Vedanta demerger: वेदांता का डिमर्जर लागू, मोतीलाल ओसवाल ने बताया अब कैसी रहेगी शेयर की चाल
Vedanta demerger: वेदांता का डिमर्जर लागू हो गया है और कंपनी पांच हिस्सों में बंट गई है। Motilal Oswal ने शेयर पर सतर्क रुख रखते हुए सीमित बढ़त का अनुमान जताया है। अब निवेशकों की नजर वैल्यूएशन और ग्रोथ पर है। जानिए पूरी डिटेल।
वेदांता के प्रदर्शन में एल्युमिनियम और जिंक सेगमेंट का सबसे बड़ा योगदान रहा।
Vedanta demerger: वेदांता का बहुप्रतीक्षित डिमर्जर अब लागू हो चुका है। अनिल अग्रवाल की यह कंपनी पांच अलग-अलग बिजनेस में बंट गई है। इनमें एल्युमिनियम, ऑयल एंड गैस, पावर, आयरन एंड स्टील और मौजूदा वेदांता इकाई शामिल हैं। इस बदलाव के बाद निवेशकों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि आगे ग्रोथ और वैल्यूएशन कैसे दिखेंगे।
एक्स-डिमर्जर और शेयर अलॉटमेंट
वेदांता का शेयर 30 अप्रैल को एक्स-डिमर्जर हो गया, जो 1 मई 2026 की रिकॉर्ड डेट से ठीक पहले था। इसका मतलब है कि जिन निवेशकों के पास रिकॉर्ड डेट से पहले शेयर थे, उन्हें अब नई डिमर्ज्ड कंपनियों के शेयर मिलेंगे। अब बाजार का ध्यान री-स्ट्रक्चरिंग से हटकर वैल्यूएशन और भविष्य की संभावनाओं पर आ गया है।
Motilal Oswal का नजरिया
ब्रोकरेज हाउस Motilal Oswal ने वेदांता ग्रुप पर सतर्क रुख अपनाया है। फर्म ने 800 रुपये का टारगेट प्राइस दिया है और ‘Neutral’ रेटिंग बनाए रखी है। इसका मतलब है कि मौजूदा स्तर से करीब 3% की ही संभावित बढ़त नजर आ रही है।
रिपोर्ट के मुताबिक, स्टॉक FY28 के अनुमान पर 6.6 गुना EV/EBITDA पर ट्रेड कर रहा है। SoTP आधार पर कुल फेयर वैल्यू करीब 800 रुपये प्रति शेयर आती है। इसमें एल्युमिनियम और जिंक सबसे बड़ा योगदान देते हैं।
Q4 प्रदर्शन कैसा रहा
वेदांता के ताजा नतीजे मजबूत ग्रोथ दिखाते हैं। Q4FY26 में रेवेन्यू करीब 52,800 करोड़ रुपये रहा, जो सालाना आधार पर 31% और तिमाही आधार पर 13% बढ़ा।
ऑपरेटिंग प्रदर्शन भी मजबूत रहा। EBITDA करीब 18,400 करोड़ रुपये रहा, जो सालाना 61% बढ़ा और मार्जिन बढ़कर 34.9% हो गया। प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (APAT) 10,650 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले साल के मुकाबले दोगुने से ज्यादा है।
ग्रोथ प्लान और कर्ज पर फोकस
Motilal Oswal के मुताबिक, कंपनी आगे भी अपनी कमाई की ग्रोथ बनाए रखने पर काम कर रही है। नई कैपेसिटी, बेहतर प्रोडक्ट मिक्स और अनुकूल कीमतों से ग्रोथ को सपोर्ट मिलने की उम्मीद है।
साथ ही कंपनी अपने कर्ज को कम करने पर भी ध्यान दे रही है। बढ़ते कैश फ्लो से विस्तार और डीलिवरेजिंग दोनों को सपोर्ट मिलेगा। मार्च 2026 के अंत तक कंपनी का नेट कर्ज करीब 53,200 करोड़ रुपये था और नेट डेट-टू-EBITDA अनुपात 0.95 गुना रहा।
एल्युमिनियम और जिंक का दबदबा
वेदांता के प्रदर्शन में एल्युमिनियम और जिंक सेगमेंट का सबसे बड़ा योगदान रहा। एल्युमिनियम बिजनेस का रेवेन्यू करीब 18,700 करोड़ रुपये रहा, जबकि EBITDA बढ़कर करीब 8,500 करोड़ रुपये हो गया।
जिंक बिजनेस, खासकर हिंदुस्तान जिंक ने भी मजबूत प्रदर्शन किया। इसका रेवेन्यू करीब 13,500 करोड़ रुपये और EBITDA करीब 7,700 करोड़ रुपये रहा। इस सेगमेंट का EBITDA मार्जिन करीब 57% रहा, जो काफी मजबूत माना जाता है।
डिमर्जर के बाद नया ढांचा
1 मई 2026 से वेदांता पांच अलग-अलग लिस्टेड कंपनियों में बंट गई है- एल्युमिनियम, ऑयल एंड गैस, पावर, आयरन एंड स्टील और वेदांता। अब वेदांता में जिंक और अन्य बचे हुए बिजनेस रहेंगे।
इस नए ढांचे में मौजूदा वेदांता कंपनी मुख्य रूप से जिंक बिजनेस और अन्य रेजिडुअल ऑपरेशंस को संभालेगी। वहीं, बाकी सेगमेंट अलग-अलग कंपनियों के रूप में काम करेंगे।
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