'सबसे मुश्किल दौर से बाहर निकली वोडा आइडिया', कुमार मंगलम बिड़ला ने निवेशकों को दिलाया भरोसा

वोडाफोन आइडिया के चेयरमैन कुमार मंगलम बिडला ने निवेशकों को भरोसा दिलाया है कि कंपनी मुश्किल दौर से बाहर निकल रही है। 4,730 करोड़ रुपये की नई फंडिंग, बढ़ती प्रमोटर हिस्सेदारी और भारी स्पेक्ट्रम देनदारियां फिलहाल निवेशकों के फोकस में हैं।

अपडेटेड Jun 11, 2026 पर 10:55 PM
वोडाफोन आइडिया के प्रमोटर अगले 18 महीनों में 4,730 करोड़ रुपये का निवेश करेंगे।

वोडाफोन आइडिया के नॉन-एग्जीक्यूटिव चेयरमैन कुमार मंगलम बिड़ला ने निवेशकों को भरोसा दिलाने की कोशिश की है। उनका कहना है कि कंपनी अपने इतिहास के सबसे मुश्किल दौरों में से एक से बाहर निकल चुकी है। यह बयान ऐसे समय आया है, जब शेयरधारक 4,730 करोड़ रुपये की प्रमोटर फंडिंग योजना पर विचार कर रहे हैं।

पिछले महीने चेयरमैन का पद संभालने के बाद बिडला की यह पहली ईजीएम थी। उन्होंने कहा, 'मैंने अपनी सालाना टिप्पणी में कहा था कि मुश्किल वक्त हमेशा नहीं रहता, लेकिन मजबूत कंपनियां टिकती हैं। आज ये बात हमारी कंपनी पर पहले से ज्यादा लागू होती है।'

उन्होंने कहा कि ऑपरेशंस, कस्टमर सर्विस और नेटवर्क विस्तार जैसे सभी क्षेत्रों में कंपनी अपने लक्ष्यों पर फोकस कर रही है। इसके लिए अनुशासित तरीके से काम किया जा रहा है।


4,730 करोड़ रुपये जुटाने की तैयारी

यह असाधारण आम बैठक (EGM) प्रमोटर ग्रुप की कंपनी सूर्या इन्वेस्टमेंट्स पीटीई लिमिटेड के निवेश को मंजूरी दिलाने के लिए बुलाई गई थी। योजना के तहत कंपनी 11 रुपये प्रति शेयर की कीमत पर 430 करोड़ इक्विटी कन्वर्टिबल वारंट जारी करेगी। इन वारंट्स के जरिए प्रमोटर अगले 18 महीनों में 4,730 करोड़ रुपये का निवेश करेंगे। इस रकम का 25%, यानी 1,182 करोड़ रुपये, शुरुआत में ही जमा कराया जाएगा।

पैसा कहां खर्च होगा?

शेयरधारकों के सवालों का जवाब देते हुए बिड़ला ने बताया कि जुटाई गई रकम का एक बड़ा हिस्सा नेटवर्क और इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च होगा। करीब 1,730 करोड़ रुपये पूंजीगत खर्च (कैपेक्स) के लिए रखे गए हैं। वहीं, बाकी 3,000 करोड़ रुपये कर्ज कम करने में लगाए जाएंगे।

प्रमोटरों की हिस्सेदारी बढ़ेगी

वारंट्स के पूरी तरह इक्विटी में बदलने के बाद आदित्य बिड़ला ग्रुप की हिस्सेदारी 9.6% से बढ़कर करीब 13% हो जाएगी। वहीं, आदित्य बिड़ला समूह और वोडाफोन पीएलसी की संयुक्त हिस्सेदारी बढ़कर लगभग 28.5% तक पहुंच जाएगी।

फिलहाल कंपनी में सरकार की हिस्सेदारी 49% है। वारंट्स के पूरी तरह कन्वर्ट होने के बाद यह घटकर करीब 47% रह जाएगी। इससे भविष्य में कंपनी के बकाया को सरकारी इक्विटी में बदलने की गुंजाइश बनी रहेगी।

कर्जदाताओं को जाएगा पॉजिटिव संकेत

एनालिस्टों का मानना है कि यह प्रमोटर फंडिंग बैंकों और दूसरे कर्जदाताओं के लिए पॉजिटिव संकेत है। वोडाफोन आइडिया लंबे समय से अपने रिवाइवल के लिए जरूरी बैंक फंडिंग जुटाने में संघर्ष कर रही है। ऐसे में प्रमोटरों का अतिरिक्त निवेश कर्जदाताओं का भरोसा बढ़ा सकता है।

1.27 लाख करोड़ रुपये की देनदारी

AGR राहत मिलने के बावजूद कंपनी की वित्तीय चुनौतियां पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं। एनालिस्ट अब भी कंपनी की स्थगित स्पेक्ट्रम देनदारियों को लेकर चिंता जता रहे हैं। मार्च 2026 के अंत तक यह देनदारी 1.27 लाख करोड़ रुपये थी। वोडाफोन आइडिया को अगले तीन वर्षों में लगभग 49,000 करोड़ रुपये का स्पेक्ट्रम भुगतान करना है।

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