Venezuela crisis : वेनेजुएला पर अमेरिकी एक्शन से तेल का खेल पूरी तरह बदल सकता है। वेनेजुएला के तेल पर पाबंदी हटने से सप्लाई बढ़ सकती है। इसका भारतीय एनर्जी कंपनियों पर क्या असर हो सकता है। वेनेजुएला संकट के भारत पर असर की बात करें तो वेनेजुएला के तेल पर लगी पाबंदी हट सकती है। पाबंदी हटने से सप्लाई बढ़ सकती है। हालांकि, मध्यम अवधि में कच्चे तेल की कीमतों में दबाव संभव है।
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के चीफ इंवेस्टमेंट स्ट्रेटेजिस्ट वीके विजयकुमार का कहना है कि साल 2026 की शुरुआत बड़े जियोपॉलिटिकल बदलावों के साथ हुई है, जिसके गंभीर नतीजे हो सकते हैं। वेनेजुएला में अमेरिका की कार्रवाई से ग्लोबल जियोपॉलिटिक्स और ज़्यादा अस्थिर हो सकती है। रूस-यूक्रेन संघर्ष लंबे समय तक चलने की संभावना है। ईरान में विरोध प्रदर्शन और बिगड़ सकते हैं और ईरान में ट्रंप के दखल की धमकी को देखते हुए ईरानी सरकार इस पर कैसे प्रतिक्रिया देती है, इस पर नजर रखना होगा। शायद चीन भी इस बड़ी अनिश्चितता का फायदा उठाकर ताइवान पर कब्ज़ा कर सकता है। जियोपॉलिटिक्स की इस बड़ी अनिश्चितता का असर बाज़ार पर भी पड़ेगा। हमें देखना होगा कि आगे क्या होता है। वेनेजुएला संकट से भारत के लिए एक अच्छी बात यह है कि इससे मीडियम से लॉन्ग-टर्म में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आएगी।
RIL (रिलायंस इंडस्ट्रीज) वेनेजुएला से लगभग 20 लाख बैरल कच्चा तेल हर महीने इंपोर्ट करता है। वेनेजुएला तेल पर US पाबंदी हटने से कंपनी को बड़ा फायदा। वेनेजुएला क्रूड से कंपनी के मार्जिन बेहतर होंगे।
OVL (ONGC विदेश) का वेनेजुएला में बड़ा एक्सपोजर है। OVL की San Cristobal में 40% और Carabobo 1 में 11% में हिस्सेदारी है। OVL वेनेजुएला में हर दिन 12–15 हजार बैरल तेल का उत्पादन करता है। US पाबंदी हटने से उत्पादन बढ़कर 45–50 हजार बैरल प्रति दिन संभव है। कंपनी को 500 मिलियन डॉलर और फंसे डिविडेंड मिल सकते हैं।
ऑयल इंडिया की Carabobo 1 में 3.5% हिस्सेदारी है। प्रोजेक्ट पर काम तेज होने कैश फ्लो बढ़ने की उम्मीद है। वेनेज़ुएला क्रूड से पारादीप रिफाइनरी ज्यादा प्रोसेसिंग क्षमता से काम कर पाएगी।
इन कंपनियों के लिए वेनेजुएला से हर दिन 60–100 हजार बैरल तेल आता है। US प्रतिबंध हटने से कम लागत में तेल मिलेगा। रिफाइनिंग मार्जिन अच्छे होंगे।
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