्शन लगभग सपाट रहा है।
हालांकि नुवामा ने कहा कि प्रस्तावित डील नकद और टैक्स के लिहाज से न्यूट्रल है। इससे कैपिटल स्ट्रक्चरल में बदलाव नहीं होगा और माइनॉरिटी शेयरधारकों के हित सुरक्षित रहेंगे।
क्या है UPL का रिस्ट्रक्चरिंग प्लान?
UPL ने अपने भारत और ग्लोबल क्रॉप प्रोटेक्शन बिजनेस को एक अलग लिस्टेड कंपनी में कंसॉलिडेट करने की योजना को मंजूरी दी है। कंपनी का कहना है कि इससे दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी लिस्टेड शुद्ध क्रॉप प्रोटेक्शन कंपनी बनेगी। नए स्ट्रक्चर के तहत कुल दो सूचीबद्ध कंपनियां होंगी।
UPL लिमिटेड एक डावर्सिफाइड कृषि और स्पेशियलिटी केमिकल्स कंपनी के रूप में काम जारी रखेगी। वहीं नई कंपनी UPL ग्लोबल सस्टेनेबल एग्री सॉल्यूशंस में भारत और अंतरराष्ट्रीय दोनों बाजारों का क्रॉप प्रोटेक्शन कारोबार शामिल होगा।
तीन चरणों में होगा रिस्ट्रक्चरिंग
इस पूरी प्रक्रिया को तीन चरणों में पूरा किया जाएगा। पहले चरण में UPL सस्टेनेबल एग्री सॉल्यूशंस को UPL में मिला दिया जाएगा, जिसमें UPL की 90.91% हिस्सेदारी है। वहीं दूसरे चरण में भारत के क्रॉप प्रोटेक्शन बिजनेस को UPL से अलग कर UPL Global में ट्रांसफर किया जाएगा।
तीसरे चरण में UPL क्रॉप प्रोटेक्शन होल्डिंग्स को भी UPL Global में मिला दिया जाएगा, जिसके जरिए कंपनी अंतरराष्ट्रीय क्रॉप प्रोटेक्शन बिजनेस में 77.78% हिस्सेदारी रखती है। रिस्ट्रक्चरिंग पूरा होने के बाद UPL ग्लोबल, स्टॉक एक्सचेंजों पर अलग से सूचीबद्ध होगी और एक इंडिपेंडेंट मैनेजमेंट स्ट्रक्चर के तहत काम करेगी।
कंपनी का कहना है कि इस कदम से परिचालन तालमेल बढ़ेगा और शेयरधारकों के लिए वैल्यू अनलॉक होगा। हालांकि नुवामा का मानना है कि इससे कंपनी के मौजूदा कर्ज बोझ पर खास असर नहीं पड़ेगा। यह प्रक्रिया नियामकीय मंजूरियों के अधीन है और इसे पूरा होने में 12 से 15 महीने लग सकते हैं।
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