प्राइवेट सेक्टर के IDFC First Bank के शेयरहोल्डर्स के लिए 23 फरवरी को दिन बेहद खराब साबित हो रहा है। 590 करोड़ रुपये के घोटाले की खबर सामने आने के बाद शेयर शुरुआती कारोबार में ही 20 प्रतिशत टूट गया और BSE पर 66.85 रुपये पर आ गया। बाद में 16 प्रतिशत से ज्यादा गिरावट के साथ 70.04 रुपये पर सेटल हुआ। बैंक ने चंडीगढ़ की एक ब्रांच में हरियाणा सरकार के खातों में अपने कर्मचारियों और अन्य लोगों द्वारा की गई 590 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का खुलासा किया है। शेयर में जबरदस्त बिकवाली से IDFC First Bank का मार्केट कैप गिरकर 61000 करोड़ रुपये पर आ गया है।
IDFC First Bank ने कहा है कि उसने बैंकिंग रेगुलेटर को मामले की जानकारी दी है और पुलिस में भी शिकायत दर्ज कराई है। बैंक के मुताबिक, फिलहाल उसने फ्रॉड का साइज 590 करोड़ रुपये होने का अनुमान लगाया है। आगे की जानकारी मिलने, क्लेम के वैलिडेशन और किसी भी तरह की रिकवरी के आधार पर एक रिकंसिलिएशन एक्सरसाइज से फाइनल रकम तय होगी।
फ्रॉड की डिटेल्स देते हुए, बैंक ने कहा कि हरियाणा सरकार का एक विभाग IDFC फर्स्ट बैंक के साथ बैंकिंग कर रहा था। लेंडर को एक अनजान तारीख पर क्लोजर और बैलेंस दूसरे बैंक में ट्रांसफर करने की रिक्वेस्ट मिली। इस प्रोसेस में, अकाउंट में बैलेंस के मुकाबले बताई गई रकम में कुछ अंतर देखे गए। हरियाणा सरकार की दूसरी कंपनियों के अकाउंट में भी ऐसी ही दिक्कतें देखी गईं।
4 अधिकारी जांच पेंडिंग रहने तक सस्पेंड
IDFC फर्स्ट बैंक ने कहा है कि एक शुरुआती इंटरनल रिव्यू किया गया था और यह मामला हरियाणा सरकार के अंदर सरकारी-लिंक्ड अकाउंट्स के एक खास ग्रुप तक ही सीमित है, जिसे चंडीगढ़ में उस ब्रांच के जरिए ऑपरेट किया जाता है। बैंक ने जोर देकर कहा कि यह धोखाधड़ी चंडीगढ़ ब्रांच के दूसरे कस्टमर्स तक नहीं फैली है। बैंक ने 4 अधिकारियों को जांच पेंडिंग रहने तक सस्पेंड कर दिया है। साथ ही कर्मचारियों और दूसरे बाहरी लोगों के खिलाफ सख्त डिसिप्लिनरी, सिविल और क्रिमिनल एक्शन का भरोसा दिलाया है।
हरियाणा सरकार ने IDFC First Bank से सरकारी कामकाज रोका
इस बीच हरियाणा सरकार ने अगले ऑर्डर तक तुरंत प्रभाव से IDFC फर्स्ट बैंक और AU स्मॉल फाइनेंस बैंक को सरकारी काम के लिए डी-एम्पेनल्ड कर दिया है। एक अधिकारिक सर्कुलर में कहा गया है कि राज्य सरकार इन इंस्टीट्यूशंस में कोई सरकारी फंड न ही जमा करेगी, न इनके जरिए इनवेस्ट करेगी और न ही ट्रांजेक्ट करेगी। आसान शब्दों में इन दोनों बैंकों के माध्यम से फिलहाल कोई भी सरकारी वित्तीय काम नहीं होगा।
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