वोडाफोन आइडिया को बॉम्बे हाई कोर्ट से बहुत बड़ी राहत, सरकार का ₹2113 करोड़ का डिमांड नोटिस रद्द, बैंक गारंटी भी होगी वापस

Vodafone Idea Bombay HC Verdict: साल 2018 में जब वोडाफोन इंडिया और आइडिया सेलुलर का आपस में विलय हुआ, तो यह विवाद और ज्यादा पेचीदा हो गया। वैसे अब कंपनी को बड़ी राहत मिल गई है। स्टॉक एक्सचेंज को दी गई जानकारी में वोडाफोन आइडिया ने बताया कि हाई कोर्ट ने इस विवाद के सिलसिले में दूरसंचार विभाग के पास जमा कराई गई बैंक गारंटियों को भी तुरंत वापस करने का आदेश दिया है

अपडेटेड Jun 09, 2026 पर 10:13 AM
इस फैसले से वोडाफोन आइडिया को बड़ी वित्तीय राहत मिली है

Vodafone Idea: कर्ज में डूबी टेलीकॉम कंपनी वोडाफोन आइडिया के लिए कानूनी मोर्चे से एक राहत भरी खबर आ रही है। बॉम्बे हाई कोर्ट ने दूरसंचार विभाग (DoT) द्वारा कंपनी और उसकी पूर्व सहयोगी कंपनी स्पाइस कम्युनिकेशंस के खिलाफ जारी किए गए ₹2113 करोड़ रुपये के वन-टाइम स्पेक्ट्रम चार्ज की मांग को पूरी तरह से रद्द कर दिया है।

स्टॉक एक्सचेंज को दी गई जानकारी में वोडाफोन आइडिया ने बताया कि हाई कोर्ट ने इस विवाद के सिलसिले में दूरसंचार विभाग के पास जमा कराई गई बैंक गारंटियों को भी तुरंत वापस करने का आदेश दिया है।

क्या है पूरा विवाद और क्यों लगा था जुर्माना?


यह पूरा मामला साल 2013 का है, जब दूरसंचार विभाग ने टेलीकॉम कंपनियों के पास 6.2 MHz से अधिक स्पेक्ट्रम होल्डिंग होने पर वन-टाइम स्पेक्ट्रम चार्ज (OTSC) लगाने का फैसला किया था।

जनवरी 2013 में विभाग ने तत्कालीन आइडिया सेलुलर लिमिटेड और स्पाइस कम्युनिकेशंस से 1 जुलाई 2008 से 31 दिसंबर 2012 के बीच 6.2 MHz से ज्यादा स्पेक्ट्रम रखने के लिए बैकडेट से चार्ज मांगा था।

इसके अलावा, 1 जनवरी 2013 से लाइसेंस की अवधि खत्म होने तक 4.4 MHz से अधिक स्पेक्ट्रम रखने पर भी यह जुर्माना लगाया गया था।

आइडिया की दलील और कानूनी लड़ाई

आइडिया सेलुलर ने इस डिमांड को बॉम्बे हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। कंपनी का तर्क था कि सरकार का यह कदम सालों पहले मंजूर की गई टेलीकॉम लाइसेंस की वित्तीय शर्तों को पिछली तारीख से बदलने जैसा है, जो कि पूरी तरह गलत है।

हाई कोर्ट ने जनवरी 2013 में ही कंपनी को अंतरिम राहत देते हुए दूरसंचार विभाग को वोडाफोन आइडिया के खिलाफ कोई भी दंडात्मक या कड़ा कदम उठाने से रोक दिया था।

विलय के बाद और उलझ गया था मामला

साल 2018 में जब वोडाफोन इंडिया और आइडिया सेलुलर का आपस में विलय हुआ, तो यह विवाद और ज्यादा पेचीदा हो गया। उस समय दूरसंचार विभाग ने स्पेक्ट्रम चार्ज की मांग को संशोधित करके ₹3322 करोड़ कर दिया और इस रकम को सुरक्षित करने के लिए कंपनी से बैंक गारंटी मांग ली।

वोडाफोन आइडिया ने विरोध जताते हुए बैंक गारंटी जमा तो कर दी, लेकिन इसे टेलीकॉम ट्रिब्यूनल (TDSAT) में चुनौती दी, जहां कंपनी को राहत मिल गई। बाद में दूरसंचार विभाग ने TDSAT के इस आदेश पर सुप्रीम कोर्ट से स्टे लगवा लिया था।

हाई कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला- बिना कानूनी आधार के टैक्स नहीं

लंबे समय बाद अब बॉम्बे हाई कोर्ट ने 8 जून को दिए अपने फैसले में आइडिया सेलुलर और स्पाइस कम्युनिकेशंस को जारी किए गए मूल डिमांड नोटिस जो कुल ₹2113 करोड़ का था उसे पूरी तरह खारिज कर दिया।

अदालत ने अपने एक व्यापक फैसले में स्पष्ट किया कि सरकार लाइसेंस समझौतों या भारतीय टेलीग्राफ अधिनियम के बिना किसी मजबूत कानूनी आधार या प्रावधान के टेलीकॉम ऑपरेटरों पर पिछली तारीख से वन-टाइम स्पेक्ट्रम चार्ज नहीं थोप सकती है। इस फैसले से वोडाफोन आइडिया को बड़ी वित्तीय राहत मिली है।

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