2014 के शेयर बायबैक मामले में फिर खुला वेदांता का पेनल्टी केस, सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला

Vedanta Penalty Case: सुप्रीम कोर्ट ने 2014 के Cairn India शेयर बायबैक से जुड़े SEBI पेनल्टी केस को फिर SAT भेज दिया है। अब फ्रॉड के आरोपों पर नए सिरे से फैसला होगा। कोर्ट ने एस्क्रो रकम रिलीज होने को अलग फ्रॉड जांच में बाधा नहीं माना। जानिए पूरी डिटेल।

अपडेटेड Sep 09, 2026 पर 8:57 PM
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यह मामला जनवरी 2014 में Cairn India के घोषित शेयर बायबैक से जुड़ा है।

सुप्रीम कोर्ट ने Vedanta Limited के खिलाफ 2014 के शेयर बायबैक से जुड़े SEBI के फ्रॉड केस को फिर से खोल दिया है। कोर्ट ने कहा कि बायबैक के लिए जमा एस्क्रो फंड रिलीज होने से SEBI की कार्रवाई पर रोक नहीं लगती।

जस्टिस JB पार्दीवाला और KV विश्वनाथन की बेंच ने SEBI की अपील पर यह फैसला दिया। कोर्ट ने अक्टूबर 2023 के Securities Appellate Tribunal (SAT) के फैसले को आंशिक रूप से बदल दिया। SAT ने Vedanta और तीन अन्य लोगों पर लगाए गए जुर्माने हटा दिए थे।

सुप्रीम कोर्ट ने मामला वापस SAT को भेज दिया है। अब ट्रिब्यूनल नए सिरे से तय करेगा कि कंपनी का बर्ताव फ्रॉड की श्रेणी में आता था या नहीं।


एस्क्रो फंड रिलीज होने से केस खत्म नहीं

मामले में बड़ा सवाल यही था। क्या एस्क्रो रकम रिलीज होने के बाद SEBI फ्रॉड के आरोपों पर अलग केस चला सकता है? सुप्रीम कोर्ट ने कहा, हां। कोर्ट ने कहा कि एस्क्रो रकम जब्त होनी चाहिए थी या नहीं और कंपनी ने फ्रॉड या मार्केट मैनिपुलेशन किया था या नहीं, ये दोनों अलग मुद्दे हैं।

2014 के बायबैक का है मामला

यह मामला जनवरी 2014 में Cairn India के घोषित शेयर बायबैक से जुड़ा है। इस कंपनी का 2017 में वेदांता में मर्जर हो गया। हालांकि, वेदांता का Cairn India में 2011 से ही कंट्रोलिंग स्टेक था। Cairn India ने 17.09 करोड़ शेयरों को अधिकतम ₹335 प्रति शेयर के भाव पर खरीदने का प्रस्ताव रखा था। इसके लिए ₹5,725 करोड़ तक खर्च करने की योजना थी।

हालांकि, कंपनी ने करीब 3.67 करोड़ शेयर ही खरीदे। इसके लिए करीब ₹1,225 करोड़ खर्च हुए। यानी तय रकम के आधे से भी कम का इस्तेमाल हुआ।

SEBI की क्या दलील थी

सेबी के Adjudicating Officer ने कहा था कि बाजार की स्थिति अनुकूल होने के बावजूद कंपनी ने पर्याप्त खरीद ऑर्डर नहीं लगाए। इससे निवेशकों के बीच यह गलत धारणा बन सकती थी कि कंपनी बायबैक पूरा करने के लिए गंभीर है।

इस मामले में Vedanta पर ₹5.25 करोड़ का जुर्माना लगाया गया था। तीन अन्य लोगों पर ₹15-15 लाख का जुर्माना लगा था। 2023 में SAT ने ये जुर्माने हटा दिए थे।

ट्रेडिंग डेटा में भी अंतर मिला

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मामले में कुछ अहम तथ्य अभी साफ नहीं हैं। कोर्ट ने SEBI की जांच रिपोर्ट और NSE के आंकड़ों में अंतर का भी जिक्र किया। 17 फरवरी 2014 के लिए SEBI की रिपोर्ट में ₹335 या उससे कम भाव पर 1.31 करोड़ से ज्यादा शेयर उपलब्ध बताए गए थे। वहीं NSE के आंकड़ों में यह संख्या 30 लाख से कुछ ज्यादा थी।

कोर्ट ने SEBI की दो जांच रिपोर्टों में भी विरोधाभास पाया। एक रिपोर्ट में कहा गया था कि कीमत और ट्रेडिंग वॉल्यूम पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ा। बाद की रिपोर्ट में इन्हीं तथ्यों के आधार पर फ्रॉड का आरोप लगाया गया।

अब SAT मामले की दोबारा जांच करेगा। वह गवाहों को बुला सकता है। जरूरी दस्तावेज भी मांग सकता है। इसके बाद ट्रेडिंग रिकॉर्ड और दूसरे सबूतों के आधार पर फ्रॉड के आरोपों पर नया फैसला होगा।

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